मधुबनी: बिहार विधानसभा चुनाव के लिए सभी पार्टियों ने कमर कस ली है और चुनाव प्रचार शुरू हो चुका है। इस बार का मुकाबला रोचक होने की उम्मीद है क्योंकि अभी तक बिहार चुनाव में क्षेत्रीय पार्टियों का दबदबा ज्यादा रहता था लेकिन इस बार चुनाव में प्रशांत किशोर की पार्टी जन सुराज भी मैदान में है और उसकी रैलियों में भी काफी भीड़ दिखाई दे रही है। देखना ये होगा कि बिहार की जनता किस पार्टी को बहुमत देकर जीत दिलाती है।
बिहार में कब हैं चुनाव?
बिहार में 243 सीटों पर 2 फेस में विधानसभा चुनाव होंगे, जिसमें पहले फेज में 6 नवंबर और दूसरे फेज में 11 नवंबर को वोटिंग होगी। 14 नवंबर को चुनाव के नतीजे आ जाएंगे। 6 नवंबर को बिहार में 121 सीटों पर चुनाव होगा और 11 नवंबर को 122 सीटों पर चुनाव होगा।
साल 2020 और 2015 के विधानसभा चुनावों के नतीजे क्या थे?
बिहार की 243 विधानसभा सीटों में एक सीट मधुबनी भी है। यहां साल 2020 के विधानसभा चुनावों में RJD के प्रत्याशी समीर कुमार महासेठ ने जीत हासिल की थी और दूसरे नंबर पर विकासशील इंसान पार्टी के प्रत्याशी सुमन कुमार महासेठ रहे थे।
2020 के विधानसभा चुनाव में जीत हासिल करने वाले RJD के समीर कुमार महासेठ को 71,332 वोट मिले थे और विकासशील इंसान पार्टी के प्रत्याशी सुमन कुमार महासेठ को 64,518 वोट मिले थे। LJP के अरविंद कुमार पूर्बे चुनाव में तीसरे नंबर पर रहे थे।
साल 2015 के विधानसभा चुनावों में भी RJD के समीर कुमार महासेठ को जीत मिली थी और दूसरे नंबर पर बीजेपी के रामदेव महतो रहे थे। इस चुनाव में समीर कुमार महासेठ को 76,823 वोट मिले थे और रामदेव महतो को 69,519 वोट मिले थे। तीसरे नंबर पर सपा रही थी।
2025 के चुनावों में किस पार्टी का पलड़ा हो सकता है भारी?
मधुबनी, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के लिए काफी सुरक्षित सीट मानी जाती रही है। साल 2020 और 2015 में भी इस सीट से RJD के प्रत्याशी समीर कुमार महासेठ ने ही जीत हासिल की थी। यानी इस चुनाव में RJD के लिए ये सीट बचाने की चुनौती होगी, वहीं दूसरी पार्टियों के लिए ये एक मौका होगा कि वह यहां से जीत हासिल करके RJD के विजयरथ को रोक सकें।
मधुबनी की क्या है खासियत?
मधुबनी बिहार की ऐसी सीट है, जो अपनी कला की वजह से खूब प्रसिद्ध है। मधुबनी पेंटिंग की डिमांड देश-विदेश में होती है। ये मिथिला की संस्कृति की झलक भी पेश करती है और यहां मैथिली भाषा भी बोली जाती है। इस क्षेत्र में मखाने का उत्पादन भी खूब किया जाता है।