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थम नहीं रहा शिक्षादूतों पर हमले का सिलसिला, बीजापुर में हत्या से मचा हड़कंप, एक साल में पांच मर्डर

 Edited By: Niraj Kumar
 Published : Aug 30, 2025 02:55 pm IST,  Updated : Aug 30, 2025 02:55 pm IST

पुलिस अधिकारियों ने आशंका जताई है कि इस घटना को नक्सलियों ने अंजाम दिया है, हालांकि घटनास्थल से कोई भी माओवादी पर्चा बरामद नहीं हुआ है।

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अपराध Image Source : INDIA TV

बीजापुर:  छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में अज्ञात लोगों ने सरकारी स्कूलों में अस्थायी अतिथि शिक्षक एक शिक्षादूत की धारदार हथियार से हत्या कर दी। पुलिस अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि घटना जिले के गंगालूर थाना क्षेत्र के गांव तोड़का की है जहां अज्ञात लोगों ने शिक्षादूत कल्लू ताती (25) की धारदार हथियार से हत्या कर दी। 

लेंड्रा के स्कूल में कार्यरत शिक्षादूत की हत्या

उन्होंने बताया कि ताती जिले के गांव लेंड्रा के स्कूल में शिक्षादूत के रूप में कार्यरत थे। पुलिस अधिकारियों ने आशंका जताई है कि इस घटना को नक्सलियों ने अंजाम दिया है, हालांकि घटनास्थल से कोई भी माओवादी पर्चा बरामद नहीं हुआ है। अधिकारियों ने बताया कि घटना की जानकारी मिलने के बाद शनिवार सुबह सुरक्षाबलों की एक टीम को घटनास्थल भेजा गया। पुलिस ने हमलावरों की तलाश शुरू कर दी है। 

मुखबिरी के संदेह में नक्सलियों ने की हत्या-सूत्र

पुलिस सूत्रों के अनुसार, नक्सली बस्तर क्षेत्र में पुलिस मुखबिर होने के संदेह में शिक्षादूतों को निशाना बना रहे हैं। उन्होंने बताया कि पिछले तीन वर्षों में बस्तर क्षेत्र के चार जिलों में नक्सलियों ने कम से कम सात शिक्षादूतों की हत्या की है, जिनमें से पांच हत्याएं इसी वर्ष हुईं। 

15 अगस्त और 27 अगस्त को भी हुई थी शिक्षादूतों की हत्या

इससे पहले 27 अगस्त को सुकमा जिले में नक्सलियों ने एक शिक्षादूत की हत्या कर दी थी। बस्तर क्षेत्र के नारायणपुर जिले में 15 अगस्त को भी एक शिक्षादूत की हत्या की गई थी। वहीं, पिछले महीने बीजापुर जिले के फरसेगढ़ इलाके में नक्सलियों ने पुलिस मुखबिर होने के शक में दो शिक्षादूतों की हत्या कर दी थी। 

बस्तर में माओवादी हिंसा में इस साल 30 से ज्यादा लोगों की मौत

पड़ोसी जिले दंतेवाड़ा में 19 फरवरी को भी इसी तरह के आरोप में एक शिक्षादूत समेत दो लोगों की हत्या कर दी गई थी। सात जिलों वाले बस्तर क्षेत्र में इस वर्ष अब तक माओवादी हिंसा में 30 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।

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