वाशिंगटन: आतंकी संगठन लश्कर ए तैयबा के खिलाफ कार्रवाई करने के संबंध में अमेरिका के साथ की गई अपनी प्रतिबद्धता को पाकिस्तान ने आज तवज्जो न देते हुए कहा कि इस तरह के वायदे में कुछ भी नया नहीं है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के विदेश नीति सलाहकार सरताज अजीज ने कहा, इसमें कुछ भी नया नहीं है। लश्कर ए तैयबा का जिक्र संयुक्त राष्ट्र प्रस्तावों के संदर्भ में है और इसमें ज्यादा कुछ नहीं पढ़ा जाना चाहिए। हम संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव के तहत लश्कर ए तैयबा और इससे जुड़े संगठनों के खिलाफ कार्रवाई करते रहे हैं और हम इसके प्रति कटिबद्ध हैं। वह बृहस्पतिवार को शरीफ और अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के बीच मुलाकात के बाद जारी संयुक्त बयान में इस संबंध में किए गए जिक्र को लेकर पूछे गए सवाल का जवाब दे रहे थे।
संयुक्त बयान में कहा गया, प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति को लश्कर ए तैयबा और इससे जुड़े संगठनों सहित संयुक्त राष्ट्र की सूची में शामिल आतंकी लोगों और समूहों के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों के तहत अपनी अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं और दायित्व के अनुरूप प्रभावी कार्रवाई करने के पाकिस्तान के संकल्प के बारे में अवगत कराया।
अजीज ने संवाददाता सम्मेलन के दौरान संयुक्त बयान के इस अंश को पढ़ा और कहा कि पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की सूची में शामिल आतंकी संगठनों के खिलाफ पहले से ही कार्रवाई करता रहा है। भारत और पाकिस्तान के बीच एनएसए स्तर की बातचीत स्थगित होने से संबंधित एक सवाल के जवाब में अजीज ने कहा कि उफा बयान की दोनों देशों की अपनी-अपनी व्याख्या है। अजीज ने कहा कि न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा से इतर एनएसए स्तर की बातचीत के लिए भारत की तरफ से एक प्रस्ताव आया।
उन्होंने उल्लेख किया कि लेकिन भारत ने जिद की कि यह बातचीत आतंकवाद पर हो। अजीज ने कहा कि उन्होंने भारत से कहा कि बातचीत के कार्यक्रम पर चर्चा करने के लिए पहले वह विदेश मंत्री से मिलेंगे और तब उनके बीच एनएसए स्तर की वार्ता होगी। उन्होंने कहा, हमारा रूख है कि कम से कम उफा बयान के पैरा दो पर विदेश सचिव स्तर या आधिकारिक स्तर या विदेश मंत्री स्तर पर कुछ वार्ता होनी चाहिए। भारत का यह रूख हमें स्वीकार्य नहीं है कि बातवीत केवल आतंकवाद पर होगी।