हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर को अंतिम विदाई देने के लिए गुरुवार देर रात पुणे में हजारों लोग जुटे। 75 वर्षीय अभिनेता का अंतिम संस्कार उनके फार्महाउस पर पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया गया। इस दौरान हर तरफ ‘नाना अमर रहें’ के नारे सुनाई दिए। बेटे मल्हार पाटेकर ने पिता को मुखाग्नि दी। हालांकि, अंतिम संस्कार के दौरान मल्हार के एक खास अंदाज ने लोगों का ध्यान खींचा। मुखाग्नि देने से पहले उन्होंने ‘पा’ कहकर जोर से आवाज लगाई और अपना हाथ उल्टा करके मुंह पर रखा। आखिर अंतिम विदाई के समय किए गए इस इशारे के पीछे क्या वजह है और क्या यह किसी परंपरा से जुड़ा है? आइए जानते हैं।
नाना पाटेकर को अंतिम विदाई देते समय मल्हार ने क्यों किया ऐसा इशारा?
नाना पाटेकर के अंतिम संस्कार से जुड़ा यह दृश्य इसलिए चर्चा में है, क्योंकि आमतौर पर लोग अंतिम विदाई के दौरान भावुक होकर अपने प्रियजन को याद करते नजर आते हैं, लेकिन कुछ क्षेत्रों और समुदायों में अंतिम संस्कार के दौरान विशेष रीति-रिवाज भी निभाए जाते हैं। मल्हार पाटेकर के ‘पा’ कहकर आवाज लगाने और मुंह पर उल्टा हाथ रखने के दृश्य को भी इसी संदर्भ में देखा जा रहा है। हालांकि इस खास क्रिया के पीछे मल्हार की व्यक्तिगत मंशा या उनके परिवार की ओर से इसकी कोई आधिकारिक व्याख्या सामने नहीं आई है। इसलिए इसे किसी निश्चित धार्मिक कारण से जोड़कर देखना उचित नहीं होगा।
क्या है हाथ उल्टा करके मुंह पर रखने और आवाज लगाने की परंपरा?
भारत में अंतिम संस्कार की परंपराएं अलग-अलग क्षेत्रों, समुदायों और परिवारों के अनुसार बदलती हैं। महाराष्ट्र समेत कुछ स्थानों पर अंतिम विदाई के समय विशेष आवाज निकालने या पारंपरिक संकेत करने जैसी स्थानीय प्रथाएं देखने को मिल सकती हैं। इन रीति-रिवाजों का अर्थ भी समुदाय की मान्यताओं के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। हालांकि हाथ उल्टा करके मुंह पर रखने और जोर से चिल्लाने की क्रिया को पूरे हिंदू धर्म की अनिवार्य परंपरा नहीं कहा जा सकता। कुछ लोक मान्यताओं में ऐसी क्रियाओं को मृत्यु के बाद आत्मा की यात्रा, मृतक से अंतिम विदाई और सांसारिक मोह से अलग होने के प्रतीक के रूप में समझा जाता है। वहीं कुछ आध्यात्मिक व्याख्याओं में तेज आवाज को नकारात्मक ऊर्जा दूर करने से भी जोड़ा जाता है, लेकिन इन व्याख्याओं को धार्मिक आस्था और लोकविश्वास के रूप में ही देखना चाहिए। इनके पीछे किसी एक सार्वभौमिक हिंदू धार्मिक नियम या वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित प्रक्रिया का दावा नहीं किया जा सकता।
फार्महाउस पर हुआ नाना पाटेकर का अंतिम संस्कार
नाना पाटेकर का अंतिम संस्कार पुणे के डोंजे गांव स्थित उनके फार्महाउस पर किया गया। उनके सहयोगियों के मुताबिक, अभिनेता की इच्छा थी कि अंतिम संस्कार उनके फार्महाउस पर ही हो। ‘क्रांतिवीर’ और ‘खामोशी: द म्यूजिकल’ जैसी फिल्मों में अपने दमदार अभिनय से पहचान बनाने वाले नाना पाटेकर के निधन की खबर से फिल्म जगत और उनके प्रशंसकों में शोक की लहर दौड़ गई। गुरुवार तड़के गोवा स्थित अपने घर पर नाना पाटेकर का निधन हो गया था। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, उन्हें दिल का दौरा पड़ने की आशंका जताई गई। उनके पार्थिव शरीर को गोवा से पुणे लाया गया, जहां कई प्रमुख हस्तियों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी।
अंतिम विदाई में शामिल हुईं कई बड़ी हस्तियां
नाना पाटेकर को श्रद्धांजलि देने के लिए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पुणे अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पहुंचे थे। अंतिम संस्कार में महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार, केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले और मुरलीधर मोहोल समेत कई राजनीतिक हस्तियां मौजूद रहीं। राज्य के मंत्रियों चंद्रकांत पाटिल, उदय सामंत और माधुरी मिसाल के अलावा सांसद सुनील तटकरे भी अंतिम विदाई में शामिल हुए। फिल्म जगत से अभिनेता जैकी श्रॉफ, मकरंद अनासपुरे और निर्माता साजिद नाडियाडवाला सहित कई हस्तियां पहुंचीं। इस दौरान लोगों ने नम आंखों से अभिनेता को विदाई दी। नाना पाटेकर की फिल्मों, उनके अभिनय और उनके अलग अंदाज को याद करते हुए फैंस ने उन्हें श्रद्धांजलि दी।
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