एक्टर बनने का सपना लिए हर साल जाने कितने ही युवा सपनों की नगरी मुंबई पहुंचते हैं, लेकिन यहां पहचान बना पाना हर किसी के बस की बात नहीं होती। कुछ सपने मुकाम तक पहुंचते हैं तो कुछ रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं। अन्नू कपूर उन चुनिंदा नामों में से हैं, जिन्होंने बिना किसी फिल्मी बैकग्राउंड के बॉलीवुड में कदम रखे और अपनी अलग पहचान भी बनाई। अन्नू कपूर ने कभी परिवार का सहारा बनने के लिए चाय से लेकर लॉटरी, चूरन बेचने तक का काम किया और फिर किस्मत उन्हें एक्टिंग की दुनिया तक खींच लाई।
आईएएस बनने का था सपना
अन्नू कपूर आज के समय में टीवी से लेकर फिल्मी दुनिया तक का जाना-माना नाम बन चुके हैं, लेकिन कम लोग जानते हैं कि वह एक्टर नहीं बल्कि आईएएस अधिकारी बनना चाहते थे। अन्नू कपूर बचपन से ही पढ़ाई में काफी होशियार थे और मन में हमेशा से देश सेवा की इच्छा रही। लेकिन, परिवार की आर्थिक स्थिति ने उनका ये सपना पूरा नहीं होने दिया। परिवार की आर्थिक स्थिति के चलते वह अपनी पढ़ाई तक पूरी नहीं कर पाए। घर के हालात को देखते हुए उन्होंने कभी चाय बेची तो कभी चूरन, कभी-कभी लॉटरी बेचने का भी काम किया।
गरीबी में बीता बचपन
अन्नू कपूर के पिता का नाम मदनलाल कपूर था जो एक पारसी थिएटर कंपनी चलाते थे और मां उर्दू की टीचर थीं। परिवार की आर्थिक स्थिति कुछ खास नहीं थी, ऐसे में बचपन में परिवार को सपोर्ट करने के लिए उन्होंने कभी चाय का ठेला लगाया तो कभी लॉटरी टिकट बेची। धीरे-धीरे पढ़ाई छूटती गई और आईएएएस अफसर बनने की राह भी मुश्किल होती गई। इसी बीच उन्होंने थिएटर की दुनिया में कदम रखे और इसी कदम ने उन्हें जिंदगी का नया लक्ष्य दिया। अपने पिता की थिएटर कंपनी में काम करते हुए उन्होंने अपने अभिनय कौशल को निखारा और फिर एक्टिंग की दुनिया की ओर रुख किया।
22 की उम्र में बन गए 70 साल के बुजुर्ग
अन्नू कपूर के लिए एक्टिंग के दरवाजे खुले, लेकिन उन्हें 22 साल की उम्र में 70 साल के बुजुर्ग का किरदार निभाना था। ये किरदार उनके लिए काफी चुनौतीपूर्ण था, लेकिन उन्होंने 22 की उम्र में भी 70 साल के बुजुर्ग का किरदार इतनी खूबसूरती से निभाया कि दर्शक हैरान रह गए। उनके प्रदर्शन ने मशहूर फिल्म निर्देशक श्याम बेनेगल का ध्यान भी अपनी तरफ खींचा। श्याम बेनेगल अन्नू कपूर से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने उन्हें अपनी फिल्म 'मंडी' के लिए चुन लिया और इसी के साथ अन्नू कपूर के अभिनय की गाड़ी चल निकली।
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