बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में कहलगांव की सीट कांग्रेस के लिए बेहद अहम रहने वाली है। पिछले दो दशक में कांग्रेस बिहार में बेहद कमजोर हुई है, लेकिन कहलगांव उन सीटों में से एक हैं, जहां कांग्रेस को इस दौरान भी जीत मिलती रही है। ऐसे में कांग्रेस इस सीट पर हर हाल में जीत हासिल करने की कोशिश करेगी। वहीं, बीजेपी की कोशिश छह चुनाव से चला आ रहा पैटर्न बदलने की होगी। ऐसे में यहां का चुनाव बेहद रोचक होने की संभावना है। इस बार यहां दूसरे चरण में 11 नवंबर को मतदान होना है।
कहलगांव सीट पर असली मुकाबला बीजेपी और कांग्रेस के बीच ही होगा। दोनों पार्टियां बिहार में गठबंधन के जरिए एक-दूसरे से मुकाबला करती हैं। कांग्रेस को आरजेडी का साथ मिलता है। वहीं, बीजेपी के साथ नीतीश कुमार की जेडीयू और चिराग पासवान की आरएलडी है। प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी का असर होना भी तय है। हालांकि, इसका असर निर्णायक नहीं होगा। ऐसे में पूरे राज्य में असली मुकाबला इन्हीं दोनों गठबंधन के बीच होना है।
कहलगांव में कब किसे मिली जीत?
कहलगांव विधानसभा क्षेत्र 1951 में बना था। यह भागलपुर लोकसभा क्षेत्र में शामिल छह विधानसभा क्षेत्रों में से एक है। यहां हुए 17 विधानसभा चुनाव हुए हैं और 11 बार कांग्रेस को जीत मिली है। इसी से इस सीट पर कांग्रेस के दबदबे का अंदाजा लगाया जा सकता है। कांग्रेस के जनता दल ही एकमात्र पार्टी है, जो दूसरी बार यहां जीत पाई है। जनता दल को दो बार इस सीट पर जीत मिली है। सीपीआई, जदयू, भाजपा को एक-एक बार जीत मिली है। एक बार निर्दलीय उम्मीदवार को भी सफलता मिल चुकी है।
कांग्रेस के पक्ष में पैटर्न
इस सीट पर कांग्रेस दो बार जीतने के बाद एक बार हारती है। इसके बाद लगातार दो जीत हासिल करती है। साल 2000 से यही पैटर्न चला आ रहा है। 2000 और फरवरी 2005 में कांग्रेस को इस सीट पर जीत मिली, लेकिन अक्टूबर 2005 में हार झेलनी पड़ी। इस चुनाव में जेडीयू को यहां पहली बार जीत मिली। इसके बाद फिर कांग्रेस ने वापसी करते हुए 2010 और 2015 में जीत दर्ज की। हालांकि, 2020 में फिर उसे हार झेलनी पड़ी और कहलगांव में पहली बार कमल खिला। अब बीजेपी के सामने इस पैटर्न को तोड़ते हुए लगातार दूसरी बार जीत हासिल करने की चुनौती है। वहीं, कांग्रेस दो दशक पुराने पैटर्न के सहारे फिर से जीत हासिल करना चाहेगी।