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UP Election Eesult 2022: उत्तर प्रदेश में इस बार जीते 34 मुस्लिम विधायक, सभी समाजवादी पार्टी गठबंधन के

 Edited By: IndiaTV Hindi Desk
 Published : Mar 11, 2022 09:10 pm IST,  Updated : Mar 11, 2022 09:10 pm IST

पिछले चुनाव के मुकाबले इस बार 10 मुस्लिम प्रत्याशी ज्यादा जीते और जीतने वाले मुस्लिम प्रत्याशियों की कुल संख्या 34 है।

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Samajwadi Party Presidend Akhilesh Yadav (C) with party leaders Swami Prasad Maurya and Abdullah Azam Khan. Image Source : PTI FILE

Highlights

  • पिछले चुनाव के मुकाबले इस बार 10 मुस्लिम प्रत्याशी ज्यादा जीते।
  • यूपी में जीतने वाले मुस्लिम प्रत्याशियों की कुल संख्या 34 है।
  • सभी चुने गये विधायक समाजवादी पार्टी गठबंधन के हैं।

लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा में इस बार मुस्लिम उम्मीदवारों की संख्या पिछली बार के मुकाबले थोड़ी बढ़ी है। पिछले चुनाव के मुकाबले इस बार 10 मुस्लिम प्रत्याशी ज्यादा जीते और जीतने वाले मुस्लिम प्रत्याशियों की कुल संख्या 34 है। सभी चुने गये विधायक समाजवादी पार्टी गठबंधन के हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में 24 मुस्लिम विधायक विधानसभा में जीत कर आए थे। निर्वाचन आयोग की वेबसाइट से प्राप्त जानकारी के अनुसार इस बार सपा से जीतने वाले विधायकों में अमरोहा से महबूब अली, बहेड़ी से अता उर रहमान, बेहट से उमर अली खान, भदोही से जाहिद, भोजीपुरा से शहजिल इस्लाम, बिलारी से मो. फहीम, चमरौआ से नसीर अहमद, गोपालपुर से नफीस अहमद, इसौली से मो. ताहिर खान शामिल हैं।

नाहिद हसन और अब्दुल्ला आजम भी चुने गए विधायक

इनके अलावा कैराना से नाहिद हसन, कानपुर कैंट से मो. हसन, कांठ से कमाल अख्तर, किठौर से शाहिद मंजूर, कुंदरकी से जिया उर रहमान, लखनऊ पश्चिम से अरमान खान, मटेरा से मारिया, मेरठ से रफीक अंसारी, मोहमदाबाद से सुहेब उर्फ मन्नू अंसारी, मुरादाबाद ग्रामीण से मो. नासिर सपा की टिकट पर चुनाव जीते। वहीं, नजीबाबाद से तस्लीम अहमद, निजामाबाद से आलम बदी, पटियाली से नादिरा सुल्तान, राम नगर से फरीद महफूज किदवई, रामपुर से मो. आजम खान, संभल से इकबाल महमूद, सिंकदरपुर से जिया उद्दीन रिजवी, सीसामऊ से हाजी इरफान सोलंकी, स्वार से मो. अब्दुल्ला आजम, ठाकुरद्वारा से नवाब जान, डुमरियागंज से सैय्यदा खातून, सहारनपुर से आशु मलिक भी समाजवादी पार्टी से विधायक चुने गए हैं।

SBSP के टिकट पर अब्बास अंसारी ने भी जीता चुनाव
सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) से माफिया मुख्तार अंसारी के बेटे अब्बास अंसारी मऊ सीट से जीतकर विधानसभा पहुंचे हैं। वहीं, राष्ट्रीय लोकदल (RLD) के टिकट पर सिवालखास से गुलाम मोहम्मद और थानाभवन सीट से अशरफ अली चुनाव जीत कर विधायक बने हैं। इसके अलावा, बहुजन समाज पार्टी, कांग्रेस और ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने भी काफी संख्या में मुस्लिम उम्मीदवारों को चुनाव मैदान में उतारा था, लेकिन एक भी उम्मीदवार जीतने में कामयाब नहीं रहा। बीजेपी नेतृत्व वाले गठबंधन की सहयोगी पार्टी अपना दल (सुहेलदेव) ने स्वार सीट से हैदर अली खान को चुनाव मैदान में उतारा था, लेकिन उन्हें सपा नेता आजम खान के बेटे अब्दुल्ला आजम ने करीब 61 हजार वोट से शिकस्त दी।

मुस्लिम-यादव के गठजोड़ की वजह से जीते कई प्रत्याशी
पिछली बार से इस बार ज्यादा मुस्लिम प्रत्याशियों के जीतने के सवाल पर राजनीतिक विश्लेषक राजेंद्र द्विवेदी बताते हैं, ‘जिस पार्टी का आधार वोट बैंक मजबूत होता है, उसी पार्टी का मुस्लिम प्रत्याशी चुनाव में जीतता है। कोई भी मुस्लिम प्रत्याशी केवल मुस्लिम मतदाताओं के वोट के सहारे नहीं जीत सकता, बल्कि उसे पार्टी का आधार वोट बैंक भी चाहिए। जैसे समाजवादी पार्टी का आधार वोट बैंक यादव है। अगर किसी मुस्लिम बाहुल्य सीट पर प्रत्याशी को यादव वोट भी मिल जाए तो वह मुस्लिम-यादव गठजोड़ से चुनाव जीत जाता है।’

बसपा और कांग्रेस के एक भी मुस्लिम उम्मीदवार को नहीं मिली जीत
यह पूछे जाने पर कि बसपा और कांग्रेस ने भी मुस्लिम प्रत्याशी मैदान में उतारे थे तो वह क्यों नही जीत पाए। इस पर, द्विवेदी ने कहा कि बसपा के साथ इस चुनाव में केवल बहुत कम दलित वोट थे और बसपा के मुस्लिम प्रत्याशी जीताऊ उम्मीदवार नहीं थे इसलिए उन्होंने बसपा को वोट नहीं दिया। दूसरे, इस बार मुस्लिमों ने एकजुट होकर केवल सपा को वोट दिया क्योंकि उन्हें लगता था कि अगर बीजेपी को हराना है तो उसका मुकाबला केवल सपा ही कर सकती है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी की बात करें तो उसका अपना कोई वोट बैंक ही नहीं है तो उसके मुस्लिम उम्मीदवार के जीतने की कोई उम्मीद ही नहीं थी।

यूपी के मुसलमानों ने असदुद्दीन ओवैसी को रखा खाली हाथ
मुसलमानों का रहनुमा होने का दावा करने वाली AIMIM के उम्मीदवारों के चुनाव में बुरी तरह से नाकामयाब होने के सवाल पर ‘जदीद मरकज’ अखबार के संपादक हिसाम सिद्दीकी ने कहा, ‘उत्तर प्रदेश के मुसलमानों को यह अच्छी तरह से मालूम है कि सिर्फ मुस्लिम वोट के सहारे कोई भी चुनाव नहीं जीत सकता, इसलिए वे AIMIM के असदुद्दीन ओवैसी की बातों में नहीं आए और उनकी पार्टी के उम्मीदवारों को बिल्कुल नजरअंदाज कर दिया।’ सिद्दीकी ने कहा कि मुसलमान उनकी चुनावी रैलियों में खूब जमा हुए लेकिन यह भीड़ वोट में तब्दील नहीं हो पाई, जिसका नतीजा है कि उत्तर प्रदेश में इस बार के विधानसभा चुनाव में ओवैसी की पार्टी को केवल 0.49 प्रतिशत ही वोट मिला।

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