अमेरिका और ईरान के बीच हो रही शांति वार्ता के बीच पेन्सिलवेनिया पहुंचने पर पत्रकारों से बात करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के परमाणु ठिकानों के निरीक्षण पर सख्त रुख दिखाते हुए कहा, ईरान पहले ही सैद्धांतिक रूप से परमाणु ठिकानों के निरीक्षण को लेकर सहमत हो चुका है और अगर वे अब मुकरते हैं तो शांति वार्ता की बैठक रद्द कर दी जाएगी। ट्रंप ने कहा, "वे गलत हैं। वे गलत हैं। वे गलत हैं। वे जानते हैं कि वे गलत हैं। उन्होंने हमें अंदरूनी तौर पर बताया था और हमारे पास निरीक्षण के लिए 100 प्रतिशत पक्की जानकारी है। और अगर वे सही होते, तो मैं अभी बैठकें रद्द कर देता।"
ईरान को ट्रंप ने क्यों दी धमकी?
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अगर तेहरान, इस्लामिक रिपब्लिक में इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA) को परमाणु निरीक्षण की इजाज़त नहीं देता है, तो वे ईरान के साथ तकनीकी बातचीत के तहत होने वाली बैठकें रद्द कर देंगे। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि ईरान की तरफ से अमेरिका को चल रही बातचीत के हिस्से के तौर पर परमाणु ठिकानों के निरीक्षण की पहुंच के बारे में भरोसा दिलाया गया है। निरीक्षण की समय-सीमा के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, "सही समय पर। कोई जल्दबाजी नहीं है, लेकिन वे सही समय पर वहां मौजूद होंगे।"
उन्होंने आगे दावा किया कि ईरान के साथ बातचीत आगे बढ़ रही है और इसके साथ ही ट्रंप ने ये संकेत भी दिया कि युद्ध के बात ईरान की स्थिति काफी कमज़ोर हो गई है। उन्होंने कहा, "हम ईरान के साथ बहुत अच्छा काम कर रहे हैं। वे बुरी तरह कमज़ोर हो चुके हैं, और हम उनके साथ एक समझौता कर रहे हैं, और देखेंगे कि सब कैसे आगे बढ़ता है।"
ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होगा
ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं पर अपने प्रशासन का रुख दोहराते हुए ट्रंप ने कहा, "और सबसे बड़ी बात यह है कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होगा। ईरान रणनीतिक रूप से कमज़ोर स्थिति में है। उन्होंने कहा, "हमने ईरान को ऐसी स्थिति में ला दिया है जिसमें कोई और कभी नहीं ला पाया। यह काम दूसरे राष्ट्रपतियों को 47 साल पहले ही कर लेना चाहिए था। और हमने ईरान को ऐसी स्थिति में पहुंचा दिया है, जहां उनकी सेना पूरी तरह से...उनका नेतृत्व खत्म हो गया है। उनका रडार सिस्टम भी खत्म हो गया है।"
होर्मुज को लेकर क्या बोले ट्रंप?
ट्रंप ने होर्मुज़ (Strait of Hormuz) से तेल टैंकरों से लदे जहाजों के गुजरने से जुड़ी घटनाओं का भी ज़िक्र किया। उन्होंने दावा किया कि दोनों पक्षों के बीच तकनीकी बातचीत के शुरुआती दौर के बाद तेल की आवाजाही में बड़ी रुकावट आई है। यह बातचीत स्विट्ज़रलैंड में 14-सूत्रीय समझौता ज्ञापन (MoU) के तहत हुई थी, जिसका मकसद क्षेत्र में तनाव खत्म करना था। उन्होंने कहा, "जैसा कि आपने शायद कल सुना होगा, 19 बैरल तेल की आपूर्ति रुकी, और यह होर्मुज़ के इतिहास में सबसे बड़ी घटना है।"
ईरान की मानवीय ज़रूरतों का भी ध्यान रखेंगे
उन्होंने कहा, ट्रंप ने आगे कहा कि किसी भी संभावित आर्थिक समझौते में ईरान की मानवीय ज़रूरतों का भी ध्यान रखा जाएगा। उन्होंने कहा, "ईरान से जो पैसा लिया जाएगा, वह हमारे किसानों को दिया जाएगा ताकि वे ईरान को मक्का, सोयाबीन और गेहूं भेज सकें, क्योंकि वहां भुखमरी, भोजन और दवाओं की समस्या है।" ये बातें स्विट्जरलैंड में हुई बातचीत के बाद वॉशिंगटन और तेहरान के बीच न्यूक्लियर इंस्पेक्शन, प्रतिबंधों में ढील और क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चल रही कूटनीतिक चर्चाओं के दौरान कही गईं।