बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में तारापुर की सीट भी एनडीए के खाते में जाना लगभग तय है। इस सीट पर सम्राट चौधरी के पिता शकुनी चौधरी का दबदबा रहा है। वह राजनीति से संन्यास ले चुके हैं, लेकिन अभी भी उनका प्रभाव कायम है। इसी वजह से यहां एनडीए उम्मीदवार की जीत तय मानी जा रही है। तारापुर जमुई लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। इसमें आठ ब्लॉक और ग्राम पंचायतें आती हैं। यह सीट 1951 में बनी थी। इसके बाद से यहां कुल 19 विधानसभा चुनाव हुए हैं। इनमें दो उपचुनाव भी शामिल हैं। इस बार यहां छह नवंबर को मतदान होना है।
बिहार की अधिकतर सीटों की तरह तारापुर में भी शुरुआत में कांग्रेस का दबदबा था, लेकिन 90 के दशक में यहां की सियासत बदल गई। 1995 विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस उम्मीदवार सच्चिदानंद सिंह पर ग्रेनेड से हमला हुआ। घायल अवस्था में उन्हें अस्पताल ले जाया गया। यहां दोबारा उन पर हमला हुआ और उनकी मौत हो गई। कुल नौ लोग मारे गए। शकुनी चौधरी पर हमले का आरोप लगा, लेकिन उन्होंने ही यह सीट जीत ली।
कब किसे मिली जीत?
यहां कुल 19 चुनाव हुए हैं। कांग्रेस पार्टी पांच, जेडीयू ने छह और आरजेडी ने तीन बार जीत हासिल की है। जेडीयू दो बार समता पार्टी के नाम से जीती है। संयुक्त समाजवादी पार्टी, शोषित दल, जनता पार्टी, सीपीआई और निर्दलीय उम्मीदवार को एक-एक बार जीत मिली है। हालांकि, अकेले शकुनी चौधरी यहां से छह चुनाव जीते हैं और उनकी पत्नी एक बार जीती हैं। शकुनी ने कांग्रेस, समता पार्टी, आरजेडी और निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा और जीत हासिल की है।
क्या हैं मौजूदा समीकरण?
2015 से यह सीट जेडीयू के खाते में हैं। 2024 लोकसभा चुनाव में भी यहां से रालोद उम्मीदवार ने बढ़त हासिल की थी। 2020 में भले ही जेडीयू की जीत का अंतर कम रहा हो, लेकिन एनडीए का प्रभाव इस सीट पर कायम है। सम्राट चौधरी का भी कद पिछले कुछ साल में बढ़ा है। ऐसे में उनके समर्थन वाले उम्मीदवार की जीत इस सीट से लगभग पक्की है।
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