बिहार विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह (BJP MLC) ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इसके बाद अब रामवचन राय बिहार विधान परिषद के कार्यकारी सभापति बनाये गए हैं। सभापति के इस्तीफे के बाद उप सभापति रामवचन राय ने कार्यकारी सभापति की जिम्मेदारी नियमों के अनुरूप संभाला है। वहीं इस्तीफा देने से पहले अवधेश नारायण सिंह ने कहा था कि मैंने अपना त्यागपत्र इनको सौंप दिया है। भाजपा ने हमें जिम्मेदारी दी मैंने उसको अच्छे से निभाया। रामवचन बाबू को यह पद मिला है इस बात को लेकर हम काफी खुश हैं। वहीं बिहार विधान परिषद के नए कार्यकारी सभापति रामवचन राय ने कहा कि हमें जो काम मिल जाता है मैं उस काम को करता हूं, मैं कभी मांगता नहीं हूं, नई जिम्मेदारी मिली है, मैं धन्यवाद देता हूं।
रामवचन राय को पद मिलना तय
हालांकि ये लगभग तय माना जा रहा है कि बिहार में नई सरकार के गठन के बाद तय किए गए सत्ता-साझेदारी के फॉर्मूले के तहत विधान परिषद के सभापति का पद जेडीयू के हिस्से में आने के बाद EBC समाज से आने वाले रामवचन राय ही अगले सभापति होंगे। मुख्यमंत्री का पद और विधानसभा अध्यक्ष की कुर्सी बीजेपी के पास होने के बाद विधान परिषद के सभापति पद पर जेडीयू की दावेदारी की चर्चा थी। NDA सूत्रों के अनुसार, बीजेपी और JD(U) के बीच एक "समझौता" हुआ है कि दोनों पार्टियों में से किसी एक के नेता को एक-एक सदन का प्रमुख बनाया जाएगा।
चार बार सभापति रह चुके हैं अवधेश नारायण सिंह
बता दें कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी रहे अवधेश नारायण सिंह अब तक 4 बार सभापति रह चुके हैं। उन्होंने पहली बार 8 अगस्त 2012 से 8 मई 2017 तक सभापति के रूप में कार्य किया। इसके बाद 16 जून 2020 से 25 अगस्त 2022 तक कार्यकारी सभापति की जिम्मेदारी संभाली। तीसरी बार 21 जून 2024 से 23 जुलाई 2024 तक वह कार्यकारी सभापति रहे। इसके बाद 23 जुलाई 2024 से इस्तीफा देने की तारीख यानी 28 सितंबर 2026 तक उन्होंने सभापति के रूप में जिम्मेदारी संभाली। इस तरह अलग-अलग कार्यकाल में अवधेश नारायण सिंह लंबे समय तक बिहार विधान परिषद की अध्यक्षीय जिम्मेदारी संभालते रहे हैं।
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