बिहार में शराब लदी स्कॉर्पियो की अवैध नीलामी के मामले में आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने बड़ी कार्रवाई की है। EOU ने गया में तैनात मोटरयान निरीक्षक (MVI) सुनील कुमार सिंह को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि गोपालगंज में तैनाती के दौरान उन्होंने जब्त स्कॉर्पियो का सही तरीके से भौतिक सत्यापन किए बिना ही उसकी मूल्यांकन रिपोर्ट तैयार कर सौंप दी थी। इस मामले में पूछताछ के बाद आरोपी अधिकारी को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला गोपालगंज जिले के सिधवलिया थाना कांड संख्या 125/2020 से जुड़ा है। इस कांड में पुलिस ने शराब लदी एक स्कॉर्पियो को जब्त किया था। इसके बाद जब्त वाहन की नीलामी की प्रक्रिया शुरू की गई। उस समय सुनील कुमार सिंह गोपालगंज में मोटरयान निरीक्षक के पद पर तैनात थे।
आरोप है कि नीलामी की प्रक्रिया के दौरान उन्होंने वाहन का भौतिक सत्यापन किए बिना ही उसका मूल्यांकन प्रतिवेदन सौंप दिया। इस रिपोर्ट में वाहन का रजिस्ट्रेशन नंबर BR06PD-9070 दर्ज किया गया था। साथ ही वाहन का न्यूनतम निर्धारित मूल्य भी लिखा गया था। हालांकि, रिपोर्ट में वाहन के इंजन और चेचिस नंबर का उल्लेख नहीं किया गया था।
रजिस्ट्रेशन नंबर को लेकर उठे सवाल
जांच के दौरान वाहन के रजिस्ट्रेशन नंबर और मूल्यांकन रिपोर्ट में दर्ज विवरण को लेकर गंभीर सवाल सामने आए। जांच में पता चला कि जब्त स्कॉर्पियो के इंजन और चेचिस नंबर के आधार पर उसका रजिस्ट्रेशन नंबर JH01-7840 होना चाहिए था। ऐसे में रिपोर्ट में BR06PD-9070 दर्ज किए जाने और इंजन-चेचिस नंबर का विवरण नहीं दिए जाने को लेकर संदेह गहराया। इसी मामले की जांच के क्रम में EOU ने मोटरयान निरीक्षक सुनील कुमार सिंह के खिलाफ कार्रवाई की। हालांकि, मामले में सभी आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के तहत होनी बाकी है।
पहले भी गिरफ्तार हो चुके हैं तीन आरोपी
इस मामले में इससे पहले भी कार्रवाई हो चुकी है। कांड में संलिप्तता के आरोप में जांच अधिकारी दरोगा राजेंद्र राम, तत्कालीन लिपिक कन्हैया लाल और डाटा एंट्री ऑपरेटर हैदर अली अंसारी को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। अब मोटरयान निरीक्षक की गिरफ्तारी के बाद शराब लदी स्कॉर्पियो की नीलामी और मूल्यांकन रिपोर्ट से जुड़े मामले में जांच आगे बढ़ने की उम्मीद है। जांच एजेंसी इस मामले में संबंधित दस्तावेजों और प्रक्रियाओं की पड़ताल कर रही है।
इनपुट: अजीत कुमार, गया