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बिहार चुनाव 2025ः क्या मखदुमपुर में RJD लगा पाएगी हैट्रिक? चुनावी आंकड़ों में जाने किस पार्टी का पलड़ा भारी

 Published : Sep 06, 2025 09:00 pm IST,  Updated : Nov 11, 2025 02:00 pm IST

मखदुमपुर सीट आरक्षित है। यहां पर मुख्य मुकाबला एनडीए और इंडिया गठबंधन के बीच होगा। जनसुराज पार्टी भी अपना दमखम दिखाने को तैयार है।

मखदुमपुर विधानसभा चुनाव 2025- India TV Hindi
मखदुमपुर विधानसभा चुनाव 2025 Image Source : INDIA TV

जहानाबादः बिहार के जहानाबाद जिले की मखदुमपुर निर्वाचन क्षेत्र में चुनावी हलचल देखी जा रही है। जिले की सभी सीटों पर राजनीतिक दल चुनावी कार्यक्रम कर रहे हैं। इस बार मखदुमपुर सीट पर चुनावी मुकाबला रोचक देखने को मिल सकता है। इस सीट पर अभी आरजेडी का कब्जा है। सतीश कुमार यहां के विधायक हैं। बिहार विधानसभा चुनाव 6 और 11 नवंबर 2025 को होगा और 14 नवंबर को चुनाव के नतीजे आएंगे।

मखदुमपुर के बारे में जानें

मखदुमपुर निर्वाचन क्षेत्र जहानाबाद जिले के अंतर्गत आता है। इलाके की बराबर पहाड़ियां लोगों को आकर्षित करती हैं और गुफाओं को देखने पर्यटक आते हैं। महाभारत काल में लोग इन पहाड़ियों को गोरथगिरि के नाम से जानते थे। यहां पर हिंदुओं की संख्या करीब 93 प्रतिशत है जबकि मुसलमानों की संख्या केवल 6.57 प्रतिशत है। मखदुमपुर आरक्षित अनुसूचित जाति निर्वाचन क्षेत्र है।

 
मखदुमपुर सीट का चुनावी इतिहास

मखदुमपुर में अब तक हुए 17 चुनावों में कांग्रेस ने सात बार जीत हासिल की है। आखिरी जीत कांग्रेस को 1990 में मिली थी। आरजेडी ने चार बार, जबकि जेडीयू और लोजपा ने एक-एक बार जीत हासिल की है। एक निर्दलीय उम्मीदवार भी यहां से जीता है। संयुक्त समाजवादी पार्टी, जनता पार्टी और जनता दल ने एक-एक बार जीत हासिल की है।

मखदुमपुर विधानसभा सीट से 2020 और 2015 में आरजेडी को जीत हासिल हुई थी। जबकि 2010 में जेडीयू के टिकट पर जीतन राम मांझी ने जीत दर्ज की थी। 2005 में यहां से एलजेपी को जीत मिली थी। वहीं, 2000 में आरजेडी ने जीत दर्ज की थी। 1995 में जनता दल के टिकट पर बागी कुमार वर्मा को जीत मिली थी।1990, 1985, 1980 में कांग्रेस ने विजय पताका फहराई थी। 1977 में जेएनपी को जीत मिली थी। 1972, 1969 में कांग्रेस ने यह सीट जीती थी। 1967 में एसएसपी के खाते में यह सीट गई थी।

मखदुमपुर में क्यों कड़ा हो सकता है मुकाबला

मखदुमपुर सीट पर इस बार चुनावी मुकाबला कड़ा देखने को मिल सकता है। पिछली बार जेडीयू की सीटों पर उम्मीदवार उतारने वाली चिराग पासवान की पार्टी इस बार एनडीए में एकजुट होकर लड़ेगी। जबकि प्रशांत किशोर की पार्टी जनसुराज भी चुनावी मैदान में उतर रही है। निर्दलीय उम्मीदवार भी मुकाबले को रोचक बनाने की कोशिश करेंगे। अगर बागी चुनाव लड़े तो मुकाबला और कड़ा हो सकता है। 

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