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आजादी के बाद पहली बार इस गांव में पहुंची बिजली, निवासी बोले- ऐतिहासिक क्षण से कम नहीं

 Edited By: Malaika Imam @MalaikaImam1
 Published : Apr 26, 2026 09:05 pm IST,  Updated : Apr 26, 2026 09:08 pm IST

अबूझमाड़ स्थित ईरपानार गांव में आजादी के दशकों बाद पहली बार बिजली पहुंची है। निवासियों ने बताया कि उन्होंने पहली बार बिजली की रोशनी देखी है, जो उनके लिए किसी ऐतिहासिक क्षण से कम नहीं है।

प्रतीकात्मक फोटो- India TV Hindi
प्रतीकात्मक फोटो Image Source : FILE (ANI)

छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बस्तर संभाग से एक अच्छी खबर सामने आई है। नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ स्थित ईरपानार गांव में आजादी के दशकों बाद पहली बार बिजली पहुंची है। माओवाद के गढ़ रहे इस दुर्गम इलाके में जब शुक्रवार को पहली बार बल्ब की रोशनी फैली, तो व ग्रामीणों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा।

ईरपानार गांव के निवासी दशकों से रात के अंधेरे को दूर करने के लिए लालटेन और लकड़ियों पर निर्भर थे। प्रशासन के अनुसार, करीब 56.11 लाख रुपये की लागत से हुए विद्युतीकरण से फिलहाल गांव के 10 परिवारों को सीधा लाभ मिला है। निवासियों ने बताया कि उन्होंने पहली बार बिजली की रोशनी देखी है, जो उनके लिए किसी ऐतिहासिक क्षण से कम नहीं है। बिजली आने से अब बच्चे रात में पढ़ाई कर सकेंगे और मोबाइल चार्जिंग जैसी बुनियादी सुविधाएं घर पर ही मिलेंगी।

'नियाद नेल्ला नार' योजना का असर

ईरपानार गांव में यह विकास राज्य सरकार की 'नियाद नेल्ला नार' (आपका अच्छा गांव) योजना के तहत संभव हुआ है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य बस्तर के उन दूरदराज और संवेदनशील इलाकों में बुनियादी सुविधाएं (बिजली, सड़क, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य) पहुंचाना है, जो लंबे समय तक नक्सली प्रभाव के कारण विकास से कटे रहे। अधिकारियों के मुताबिक, हाल ही में पास के हांडावाड़ा गांव में भी बिजली पहुंचाई गई है।

जब मजदूरों ने कंधे पर ढोया विकास

नारायणपुर की जिलाधिकारी नम्रता जैन ने बताया कि ईरपानार तक बिजली पहुंचाना कोई सामान्य काम नहीं था। इस प्रोजेक्ट के रास्ते में कई भौगोलिक और तकनीकी बाधाएं थीं। यह गांव जिला मुख्यालय से 30 किमी दूर है, लेकिन वहां तक पहुंचने के लिए घने जंगलों और खड़ी चढ़ाइयों को पैदल पार करना पड़ता है।

कठिन रास्तों के कारण कई जगहों पर मशीनों का उपयोग नामुमकिन था। ऐसे में बिजली विभाग के कर्मचारियों और स्थानीय मजदूरों ने खुद खंभे और अन्य उपकरण ढोकर वहां पहुंचाए। मानसून और कठिन परिस्थितियों के बावजूद छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड ने प्राथमिकता के आधार पर इसे पूरा किया।

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