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भारत बना दुनिया का विकास इंजन, वैश्विक संघर्षों के बावजूद 2026 और 2027 में सबसे तेज गति से बढ़ेगी अर्थव्यवस्था; UN का अनुमान

 Edited By: Dharmendra Kumar Mishra
 Published : Apr 21, 2026 11:10 am IST,  Updated : Apr 21, 2026 11:12 am IST

वैश्विक संघर्षों के बावजूद भारत 2026 और 2027 में दुनिया की सबसे तेज गति से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बना रहेगा। संयुक्त राष्ट्र ने भारत के लिए यह अनुमान लगाया है। साथ ही भारत की नीतियों की तारीफ भी की है।

संयुक्त राष्ट्र (फाइल)- India TV Hindi
संयुक्त राष्ट्र (फाइल) Image Source : AP

संयुक्त राष्ट्रः इजरायल-अमेरिका-ईरान और रूस-यूक्रेन जैसे दुनिया भर में छिड़े तमाम युद्धों और विपरीत वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था 2026 और 2027 में सबसे तेज गति से आगे बढ़ेगी। यह दावा संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में विशेषज्ञों के अनुमानों के आधार पर की गई है। यूएन ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि भारत की अर्थव्यवस्था के इस वर्ष 6.4 प्रतिशत और 2027 में 6.6 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान है। यूएन के इस अनुमान से दुनिया के तमाम देश चकरा गए हैं। इस रिपोर्ट से यह भी साफ हो गया है कि पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत सही दिशा में आगे बढ़ रहा है। 

2025 में भारत ने हासिल की 7.4 फीसदी विकास दर

यूनाइटेड नेशन्स इकोनॉमिक एंड सोशल कमीशन फॉर एशिया एंड पैसिफिक (ESCAP) ने सोमवार को जारी अपनी रिपोर्ट में कहा कि दक्षिण और दक्षिण-पश्चिम एशिया की अर्थव्यवस्थाएं 2025 में 5.4% की दर से बढ़ीं, जो 2024 में 5.2% थी। इस वृद्धि में भारत की मजबूत आर्थिक प्रगति का बड़ा योगदान रहा। रिपोर्ट के अनुसार 2025 में भारत की वृद्धि दर 7.4% तक पहुंच गई, जिसे मजबूत खपत, विशेषकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था से मांग, वस्तु एवं सेवा कर (GST) दरों में कटौती और अमेरिका के टैरिफ लागू होने से पहले निर्यात में तेजी ने समर्थन दिया। यह रिपोर्ट “ESCAP-2026” शीर्षक से जारी की गई है।

अमेरिकी टैरिफ भी भारत का कुछ नहीं बिगाड़ सका

रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिकी टैरिफ भी भारत का कुछ खास नहीं बिगाड़ सका। हालांकि 2025 के दूसरे छमाही में भारत की आर्थिक गतिविधियों में कुछ नरमी आई, क्योंकि अगस्त 2025 में ही ट्रंप ने 50% टैरिफ भारत पर लागू कर दिया था। इसके बाद अमेरिका को निर्यात में 25% की गिरावट आई। इन सबके बावजूद सेवा क्षेत्र भारत के विकास का प्रमुख आधार बना रहा। रिपोर्ट में 2026 के लिए भारत की वृद्धि दर 6.4% और 2027 के लिए 6.6% रहने का अनुमान लगाया गया है। 

भारत में घटेगी महंगाई

यूएन की रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है चुनौतीपूर्ण वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद भारत में महंगाई दर इस वर्ष 4.4% और 2027 में 4.3% रहने की संभावना जताई गई है। रिपोर्ट के अनुसार व्यापार तनाव और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के कारण एशिया-प्रशांत क्षेत्र की विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) में गिरावट आई। 2024 में 0.6% की वृद्धि के बाद 2025 में यह 2% घट गया, जबकि वैश्विक स्तर पर FDI प्रवाह 14% बढ़ा। 

एशिया-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ा निवेश

रिपोर्ट में कहा गया है कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र में ग्रीनफील्ड FDI आकर्षित करने वाले प्रमुख देशों में भारत, ऑस्ट्रेलिया, साउथ कोरिया, और कजाकिस्तान शामिल रहे, जहां क्रमशः 50 अरब डॉलर, 30 अरब डॉलर, 25 अरब डॉलर और 21 अरब डॉलर के निवेश की घोषणा हुई। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि विदेशों में कार्यरत एशियाई और प्रशांत क्षेत्र के श्रमिकों द्वारा भेजी गई व्यक्तिगत धनराशि (रेमिटेंस) लगातार बढ़ रही है, जिससे घरेलू रोजगार की कमजोर स्थिति के प्रभाव को कम करने में मदद मिल रही है। 

यह भी जानें

भारत और फिलीपीन्स में लगभग 40% रेमिटेंस आवश्यक खर्चों जैसे चिकित्सा पर खर्च होते हैं। हालांकि 2024 में 137 अरब डॉलर के साथ दुनिया का सबसे बड़ा रेमिटेंस प्राप्तकर्ता होने के बावजूद भारत को 2026 से अमेरिका द्वारा लगाए गए 1% कर के कारण नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। रिपोर्ट में इंटरनेशनल रिन्यूवल एनर्जी एजेंसी के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा गया कि वैश्विक स्तर पर लगभग 16.6 मिलियन ग्रीन जॉब्स हैं। इनमें 7.3 मिलियन चीन में, 1.3 मिलियन भारत में और 2.5 मिलियन एशिया के अन्य हिस्सों में हैं। भारत की प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना का उदाहरण देते हुए रिपोर्ट में कहा गया कि यह नीति सौर ऊर्जा, बैटरियों और ग्रीन हाइड्रोजन के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देकर आयात पर निर्भरता कम करने और नए औद्योगिक अवसर पैदा करने में मदद कर रही है।

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