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म्यांमार पर मानवाधिकार प्रस्ताव पेश न करने का भारत का आग्रह

 Written By: IANS
 Published : Apr 25, 2015 05:33 pm IST,  Updated : Apr 25, 2015 05:34 pm IST

संयुक्त राष्ट्र:  भारत ने संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों से म्यांमार में मानवाधिकार की स्थिति पर वार्षिक प्रस्ताव पेश नहीं करने का आग्रह किया है। भारत का कहना है कि यह प्रस्ताव पेश नहीं करने

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म्यांमार पर मानवाधिकार प्रस्ताव पेश न करने का भारत का आग्रह

संयुक्त राष्ट्र:  भारत ने संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों से म्यांमार में मानवाधिकार की स्थिति पर वार्षिक प्रस्ताव पेश नहीं करने का आग्रह किया है। भारत का कहना है कि यह प्रस्ताव पेश नहीं करने से म्यांमार में जारी सुधारों को प्रोत्साहन मिलेगा।

म्यांमार में शांति, विकास और लोकतंत्र से संबंधित साझेदार समूह की शुक्रवार को यहां आयोजित बैठक में संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थाई प्रतिनिधि अशोक कुमार मुखर्जी ने कहा कि राखिने में म्यांमार सरकार ने कानून-व्यवस्था सुधारने की दिशा में कदम उठाए हैं और संयुक्त राष्ट्र व अन्य मानवाधिकार एजेंसियों के साथ मिलकर हिंसा में प्रभावित लोगों के पुनर्वास में सहयोग करने की दिशा में इच्छा व्यक्त की है।

मुखर्जी ने कहा, "हमने संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों से म्यांमार में मानवाधिकारों की स्थिति पर वार्षिक प्रस्ताव रोकने के लिए सहमति बनाने का आग्रह किया है। मेरे विचार में, इससे म्यांमार में पहले से शुरू सुधारों की दिशा में वैश्विक समुदाय को मजबूत समर्थन और प्रोत्साहन मिलेगा।"

म्यांमार में मानवाधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र महासभा का अंतिम प्रस्ताव दिसंबर में लाया गया था।

पश्चिमी म्यांमार का राखिने प्रांत 2012 में बौद्ध राखिनों और मुस्लिम रोहिंग्यों के बीच हुई जातीय हिंसा से अभी उबर रहा है।

मुखर्जी ने कहा कि भारत ने राखिने प्रांत को दंगों से उबरने के लिए सहायता उपलब्ध कराई है। भारत ने म्यांमार में पहले दंगे के बाद पुनर्वास के लिए 240,000 डॉलर की राहत राशि प्रदान की थी और प्रभावित क्षेत्रों में दोनों समुदायों के लिए 10 स्कूलों के निर्माण के लिए दस लाख डॉलर की राशि दी थी।

इस बैठक में म्यांमार सरकार का उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल शामिल हुआ, जिसमें म्यांमार के राष्ट्रपति कार्यालय में मंत्री सो थेन, आव्रजन मंत्री खिन यी, अटॉर्नी जनरल तुन शीन और राखिने के मुख्यमंत्री मुआंग मुआंग ओन शामिल थे।

म्यांमार में 2010 के चुनाव के बाद सैन्य परिषद 2011 में भंग कर दी गई और इसके साथ ही यह देश लगभग 40 वर्षो के सैन्य शासन से बाहर निकल गया।

इस बैठक की अध्यक्षता संयुक्त राष्ट्र के महासचिव बान की-मून ने की। उन्होंने देश में शांति और स्थिरता प्राप्त करने के लिए म्यांमार के अनुकरणीय प्रयासों की प्रशंसा की।

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