पटना: बिहार के जमुई जिले में उलई नदी पर बने पुराने और बंद पड़े पुल का एक हिस्सा ढह गया। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि घटना में किसी के हताहत होने या घायल होने की खबर नहीं है।
जमुई के जिलाधिकारी नवीन ने बताया, "शुक्रवार को जमुई के बाहरी इलाके में नदी पर बने छोटे पुल का एक हिस्सा ढह गया। पिछले साल इसे यातायात के लिए बंद कर दिया गया था। नदी पर एक नया पुल बनाया जा रहा है।" बिहार में 2024 में विभिन्न जिलों में कई बड़े और छोटे पुल ढहने की घटनाएं हुईं। बिहार में हाल के वर्षों में पुल गिरने की कई घटनाएं सामने आई हैं। इस घटनाओं से पुलि के निर्माण में गुणवत्ता, भ्रष्टाचार, और रखरखाव की कमी जैसे मुद्दे सामने आए।
पुल गिरने की घटनाएं
- मार्च 2024, सुपौल: कोसी नदी पर बन रहे बकौर-भेजा घाट पुल का एक हिस्सा ढह गया। इसकी लागत 1200 करोड़ रुपये थी और यह भारत माला परियोजना का हिस्सा था। इस हादसे में एक मजदूर की मौत हुई और 9 घायल हुए।
- जून-जुलाई 2024: यह पुल गिरने के हिसाब से बेहद दुर्भाग्यपूर्ण समय रहा। क्योंकि इस दरम्यान 17 दिनों के भीतर बिहार में 12 पुल ढह गए। अररिया, सिवान, किशनगंज, मधुबनी, और पूर्वी चंपारण जिलमें पुल गिरने की घटनाएं सामने आईं। 3 जुलाई को सिवान और सारण में एक ही दिन में 5 पुल गिरे। इनमें से कुछ पुराने ब्रिटिश कालीन पुल थे, जबकि कुछ निर्माणाधीन थे।
- अगस्त 2024, भागलपुर: सुल्तानगंज-अगवानी गंगा पुल का सुपर स्ट्रक्चर तीसरी बार ढह गया। गंगा के बढ़ते जलस्तर को इसकी वजह बताया गया। इसकी लागत 1710 करोड़ रुपये थी।
- सितंबर 2024, पटना: बख्तियारपुर-ताजपुर गंगा महासेतु का एक हिस्सा गिर गया। इसकी लागत 1603 करोड़ रुपये थी। यह हादसा गार्डर की बेयरिंग बदलने के दौरान हुआ।
- जून 2025, सहरसा: पतरघट प्रखंड के पामा गांव में 20-25 साल पुराना पुल ओवरलोड ट्रैक्टर के कारण ढह गया। कोई हताहत नहीं हुआ