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फिलिस्तीन पर इजरायली रुख का संयुक्त राष्ट्र में बचाव कठिन : ओबामा

 Written By: IANS
 Published : Jun 03, 2015 08:32 pm IST,  Updated : Jun 03, 2015 08:46 pm IST

जेरूसलम: अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा है कि इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू द्वारा फिलिस्तीनी राष्ट्र के खिलाफ दिए गए बयानों का संयुक्त राष्ट्र में बचाव करना इस यहूदी देश के लिए कठिन है, वह

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फिलिस्तीन पर इजरायली रुख का संयुक्त राष्ट्र में बचाव कठिन : ओबामा

जेरूसलम: अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा है कि इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू द्वारा फिलिस्तीनी राष्ट्र के खिलाफ दिए गए बयानों का संयुक्त राष्ट्र में बचाव करना इस यहूदी देश के लिए कठिन है, वह भी तब जब यूरोप फिलिस्तीनी प्राधिकार को मान्यता देने की पहल कर रहा है। ओबामा ने मंगलवार रात एक इजरायली नेटवर्क के साथ एक साक्षात्कार में स्पष्ट तौर पर कहा, "यदि कोई भी वहां शांति प्रक्रिया नहीं चाहता, तो यह उन लोगों के साथ बातचीत को अधिक कठिन बना देता है, जो बस्तियों के निर्माण को लेकर चिंतित हैं, जो मौजूदा हालात को लेकर चिंतित हैं, मेरे लिए उनसे यह कहना अधिक कठिन है कि संयम बनाए रखें.. क्योंकि उन्हें जो करने की जरूरत है, वह यह कि वे उन बयानों पर गौर करें, जिनमें कहा जा रहा है कि वहां कोई प्रक्रिया नहीं चल रही है।"

यह साक्षात्कार बुधवार को समाचार पत्र हरेत्ज में प्रकाशित हुआ है।

एक फिलिस्तीनी राज्य को मान्यता देने की यूरोपीय पहल के संदर्भ में ओबामा ने कहा, "इस बिंदु तक हमने उदाहरण के तौर पर यूरोपीय प्रयासों को या अन्य प्रयासों को विफल किया है। क्योंकि हमने कहा है कि इस मुद्दे का समाधान तभी संभव है, जब दो पक्ष मिलकर साथ काम करें। बेशक यहां चुनौती है। यद्यपि वास्तव में वहां किसी वास्तविक शांति प्रक्रिया की कोई संभावना नहीं है।"

हाल के वर्षो में अमेरिकी वीटो ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को कई ऐसे प्रस्ताव पारित करने से रोका है, जिनमें फिलिस्तीनी जमीन पर इजरायली कब्जे की निंदा की गई थी और दोनों पक्षों के बीच लड़ाई समाप्त करने के लिए कार्रवाई की मांग की गई थी।

नेतन्याहू ने अपने चुनाव अभियान के दौरान कहा था कि उनके शासन के दौरान कोई फिलिस्तीनी राज्य नहीं बनेगा। लेकिन बाद में वह अपने बयान से पलट गए और उन्होंने फिलिस्तीन के साथ एक नई संवाद प्रक्रिया शुरू करने की इच्छा जाहिर की थी।

लेकिन ओबामा ने नेतन्याहू के रुख को तमाम चेतावनियों, तमाम शर्तों वाला माना है, इतना कि इस बारे में सोचना भी वास्तविकता से परे है कि वे शर्ते निकट भविष्य में कभी पूरी हो पाएंगी। उन्होंने यह भी कहा है कि खतरा इस बात का है कि पूरे देश की विश्वसनीयता समाप्त हो रही है।

ओबामा ने कहा, "अंतर्राष्ट्रीय समुदाय पहले से नहीं मानता कि इजरायल दो-राज्य के समाधान को लेकर गंभीर है। प्रधानमंत्री ने जो बयान दिया है, उससे इस बात को बल मिला है।"

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