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2016 में बायपास और 2018 में स्टेज 4 कैंसर, फिर भी नहीं लगा मौत से डर, भावुक कर देगा प्रदीप रावत का आखिरी संदेश

 Written By: Jaya Dwivedie
 Published : Aug 05, 2026 04:41 pm IST,  Updated : Aug 05, 2026 04:41 pm IST

'गजनी' और 'लगान' फेम दिग्गज अभिनेता प्रदीप रावत का 74 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। स्टेज 4 कैंसर और दिल की बीमारी से जूझते हुए भी वे मां की सीख और बजरंगबली पर आस्था के सहारे अंत तक हिम्मत से लड़े।

Pradeep rawat- India TV Hindi
प्रदीप रावत। Image Source : I_PRADEEPRAWAT/INSTAGRAM

भारतीय सिनेमा जगत से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। बॉलीवुड और साउथ फिल्मों में अपनी दमदार अदाकारी और विलेन के किरदारों से पहचान बनाने वाले सीनियर एक्टर प्रदीप रावत का 4 अगस्त को निधन हो गया। 74 वर्ष की उम्र में उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया। प्रदीप रावत लंबे समय से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। 'लगान' के देवा और 'गजनी' के खतरनाक विलेन के रूप में घर-घर मशहूर हुए इस अभिनेता के जाने से फिल्म इंडस्ट्री में शोक व्याप्त है। 

शूटिंग खत्म करते ही चला था स्टेज 4 कैंसर का पता

जिंदगी के इस सबसे कठिन दौर को याद करते हुए प्रदीप रावत ने सिद्धार्थ कनन के साथ एक इंटरव्यू में अपनी बीमारी के उस भयावह दिन के बारे में खुलकर बात की थी। उन्होंने बताया था कि एक फिल्म की शूटिंग खत्म करने के तुरंत बाद उन्हें अपने स्टेज 4 कैंसर के बारे में पता चला। मल में खून आने के बाद जब उन्होंने जांच कराई तो डॉक्टरों को पेट के अंदर एक ट्यूमर मिला, जिससे लगातार ब्लीडिंग हो रही थी। जब रिपोर्ट्स आईं तो उनका परिवार और रिश्तेदार फूट-फूटकर रोने लगे। हालांकि घर वालों के चेहरे की हवाइयां देखकर प्रदीप रावत बिना कहे ही समझ गए थे कि मामला कितना गंभीर है।

खुद दर्द में रहकर भी परिवार को देते रहे हिम्मत

ज्यादातर लोग कैंसर नाम सुनते ही हिम्मत हार बैठते हैं, लेकिन प्रदीप रावत के साथ ऐसा नहीं हुआ। जब पत्नी और छोटे बच्चे रो रहे थे, तब प्रदीप खुद अपनी बीमारी को भूलकर उन्हें ढांढस बंधा रहे थे। उन्होंने बताया था कि एक पल के लिए भी उनके मन में मौत का डर या कोई नकारात्मक विचार नहीं आया। उन्हें अपनी आस्था और बजरंगबली पर पूरा भरोसा था। वे लगातार अपने परिवार को यही समझाते रहे, 'मुझे कुछ नहीं होगा, तुम लोग परेशान मत हो।' बजरंगबली के प्रति उनकी अटूट श्रद्धा ने ही उन्हें इस मुश्किल दौर से बाहर निकाला था।

2016 में बायपास और 2018 में कैंसर

प्रदीप रावत का स्वास्थ्य संबंधी संघर्ष बेहद लंबा और दर्दनाक रहा। साल 2016 में उनकी दिल की गंभीर बायपास सर्जरी हुई थी। इस सर्जरी के बाद उन्होंने बड़ी मुश्किल से डेढ़ साल में अपना 20 किलो वजन बढ़ाया था, लेकिन 2018 में जब स्टेज 4 कैंसर का निदान हुआ, तो बीमारी और इलाज की वजह से उनका बढ़ा हुआ सारा वजन फिर से घट गया। उनका शरीर काफी कमजोर हो गया था, लेकिन उनका मनोबल कभी नहीं टूटा।

मां के संस्कार और 'हरि' के नाम ने दी जीने की ताकत

अपनी इस जंग में प्रदीप रावत को अपनी स्वर्गीय मां की कही बातें और संस्कार सबसे बड़ा सहारा बने। उन्होंने अपनी मां की सीख को याद करते हुए कहा था कि उनकी मां हमेशा कहती थीं, 'असल मजा हरि...' यानी अगर ईश्वर आपके साथ हैं तो सब ठीक होगा और घबराने की कोई जरूरत नहीं है। अपनी मां के आशीर्वाद, ईमानदारी और खुद के साहस के दम पर ही वे कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से इतने सालों तक मुकाबला कर सके।

उत्तर भारत से लेकर साउथ सिनेमा तक जमाया धाक

प्रदीप रावत ने अपने करियर की शुरुआत बीआर चोपड़ा के ऐतिहासिक धारावाहिक 'महाभारत' में राजा द्रुपद का किरदार निभाकर की थी। इसके बाद उन्होंने आशुतोष गोवारिकर की फिल्म 'लगान' में देवा का यादगार रोल निभाया, लेकिन साल 2008 में आई आमिर खान की फिल्म 'गजनी' ने उन्हें एक नई पहचान दी, जिसमें उनके विलेन के किरदार ने दर्शकों के रोंगटे खड़े कर दिए थे। हिंदी फिल्मों के अलावा उन्होंने 'अश्वत्थामा' और कई सुपरहिट तेलुगु व तमिल फिल्मों में भी अपनी अदाकारी का लोहा मनवाया। भले ही आज वे हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन सिनेमा में उनका योगदान हमेशा याद रखा जाएगा।

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