बॉलीवुड की चमक-दमक, शोहरत और ग्लैमर हर किसी को अपनी ओर आकर्षित करती है। एक बार जो इस मायानगरी में कदम रख ले, उसके लिए इससे दूर जाना आसान नहीं होता। यहां सितारे बनते हैं, सपने पूरे होते हैं और पहचान मिलती है। लेकिन इसी फिल्मी दुनिया में कुछ ऐसे लोग भी हुए हैं, जिन्होंने इस बाहरी रोशनी को छोड़कर अपने भीतर की सच्ची रोशनी की तलाश की। ऐसे ही एक नाम हैं अभिनेत्री नीता मेहता, जिन्होंने अपने करियर के शिखर पर होते हुए भी बॉलीवुड को अलविदा कह दिया और आध्यात्म के मार्ग को अपना लिया।
प्रतिष्ठित परिवार में हुआ जन्म
नीता मेहता का सफर आम नहीं था। वह एक सफल अभिनेत्री होने के साथ-साथ एक प्रतिष्ठित और शिक्षित परिवार से ताल्लुक रखती थीं। उनके पिता एक जाने-माने बैरिस्टर थे और मां पेशे से डॉक्टर थीं। ऐसे परिवार में पली-बढ़ी नीता से उम्मीद की जाती थी कि वह भी किसी सम्मानित पेशे को अपनाएंगी, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।
FTII से पढ़ाई और अभिनय का सपना
पढ़ाई के दौरान ही नीता का रुझान अभिनय की ओर बढ़ने लगा। उन्होंने पुणे स्थित भारतीय फिल्म और टेलीविजन संस्थान (FTII) से अभिनय की पढ़ाई की, जो उस दौर में और आज के दौर में भी देश का सबसे प्रतिष्ठित फिल्म संस्थान माना जाता था। यहीं से उनके भीतर कलाकार बनने की इच्छा और मजबूत हुई, हालांकि परिवार इस फैसले के सख्त खिलाफ था। फिल्मों में करियर बनाने का नीता का फैसला उनके माता-पिता को बिल्कुल पसंद नहीं आया। इसके बावजूद उन्होंने अपने सपनों को चुना और परिवार की नाराजगी झेलते हुए बॉलीवुड में कदम रखा। यह फैसला उनके जीवन की दिशा बदलने वाला साबित हुआ।
रणधीर कपूर के साथ किया बॉलीवुड डेब्यू
नीता मेहता ने साल 1975 में कपूर खानदान के बेटे रणधीर कपूर के साथ फिल्म ‘पोंगा पंडित’ से बॉलीवुड में डेब्यू किया। यह उनके करियर की पहली बड़ी पहचान बनी। इसके बाद उन्होंने लगातार फिल्मों में काम किया और दर्शकों के बीच अपनी अलग पहचान बना ली। अपने करियर के दौरान नीता मेहता ने लगभग 40 फिल्मों में अभिनय किया। ‘हीरो’, ‘रिश्ता कागज का’, ‘राम की गंगा’, ‘स्वर्ग से सुंदर’, ‘सल्तनत’, ‘यादों का बाजार’ और ‘स्वार्थी’ जैसी कई फिल्मों में उन्होंने अपने अभिनय का लोहा मनवाया।
संजीव कुमार के साथ रिश्ते की चर्चा
नीता मेहता का नाम अपने समय के दिग्गज अभिनेता संजीव कुमार के साथ जुड़ा। दोनों ने कई फिल्मों में साथ काम किया और इसी दौरान उनके बीच नजदीकियां बढ़ीं। चर्चा थी कि दोनों ने सगाई कर ली थी और जल्द शादी करने वाले थे। कहा जाता है कि संजीव कुमार चाहते थे कि शादी के बाद नीता अभिनय छोड़ दें, जबकि नीता अपने करियर को जारी रखना चाहती थीं। उन्होंने अपने परिवार के खिलाफ जाकर अभिनय की दुनिया चुनी थी, इसलिए वह इसे छोड़ने को तैयार नहीं थीं। इसी मतभेद के चलते उनका रिश्ता टूट गया।
शोहरत के बावजूद मन में खालीपन
फिल्मी सफलता, नाम और पहचान के बावजूद नीता के जीवन में एक अजीब सा खालीपन था। भौतिक सुख और ग्लैमर उन्हें वह मानसिक शांति नहीं दे पा रहे थे, जिसकी उन्हें तलाश थी। यही बेचैनी उनके जीवन में बड़े बदलाव की वजह बनी। कुछ समय बाद नीता मेहता ने फिल्मों से दूरी बनानी शुरू कर दी और अंततः पूरी तरह से बॉलीवुड छोड़ दिया। उन्होंने आध्यात्म का रास्ता चुना और खुद को आत्मिक शांति की खोज में समर्पित कर दिया।
बदला नाम, बदली पहचान
नीता मेहता ने न सिर्फ फिल्मी दुनिया को छोड़ा, बल्कि अपनी पहचान भी बदल ली। उन्होंने अपना नाम बदलकर स्वामी नित्यानंद गिरि रख लिया और संन्यास का जीवन अपना लिया। आज स्वामी नित्यानंद गिरि आध्यात्मिक वक्ता के रूप में जानी जाती हैं। वह अपना एक यूट्यूब चैनल भी चलाती हैं, जहां भक्ति, त्याग, आत्मज्ञान और जीवन के गहरे अर्थों पर अपने विचार साझा करती हैं।
एक प्रेरणादायक जीवन यात्रा
नीता मेहता की कहानी इस बात का उदाहरण है कि सच्ची सफलता सिर्फ शोहरत और दौलत में नहीं, बल्कि आत्मिक संतोष में होती है। बॉलीवुड की चकाचौंध छोड़कर आध्यात्म का मार्ग चुनना आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने साबित कर दिया कि भीतर की आवाज़ सुनना ही सबसे बड़ा साहस होता है।
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