टोरंटो: कनाडाई सिखों ने 1914 के कोमागाटा मारू घटना को कनाडा के स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करने की मांग की है। साथ ही, भारतीय प्रवासियों के साथ हुए घोर अन्याय को लेकर प्रधानमंत्री जस्टिन त्रुदो के माफी मांगे जाने का उन्होंने स्वागत किया है। त्रुदो ने हाउस ऑफ कामंस में माफी मांगते हुए कहा, एक सदी से भी पहले एक बहुत बड़ा अन्याय हुआ था।
विश्व सिख संगठन ने कनाडाई प्रांतीय मंत्रियों को पत्र लिख कर कोमागाटा मारू घटना को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करने की मांग की है। संगठन के अध्यक्ष मुखबीर सिंह ने बताया कि हाउस ऑफ कामंस में आज प्रधानमंत्री त्रुदो की माफी कनाडाई सिखों के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है और यह कनाडा के इतिहास में कोमागाटा मारू के काले अध्याय को जाहिर करता है। सिंह ने बताया कि यह जरूरी है कि घटना, साथ ही प्रकरण को उकसाने वाले प्रवासी विरोधी भावना को हमारी प्रांतीय शिक्षा के पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाए।
उन्होंने बताया कि यह जरूरी है कि कनाडावासी के रूप में हम अपने बच्चों को नस्लवाद जैसे मुद्दों का मुकाबला करने की अपने बच्चों को शिक्षा दें और कोमागाटा मारू घटना के बारे में जानना ऐसा करने के लिए एक शानदार अवसर है। गौरतलब है कि कोमागाटा मारू 376 यात्रियों को लेकर हांगकांग से 23 मई 1914 को वैंकुवर हार्बर पहुंचा था लेकिन ज्यादतर यात्रियों को वहां नहीं उतरने दिया गया। बंदरगाह पर दो महीने रूकने के बाद जहाज भारत लौटा और वापसी पर ब्रिटिश सैनिकों के साथ झड़प में कम से कम 19 लोग मारे गए जबकि अन्य जेल में डाल दिये गये।