संयुक्त राष्ट्र: संयुक्त राष्ट्र मे पहली बार बी आर अंबेडकर की जयंती मनाई। संयुक्त राष्ट्र के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा कि बी आर अंबेडकर हाशिए पर जी रहे लोगों के लिए ‘एक वैश्विक प्रतीक’ हैं। संयुक्त राष्ट्र और भारत उनके विजन को पूरा करने के लिए साथ मिलकर काम करेंगे। UNDP की प्रशासक हेलेन क्लार्क ने अंबेडकर की 125 वीं जयंती पर आयोजित समारोह में कहा कि, ‘संयुक्त राष्ट्र में इस महत्वपूर्ण वषर्गांठ को मनाए जाने पर मैं संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) की ओर से भारत की सराहना करती हूं।’
संयुक्त राष्ट्र के अगले महासचिव पद के उम्मीदवारों में शामिल क्लार्क ने कहा, ‘हम वर्ष 2030 के एजेंडे और दुनिया भर के गरीब एवं वंचित लोगों के लिए अंबेडकर की सोच को हकीकत में बदलना सुनिश्चित करने के लिए भारत के साथ अपनी बेहद करीबी साझेदारी को जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं।’ भारतीय संविधान के प्रमुख शिल्पी अंबेडकर की 125वीं जयंती कल इस वैश्विक संस्था में मनाई गई थी। उसका आयोजन नागरिक समाज के समूहों कल्पना सरोज फाउंडेशन और फाउंडेशन ऑफ ह्यूमन होराइजन के साथ मिलकर किया गया। संयुक्त राष्ट्र विकास समूह की अध्यक्ष कलार्क ने राजनयिकों, विद्वानों और अंबेडकर के अनुयायियों को अपने संबोधन में कहा कि यह अवसर एक ऐसे ‘बहुत महान व्यक्ति की विरासत’’ को याद करता है, जिन्होंने इस बात को समझा कि ‘‘अनवरत चली आ रहीं और बढ़ती असमानताएं’’ देशों और लोगों की आर्थिक और सामाजिक कल्याण के समक्ष मूल चुनौतियां पेश करती हैं।
न्यूजीलैंड की पूर्व प्रधानमंत्री क्लार्क ने कहा कि अंबेडकर के आदर्श आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने वे 60 साल पहले थे। वंचित समूहों के समावेश और सशक्तीकरण, श्रम कानूनों में सुधार और सभी के लिए शिक्षा को बढ़ावा देने पर अंबडेकर की ओर से किए गए काम ने उन्हें ‘भारत और अन्य देशों में हाशिए पर जी रहे लोगों के लिए एक प्रतीक बना दिया।’