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हाईकोर्ट ने सीबीएसई को कहा, कक्षा 10, 12 के छात्रों को मार्कशीट में नाम बदलने की मिले अनुमति

 Edited By: IndiaTV Hindi Desk
 Published : Oct 14, 2020 10:53 am IST,  Updated : Oct 14, 2020 10:53 am IST

दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) को छात्रों को उनके कक्षा 10 और 12 की अंकतालिकाओं और प्रमाणपत्रों में उनके नाम, उपनाम या अन्य विवरण बदलने के लिए एक सिस्टम तैयार करने का सुझाव दिया।

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HC ask CBSE to Allow class 10, 12 students to change name, surname in marksheets certificates Image Source : FILE

दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) को छात्रों को उनके कक्षा 10 और 12 की अंकतालिकाओं और प्रमाणपत्रों में उनके नाम, उपनाम या अन्य विवरण बदलने के लिए एक सिस्टम तैयार करने का सुझाव दिया। मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति प्रतीक जालान की पीठ ने सीबीएसई से इन राहत के लिए दायर कई याचिकाओं के मद्देनजर सुझाव पर विचार करने के लिए कहा। पीठ ने कहा कि इस तरह की मुकदमेबाजी उत्पन्न करना भी अच्छा नहीं है। पीठ ने कहा, "यह वकीलों के लिए अच्छा हो सकता है, लेकिन संस्थान के लिए नहीं।"

हाईकोर्ट ने सीबीएसई से कहा “एक कॉलम बनाएं जहाँ लोग जितने चाहें उतने बदलाव कर सकते हैं। यह उसका / उसका नाम या उपनाम है, यहां उसी की मर्जी चलेगी। उन्हें जितनी बार चाहें उतनी बार इसे बदलने दें। हर छात्र इसके लिए नहीं कह रहा है। इसमें कहा गया है कि किए जाने वाले बदलावों को प्रमाणपत्र के किसी स्तर पर शामिल किया जा सकता है जो शुरू में दिए गए विवरणों को भी ले जाएगा।

CBSE के वकील ने कहा कि बोर्ड किसी की पहचान को प्रमाणित नहीं कर सकता है और कहा कि यह केवल पहली बार में दी गई जानकारी को प्रमाण पत्र में डाल देता है। पीठ ने हालांकि कहा, '' आप पहली पहचान प्रमाणित नहीं कर रहे हैं। आप सूचना के आधार पर देते हैं। तो यह पहली, दूसरी या तीसरी बार क्यों न हो, आप इसे जानकारी के अनुसार बदल सकते हैं।अदालत मार्च के एकल न्यायाधीश के आदेश के खिलाफ सीबीएसई की अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उसने कक्षा 10 और 12 की अंकतालिकाओं और प्रमाणपत्रों में एक छात्र की मां का नाम बदलने का निर्देश दिया था।

एकल न्यायाधीश का निर्देश उस छात्र की याचिका पर आया था कि उसने अपनी मां का नाम मार्कशीट और प्रमाण पत्र में बदल दिया था क्योंकि महिला अपने तलाक के बाद वापस अपने पहले नाम पर लौट आई थी। पीठ ने मामले को 20 नवंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया क्योंकि कोई भी छात्र की ओर से पेश नहीं हुआ।

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