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हैरत! अजगर के मुंह में मिला कैंसर का ट्यूमर, साढ़े तीन घंटे चली जटिल सर्जरी; हुआ सफल ऑपरेशन

 Written By: Amar Deep
 Published : Oct 13, 2026 01:14 pm IST,  Updated : Oct 13, 2026 01:14 pm IST

छत्तीसगढ़ से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां के अजगर के मुंह में कैंसर का ट्यूमर मिला। बिलासपुर के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने साढ़े तीन घंटे की जटिल सर्जरी के बाद सफल ऑपरेशन किया।

अजगर के मुंह में कैंसर वाले ट्यूमर की हुई सर्जरी।- India TV Hindi
अजगर के मुंह में कैंसर वाले ट्यूमर की हुई सर्जरी। Image Source : REPORTER INPUT

छत्तीसगढ़ के सरगुजा से वन्यजीव चिकित्सा के क्षेत्र में एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने एक बेजुबान की जिंदगी बचाने की जद्दोजहद को बयां कर दिया है। अंबिकापुर में एक अजगर के मुंह में कैंसर की गांठ मिलने के बाद उसे इलाज के लिए बिलासपुर ले जाया गया। यहां विशेषज्ञ डॉक्टर ने करीब साढ़े तीन घंटे तक जटिल सर्जरी कर ट्यूमर को बाहर निकाला। इस ऑपरेशन के बाद अजगर को नई जिंदगी मिलने की उम्मीद जगी है। दावा किया जा रहा है कि सरीसृप की कैंसर सर्जरी का यह संभवतः पहला सफल मामला है।

चुनौतीपूर्ण था इलाज

दरअसल, यह पूरा मामला अंबिकापुर का है, जहां 8.5 किलोग्राम वजनी इंडियन रॉक पाइथन के मुंह में ट्यूमर जैसी गांठ पाई गई। अजगर की गंभीर स्थिति को देखते हुए स्नेक मैन सत्यम द्विवेदी ने उसका रेस्क्यू किया और बेहतर उपचार के लिए उसे बिलासपुर लेकर पहुंचे। एक बेजुबान की जिंदगी बचाने की यह कोशिश आसान नहीं थी। अजगर के मुंह में मौजूद गांठ का इलाज करना चुनौतीपूर्ण था। ऐसे में विशेषज्ञ डॉक्टरों की मदद से उसके उपचार की तैयारी की गई। 

साढ़े तीन घंटे तक चला ऑपरेशन

बिलासपुर में कानन पेंडारी से जुड़े पशु चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. पीयूष दुबे ने अजगर की जटिल सर्जरी की। करीब साढ़े तीन घंटे तक चले ऑपरेशन के दौरान उसके मुंह में मौजूद ट्यूमर को बाहर निकाला गया। यह सर्जरी इसलिए भी चुनौतीपूर्ण थी, क्योंकि सांप जैसे सरीसृपों का उपचार सामान्य पशुओं के इलाज से अलग होता है। ऐसे मामलों में विशेष चिकित्सा अनुभव और सावधानी की जरूरत होती है। सर्जरी के बाद अजगर को ड्रिप और विशेष देखभाल में रखा गया है, ताकि उसकी स्थिति पर लगातार नजर रखी जा सके और वह धीरे-धीरे स्वस्थ हो सके।

बचाई गई बेजुबान की जिंदगी

इस पूरे घटनाक्रम में स्नेक मैन सत्यम द्विवेदी की भूमिका भी अहम रही, जिन्होंने अजगर को अंबिकापुर से बिलासपुर पहुंचाकर उसके उपचार का रास्ता तैयार किया। वन्यजीव चिकित्सा के क्षेत्र में इस सर्जरी को एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। यदि सरीसृपों में कैंसर के ट्यूमर की सफल सर्जरी का यह पहला मामला प्रमाणित होता है, तो यह भविष्य में ऐसे गंभीर मामलों के उपचार के लिए नई संभावनाएं खोल सकता है। अंबिकापुर से बिलासपुर तक का यह सफर सिर्फ दूरी तय करने की कहानी नहीं, बल्कि एक बेजुबान की जिंदगी बचाने के लिए की गई कोशिश की कहानी है। (इनपुट- सिकंदर खान)

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