न्यूयार्क: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर सुरक्षा परिषद में भारत की स्थाई सदस्यता के लिए पुरजोर मांग उठाई है। UN महासभा में अपने संबोधन के दौरान मोदी ने सुरक्षा परिषद में बदलाव को जरूरी बताया,19 मिनट के भाषण में मोदी ने गरीबी, सस्टेनेबल डेवलपमेंट, क्लाइमेंट चेंज जैसे कई मुद्दों पर बेबाक राय रखी। साथ ही अपनी सरकार के एजेंडे का भी किया जिक्र किया।
सुरक्षा परिषद में बदलाव अनिवार्य है:
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दो टूक शब्दों में UN को बता दिया कि भारत सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता का हकदार है और इसके लिए UN सिक्योरिटी काउंसिल में बदलाव जरूरी है। मोदी ने साफ कर दिया कि बिना बदलाव सुरक्षा परिषद अपनी जिम्मेदारी ठीक तरह नहीं निभा सकता, पूरी दुनिया के लोग खुद को सुरक्षित महससू करें इसके लिए UN को अपनी भागीदारी का दायरा बढ़ाना होगा। PM ने अपनी बातें रखने के लिए वेदों की ऋचाओं और राष्ट्रपित महात्मा गांधी तथा जनसंघ के विचारक दीनदायल उपाध्याय की उक्तियों का सहारा लिया।
सुरक्षा परिषद के लिए भारत की आवाज बुलंद करने के साथ ही प्रधानमंत्री ने गरीबी, सस्टेनेबल डेवलपमेंट और क्लाइमेट चेंज जैसे अहम मुद्दों पर भारत का रुख सामने रखा और अहम सुझाव भी दिए।
मोदी ने उद्योगों को प्राइवेट और पब्लिक सेक्टर के खांचे में बांट कर देखने वाली दुनिया को तीसरे पर्सनल सेक्टर का मंत्र दिया। उन्होंने आर्थिक और सामजिक विकास में तेजी के लिए ग्लोबल शिक्षा पर भी जोर दिया।
हिंदी में दिया 19 मिनट तक भाषण :
प्रधानमंत्री मोदी ने करीब 19 मिनट तक हिंदी में भाषण दिया। इस भाषण के दौरान उन्होंने कई बार संस्कृत श्लोकों का भी इस्तेमाल किया। मोदी ने बड़े ही ताकतवर अंदाज में पूरी दुनिया के सामने भारत का पक्ष रखा। हर राष्ट्राध्यक्ष को सिर्फ 5 मिनट का वक्त भाषण के लिए मिला था लेकिन मोदी ने करीब 19 मिनट तक UN महासभा को संबोधित किया।