वाशिंगटन: अमेरिका में रिपब्लिकन पार्टी के राष्ट्रपति पद के संभावित उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप ने जापान यात्रा के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा द्वारा पर्ल हार्बर पर किए गए जापान के हमले की चर्चा नहीं करने की आलोचना की है। जापान की सेना ने वर्ष 1941 में अमेरिका के पर्ल हार्बर पर हमला किया था।
ट्रंप ने शनिवार को ट्विटर पर लिखा, "क्या ओबामा ने जापान में कहीं भी पर्ल हार्बर पर किए गए हमले की चर्चा की? इस हमले में हजारों अमेरिकी मारे गए थे।" ओबामा ने शुक्रवार को हिरोशिमा का दौरा किया था। वह 1945 में इस शहर पर अमेरिकी परमाणु बम हमले के बाद यहां की यात्रा करने वाले पहले अमेरिकी राष्ट्रपति हैं।
हिरोशिमा पर द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान अमेरिका ने छह अगस्त 1945 को दुनिया का पहला परमाणु बम गिराया था। इसमें 1,40,000 से ज्यादा लोग मारे गए थे। इसके दो दिन बाद जापान के एक अन्य शहर नागासाकी पर अमेरिका ने दूसरा परमाणु बम गिराया था, जिसमें 74,000 लोग मारे गए थे। इन हमलों के सात दिनों के भीतर जापान ने आत्मसमर्पण कर दिया था।
जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने कहा है कि उनकी अमेरिका के हवाई स्थित पल हार्बर की यात्रा करने की कोई योजना नहीं है। जापानी सैनिकों ने सात दिसंबर 1941 को पर्ल हार्बर पर हमला किया था। इसमें 2,400 लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद अमेरिका द्वितीय विश्व युद्ध में शामिल हो गया था। कई प्रेक्षकों और अमेरिकी मीडिया का कहना है कि ओबामा राष्ट्रपति पद के अपने आखिरी कार्यकाल के आखिरी दिनों में हिरोशिमा का दौरा करने वाले पहले अमेरिकी राष्ट्रपति बनकर परमाणु निरस्त्रीकरण की वकालत करने वाले की छवि हासिल करना चाह रहे हैं।
प्रेक्षकों का कहना है कि जापान ओबामा को इसलिए हिरोशिमा नहीं लेकर गया क्योंकि वह परमाणु हमले पर अमेरिका द्वारा माफी मांगने पर जोर देना चाहता है या फिर परमाणु मुक्त विश्व बनाने की कवायद दिखाना चाहता है। दरअसल वह द्वितीय विश्व युद्ध के पहले और उस दौरान अन्य देशों पर हुए जापान के जुल्म की अनदेखी करते हुए हिरोशिमा की त्रासदी पर जोर देना चाहता है। प्रेक्षकों का मानना है कि जापान एक हमलावर के रूप में अपनी छवि को मिटाते हुए एक पीड़ित के रूप में खुद को चित्रित करने का प्रयास कर रहा है।