बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में तेजस्वी यादव ने राघोपुर सीट से जीत दर्ज की है। उन्होंने बीजेपी के सतीश कुमार को मात दी। हालांकि, इस सीट पर दोनों के बीच कांटे की टक्कर रही। लंबे समय तक तेजस्वी इस सीट पर पीछे थे और ऐसा लग रहा था कि महागठबंधन का मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार ही चुनाव हार जाएगा। अंत में तेजस्वी ने 10 हजार से ज्यादा वोट के अंतर से जीत हासिल की। उन्होंने एक लाख से ज्यादा वोट हासिल किए।
राघोपुर सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार बलीराम सिंह तीसरे नंबर पर रहे। जनसुराज के उम्मीदवार चंचल कुमार को तीन वोट भी नहीं मिले। वहीं, तेज प्रताप यादव के जनशक्ति जनता दल ने प्रेम कुमार को टिकट दिया था, जिसे एक हजार वोट भी नहीं मिले।
बुरी तरह गिरा महागठबंधन के दलों का स्ट्राइक रेट
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में महागठबंधन के घटक दलों का स्ट्राइक रेट बुरी तरह गिरा, हालांकि वोट पर्सेंट में कुछ ज्यादा गिरावट नहीं हुई। दोनों ही चुनावों में महागठबंधन का वोट प्रतिशत 37 से थोड़ा ज्यादा रहा लेकिन सामने NDA का वोट प्रतिशत जबरदस्त तरीके से बढ़ गया। यही वजह है कि महागठबंधन 2020 के 110 सीटें के मुकाबले 2025 में घटकर महज 35 पर आ गया। आरजेडी को 25 सीटें मिलीं जो कि 2020 में मिली 75 सीटों का एक तिहाई है। वहीं, कांग्रेस भी 19 से घटकर 6 पर आ गई और वाम दलों का प्रदर्शन भी निराशाजनक रहा। स्ट्राइक रेट की बात करें तो उसमें भी महागठबंधन के घटक दलों की हालत पतली ही रही। कुल मिलाकर, महागठबंधन के लिए 2020 का विधानसभा चुनाव बेहद निराशाजनक साबित हुआ।
महागठबंधन के प्रदर्शन में क्यों आई ये गिरावट?
महागठबंधन के प्रदर्शन में गिरावट के कई कारण रहे। एनडीए ने ज्यादा संगठित तरीके से चुनाव लड़ा और ज्यादा वोट बटोर ले गए। पिछले चुनावों के मुकाबले NDA का वोट शेयर करीब 10 फीसदी बढ़ा, जो कि एक बहुत बड़ा अंतर होता है। वहीं, इसके साथ ही नीतीश की महिला कल्याण योजनाओं ने महिलाओं को लामबंद किया।