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ISIS के चगुंल से बचकर भागी महिला, UN में सुनाई थी आपबीती

 Written By: India TV News Desk
 Published : Jan 18, 2016 12:48 pm IST,  Updated : Jan 18, 2016 02:26 pm IST

नई दिल्ली: ISIS की ओर से अगवा कि नादिया मुराद ने अपने सात होने वाले अत्याचारों को बताया और यह भी बताया कि किस प्रकार वह isis के चंगुल से भागने में सफल रही। आइए

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नई दिल्ली: ISIS की ओर से अगवा कि नादिया मुराद ने अपने साथ होने वाले अत्याचारों को बताया और यह भी बताया कि किस प्रकार वह  isis के चंगुल से भागने में सफल रही। आइए सुनते हैं क्या कहा नादिया मुराद ने।

ISIS के हमारे गांव में कब्जा करने से पहले मैं अपनी मां, भाई और बहनों  के साथ इराक के शिंजा के पास कोचू गांव में रहती थी। मैं उस समय छठी कक्षा में पढ़ रही थी। और हमारे गांव में सभी लोग खेती करते थे। गांव में कुल 1700 लोग रहते थे। 3 अगस्त 2014 को जब ISIS ने हमला किया तो कुछ लोग भाग गए लेकिन हमारा गांव इतना दूर था कि हम नहीं भाग सकते थे और हमें हिरासत में ले लिया गया। आंतकियों द्वारा हमारे हथियार छीन लिए गए और हमे चेतावनी  दी गई कि हम अपना धर्म बदल लें।

इस्लाम धर्म कबूलने के लिए दबाव डाला

15 अगस्त के लिए ISIS ने करीब 1000 लोगों को मौत के घाट उतार दिया। और हमें एक दो मंजिला स्कूल में लेकर गए। पहली मंजिल पर पुरूषों को रका गया था और दूसरी पर हमें। हमसे हमारा सारा सामान छीन लिया। तभी ISIS का नेता आया और उसने हमसे इस्लाम धर्म कबूल करने को कहा। उन्होंने कहा कि जिसे इस्लाम धर्म कबूल है वह कमरा छोड़ कर बाहर चला जाए लेकिन हम जानते थे कि वह लोग इस्लाम धर्म कबूल करने के बाद भी हमें मार देंगे। क्योंकि उनका मानना है कि यजीदी धर्म कबूल करने के बाद भी मुसलमान नहीं बनते। हमें यकीन था कि महिला होने के नाते वे हमें नहीं मारेंगे और हमें ज़िंदा रखेंगे और हमारा इस्तेमाल कुछ और चीज़ों के लिए करेंगे।

महिलाओं को तीन भागों में बांटा गया

जब वो आदमियों को स्कूल से बाहर ले जा रहे थे तो हमें नहीं पता था कि किसके साथ क्या हो रहा था, हमें गोलियां चलने की आवाज़ें आ रही थी। मेरे भाई और दूसरे लोग मारे जा रहे थे। उन्होंने एक बच्चे को छोड़ दिया उसने हमें बताया कि लड़ाकों ने किसी को नहीं छोड़ा और सभी को मार दिया। वे हमें दूसरे गांव में ले गए। रात हो गई थी और उन्होंने हमें वहाँ  एक स्कूल में रखा। हमें तीन ग्रुपों में बांटा गया। पहले ग्रुप में युवा महिलाएं थी, दूसरे में बच्चे, तीसरे ग्रुप में बाक़ी महिलाएं। जिन महिलाओं को उन्होंने शादी के लायक़ नहीं समझा उनका क़त्ल कर दिया, इनमें मेरी मां भी शामिल थी।

वे हमें मोसुल में इस्लामिक कोर्ट में ले गए। जहाँ उन्होंने हर महिला की फोटो खींची। हर तस्वीर के साथ एक फ़ोन नंबर दिया था ये फ़ोन नंबर उस लड़ाके का था जिसके साथ महिला को भेजना था। तमाम जगह से आईएस लड़ाके इस्लामिक कोर्ट आते और तस्वीरों को देखकर अपने लिए लड़कियां चुनते। फिर पसंद करने वाला लड़ाका उस लड़ाके से मोलभाव करता जो उस लड़की को लेकर आया था। फिर वह चाहे उसे ख़रीदे, किराए पर दे या अपनी किसी जान-पहचान वाले को तोहफ़े में दे दे।

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