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पूर्व महिला नक्सलियों ने किया रैंप वॉक, कभी कंधे पर बंदूक टांगकर जंगलों में घूमती थीं

 Written By: Malaika Imam
 Published : Aug 13, 2026 11:15 pm IST,  Updated : Aug 13, 2026 11:23 pm IST

पूर्व महिला नक्सलियों ने रायपुर में रैंप वॉक किया। नेशनल हैंडलूम डे के कार्यक्रम में इन महिलाओं ने स्वदेशी परिधानों में रैंप पर कदम रखा।

पूर्व महिला नक्सलियों का रैंप वॉक- India TV Hindi
पूर्व महिला नक्सलियों का रैंप वॉक Image Source : ANI

छत्तीसगढ़ से बदलाव की ऐसी तस्वीरें सामने आईं, जो उम्मीद जगाती हैं। जिन महिला नक्सलियों के कंधों पर कुछ महीने पहले तक बंदूक हुआ करती थी, वे अब रैंप पर आत्मविश्वास के साथ कदमताल करती नजर आईं।

नेशनल हैंडलूम डे के मौके पर रायपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में हाल ही में आत्मसमर्पण करने वाली महिला नक्सलियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिला। इन महिलाओं ने मॉडल्स की तरह रैंप वॉक किया और फेमिना मिस इंडिया छत्तीसगढ़ अनुष्का सोन के साथ कदम से कदम मिलाकर रैंप पर चलीं।

हाथ से बुने स्वदेशी परिधानों में सजी इन महिलाओं ने अपनी खूबसूरती और आत्मविश्वास से लोगों का दिल जीत लिया। कभी जंगलों में हथियार लेकर घूमने वाली इन महिलाओं की रैंप पर बदली हुई तस्वीरें एक नई जिंदगी की कहानी कह रही थीं।

नक्सलवाद छोड़कर जिंदगी का नया रास्ता चुना

छत्तीसगढ़ के इस साल नक्सल मुक्त होने के बाद अब इनमें से कई महिलाएं सामाजिक संगठनों के साथ काम कर रही हैं। उन्हें ट्रेनिंग दी जा रही है और नए-नए हुनर सिखाए जा रहे हैं, ताकि वे अपने पैरों पर खड़ी हो सकें और जिंदगी की नई शुरुआत कर सकें।

हथियारों और खून-खराबे की जिंदगी को पीछे छोड़कर रैंप वॉक करती इन महिलाओं की तस्वीरें निश्चित तौर पर सुखद हैं। जिन्होंने आत्मसमर्पण कर नक्सलवाद छोड़कर जिंदगी का नया रास्ता चुना है, उन्हें मुख्यधारा में लाना समाज की जिम्मेदारी है। छत्तीसगढ़ का यह फैशन शो इसी दिशा में एक अच्छा कदम है।

अब जरूरत इस बात की है कि नक्सलवाद छोड़ चुकी इन महिलाओं के लिए रोजी-रोटी का इंतजाम हो, उन्हें नए हुनर और रोजगार के अवसर मिलें और वे आत्मसम्मान से भरी जिंदगी जी सकें। उन्हें समाज की मुख्यधारा में मजबूती से जगह दिलाना समाज और सरकार, दोनों की जिम्मेदारी है।

पारंपरिक हथकरघा परिधान पहनकर रैंप पर कदम रखा

बता दें कि छत्तीसगढ़ के घने जंगलों में कभी नक्सली वर्दी पहनकर सरकार के खिलाफ लड़ने वाली 9 महिला नक्सलियों ने पिछले सप्ताह रायपुर में हथकरघा और कोसा सिल्क के परिधानों में रैंप वॉक कर बदलते बस्तर की तस्वीर पेश की। इन महिला नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर दिया था। रायपुर के पंडित दीनदयाल उपाध्याय सभागार में 07 अगस्त को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के राज्य स्तरीय बुनकर सम्मेलन में यह खास आयोजन हुआ। इस आयोजन में सुकमा की 8 और बीजापुर की एक महिला नक्सली ने पारंपरिक हथकरघा परिधान पहनकर रैंप पर कदम रखा। 

सुकमा के चिंतागुफा इलाके के एल्मागुंडा गांव की 22 वर्षीय पुनेम ज्योति के लिए यह ऐसा अनुभव था, जिसकी उन्होंने कभी कल्पना नहीं की थी। ज्योति ने कहा, "मैंने कभी नहीं सोचा था कि मेरी जिंदगी में ऐसा कुछ होगा।" उन्होंने पिछले साल दिसंबर में हैदराबाद में आत्मसमर्पण किया था। ज्योति ने हिंदी और गोंडी में बात करते हुए कहा कि माओवादी आंदोलन छोड़ने के बाद उनकी जिंदगी में काफी बदलाव आया है

28 वर्षीय एक अन्य महिला ने कहा कि उन्होंने इससे पहले कभी फैशन शो नहीं देखा था। उन्होंने अपनी पहचान जाहिर नहीं करने की शर्त पर कहा, "जब हम जंगल में थे, तब हमने ऐसी चीजें कभी नहीं देखी थीं।" महिला ने बताया कि माओवादियों के सांस्कृतिक विभाग से जुड़ी होने के कारण उन्हें दर्शकों के सामने कार्यक्रम प्रस्तुत करने का थोड़ा अनुभव था, जिससे रैंप वॉक में मदद मिली। उन्होंने कहा, "हमें खुशी है कि हिंसा छोड़ने के बाद हम शांतिपूर्ण और सम्मानजनक जिंदगी जी रहे हैं।" 

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