कैमूरः बिहार में 6 और 11 नवंबर को होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां जोरों पर है। कैमूर जिले में भी राजनीतिक दल चुनाव प्रचार में अभी से ही जुटे हैं। संभावित प्रत्याशी जनता के बीच अभी से ही जा रहे हैं। जिले की भभुआ विधानसभा सीट पर भी चुनावी माहौल गरम है। इस सीट पर अभी आरजेडी का कब्जा है।
भभुआ के बारे में जानें
भभुआ विधानसभा सीट कैमूर जिले में आती है। इस निर्वाचन क्षेत्र में ओबीसी मतदाताओं की अच्छी संख्या है। बड़ी संख्या में मतदाता कोइरी और कुर्मी जातियों से आते हैं। कोइरी-कुर्मी संयोजन के बाद उच्च जाति के ब्राह्मण और कायस्थ दूसरा सबसे बड़ा समूह हैं।
यह इलाका उत्तर में बक्सर जिले और यूपी के गाजीपुर जिले से घिरा है। दक्षिण में झारखंड का गढ़वा जिला है। ऐसा माना जाता है कि शेरशाह सूरी ने 1532 में भभुआ शहर की स्थापना की थी। भभुआ ऐतिहासिक मुंडेश्वरी मंदिर और मनोरम कैमूर पर्वत श्रृंखला के लिए जाना जाता है। इस इलाके की प्रमुख नदी कर्मनाशा व दुर्गावती है।
भभुआ विधानसभा सीट का इतिहास
इस निर्वाचन क्षेत्र में 2018 के उपचुनाव सहित 18 विधानसभा चुनाव हुए हैं। कांग्रेस ने यह सीट छह बार जीती है। बीजेपी और आरजेडी ने तीन-तीन बार यह सीट जीती है। जबकि सीपीआई ने दो बार जीती है। जनता पार्टी, बसपा और एलजेपी के खाते में एक-एक बार यह सीट गई है। भभुआ विधानसभा सीट पर साल 2020 में राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) ने जीत हासिल की थी। आरजेडी के भरत बिंद ने बीजेपी की रिंकी रानी पांडे को 10045 मतों के अंतर से हराकर यह सीट जीती थी। यह विधानसभा क्षेत्र सासाराम लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है। 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने यह सीट जीती थी।
भभुआ सीट पर 2020 में आरजेडी तो 2015 में बीजेपी को जीत मिली थी। 2018 के उपचुनाव में भी बीजेपी यहां से जीती थी। 2010 के चुनाव में एलजेपी का उम्मीदवार यहां से जीता था।
इस बार क्यों कड़ा होगा मुकाबला
महागठबंधन और एनडीए के बीच अभी तक सीट बंटवारा नहीं हुआ है लेकिन माना जा रहा है कि जो सीट पिछले चुनाव में जिस दल के खाते में गई वहां इस बार भी वही दल चुनाव लड़ सकता है। इस हिसाब से यहां आरजेडी और बीजेपी के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिलेगा। चुनावी लड़ाई को इस बार प्रशांत किशोर की पार्टी जनसुराज कड़ा बना सकती है। निर्दलीय और दलबदलू भी प्रमुख दलों का खेल खराब कर सकते हैं। पिछले चुनाव में अकेली लड़ने वाली चिराग पासवान की पार्टी भी इस बार एनडीए गठबंधन के तहत चुनाव लड़ेगी। कुल मिलाकर इस बार चुनावी मुकाबला रोचक हो सकता है।