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₹4 लाख के लिए माता-पिता ने पॉक्सो केस में झूठी गवाही दिलाई, बालिग होते ही लड़की ने सब की पोल खोल दी

 Edited By: Shakti Singh
 Published : Apr 20, 2026 02:58 pm IST,  Updated : Apr 20, 2026 03:06 pm IST

पीड़िता ने बताया कि उसे लगभग 30 घंटे तक हिरासत में रखकर प्रताड़ित किया गया और झूठा बयान देने पर मजबूर किया गया। इसी वजह से बालिग होते ही उसने सीधे राष्ट्रपति को पत्र लिखकर हकीकत बताई है।

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राष्ट्रपति को पत्र लिखने वाली लड़की Image Source : REPORTER INPUT

बिहार के मुंगेर की एक लड़की ने अपने माता-पिता समेत कई लोगों पर पॉक्सो एक्ट का दुरुपयोग करने के आरोप लगाए हैं। उसने सिस्टम की परतें खोलते हुए सीधे राष्ट्रपति से न्याय की गुहार लगाई है। यह मामला पुलिस जांच, गवाहों की सच्चाई और पॉक्सो कानून के संभावित दुरुपयोग पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है। धरहरा थाना क्षेत्र की युवती ने राष्ट्रपति, राज्यपाल और पटना हाईकोर्ट को पत्र लिखकर दावा किया है कि जब वह नाबालिग थी तो उसे साजिश के तहत ‘कथित पीड़िता’ बनाया गया, जबकि उसके साथ कोई घटना हुई ही नहीं थी। युवती ने इस पूरे खेल के पीछे अपनों की भूमिका और मुआवजे की रकम को वजह बताया है।

पीड़िता मौसमी कुमारी ने अपने आवेदन में आरोप लगाया है कि उसके माता-पिता और कुछ करीबियों ने मिलकर उसे एक ‘मोहरा’ बनाते हुए झूठा केस रचा। युवती का दावा है कि इस साजिश का मकसद सरकार से मिलने वाले 4 लाख रुपये के मुआवजे को हासिल करना था। युवती ने इस रकम को ‘खून का पैसा’ बताते हुए इसे सरकार को लौटाने की इच्छा जताई है। 

आरोपी को उम्रकैद की सजा

इस केस में आरोपी बनाए गए रवि कुमार को अदालत द्वारा उम्रकैद की सजा सुनाई जा चुकी है, लेकिन युवती का कहना है कि वह पूरी तरह निर्दोष है। युवती के मुताबिक, नाबालिग होने के दौरान उसने पुलिस दबाव और परिवार के डर से अदालत में झूठी गवाही दी थी। मौसमी सिंह ने धरहरा और जमालपुर थाने के तत्कालीन पुलिस अधिकारियों पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उसका कहना है कि उसे करीब 30 घंटे तक अवैध हिरासत में रखकर मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया और डराकर सीआरपीसी 164 के तहत झूठा बयान दिलवाया गया। 

निष्पक्ष जांच की मांग

युवती ने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एसआईटी गठन की मांग की है। साथ ही 7 सितंबर 2022 के जमालपुर थाना के सीसीटीवी फुटेज की जांच कराने की बात कही है, ताकि सच्चाई सामने आ सके। उसने गलत चार्जशीट दाखिल करने वाले और जांच में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग भी की है। युवती ने सरकार से अपने परिवार को मिले 4 लाख रुपये लौटाने और निर्दोष व्यक्ति को रिहा करने की अपील की है। अपने पत्र में उसने बताया कि 1 अप्रैल 2026 को बालिग होने के बाद उसने यह कदम उठाया, ताकि वह बिना दबाव अपनी बात रख सके। फिलहाल यह मामला पटना हाईकोर्ट में विचाराधीन है।

आरोपी को नहीं जानती पीड़िता

मुंगेर सिविल कोर्ट के अधिवक्ता ओम प्रकाश ने बताया कि पीड़िता के द्वारा जिला स्तर सहित राष्ट्रपति, राज्यपाल और पटना हाईकोर्ट  पुलिस मुख्यालय तक को पत्र लिखा है, जिसमें घटना को ले सारी बातों को रखा। साथ ही उसमें यह भी लिखा है कि जिस लड़का को इस पूरे प्रकरण में फंसाया गया उसे वो जानती तक नहीं है। वह निर्दोष है, वह चाहती है कि उसे इंसाफ मिले। वह मुआवजे के 4 लाख भी सरकार को लौटना चाहती है।  

(मुंगेर से इम्तियाज खान की रिपोर्ट)

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