नई दिल्ली: मूडीज ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि भारत में आर्थिक सुधारों की रफ्तार की वजह से निराशा का माहौल है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सुस्ती है और चालू वित्त वर्ष में भी किसी भी सुधार की उम्मीद नहीं है। इसके असर से बैंकों की वित्तीय साख पर भी प्रतिकूल असर पड़ेगा।
मूडीज इनवेस्टर्स सर्विस की रिपोर्ट के तहत भारत की आर्थिक वृद्धि संभावनाओं को लेकर राय आशाजनक है। मूडीज ने चालू वित्त वर्ष के लिए आर्थिक वृद्धि 7.5 फीसदी रहने की संभावना जताई है।
रिपोर्ट के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में विकास की रफ्तार धीमी रहेगी। इसके मुताबिक यह अनुमान G20 अर्थव्यवस्थाओं में सबसे उंचा अनुमान है, इससे BAA3 सावरेन रेटिंग और सकरात्मक परिदृश्य के लिए मजबूत समर्थन प्राप्त होता है।
कहा गया है कि मार्च 2016 तक ग्रामीण इलाकों में हालात कमजोर बने रहेंगे। साथ ही औसत से कम मॉनसून होने पर खतरा बढ़ेगा। ग्रामीण इलाकों में खपत में कमी की आशंका है। मूडीज ने मोदी सरकार के रिफॉर्म की गति को लेकर भी निराशा जताई है। एजेंसी के मुताबिक पॉलिसी रिफॉर्म में रुकावट आने का खतरा कायम है।