तमिल फिल्म इंडस्ट्री और संगीत प्रेमियों के लिए यह सप्ताह दुखद खबरों से भरा रहा है। संगीतकार देवा के निधन के कुछ ही दिनों बाद अब मशहूर प्लेबैक सिंगर कृष्णराज रामासामी ने भी दुनिया को अलविदा कह दिया। 75 वर्षीय कृष्णराज का चेन्नई में निधन हो गया। उनके जाने से तमिल फिल्म संगीत जगत में शोक की लहर है। फिलहाल उनके निधन की वजह सामने नहीं आई है। कृष्णराज और संगीतकार देवा की जोड़ी ने लंबे समय तक साथ काम किया और कई यादगार गाने दिए। दोनों के बीच पेशेवर रिश्ते के साथ गहरा जुड़ाव भी था।
देवा के निधन के बाद एक और दुखद खबर
कृष्णराज के निधन की खबर गुरुवार को सामने आई। इससे पहले 17 अक्टूबर को संगीतकार देवा का निधन हुआ था। देवा और कृष्णराज ने कई फिल्मों में साथ काम किया था और उनके सहयोग से बने गीत तमिल संगीत प्रेमियों के बीच लोकप्रिय रहे। इसी बीच देवा के भतीजे और अभिनेता कार्तिक सबेश का भी 20 अक्टूबर को निधन हो गया था। लगातार मिल रही इन दुखद खबरों ने तमिल फिल्म जगत को झकझोर दिया है। कृष्णराज के पार्थिव शरीर को शुक्रवार सुबह उनके गृहनगर सेलम जिले के वेम्बडितालम ले जाया जाएगा। गायिका अनुराधा श्रीराम उनके चेन्नई स्थित आवास पर पहुंचीं और परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की। देवा के निधन के बाद भी अनुराधा भावुक हो गई थीं। कृष्णराज के घर पर भी वह परिवार से बातचीत करते हुए अपने आंसू नहीं रोक सकीं।
मुख्यमंत्री विजय समेत कई कलाकारों ने जताया दुख
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और अभिनेता सी जोसेफ विजय ने कृष्णराज के निधन पर शोक व्यक्त किया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर तमिल भाषा में श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि इस खबर से उन्हें गहरा सदमा लगा है। विजय के मुताबिक कृष्णराज की विशिष्ट आवाज और जोश से भरे गीतों ने प्रशंसकों के दिलों में खास जगह बनाई थी। उनका जाना तमिल सिनेमा के लिए बड़ी क्षति है। उन्होंने दिवंगत गायक के परिवार, दोस्तों, सहकर्मियों और संगीत प्रेमियों के प्रति संवेदना जताई। गायिका चिन्मयी श्रीपदा ने भी इस खबर पर दुख जाहिर किया। उन्होंने लिखा कि यह सप्ताह बेहद कठिन रहा है। वहीं, गायिका सुजाता मोहन ने कृष्णराज को याद करते हुए कहा कि देवा के निधन के तुरंत बाद यह एक और बड़ा झटका है। उन्होंने बताया कि कृष्णराज, देवा के पसंदीदा गायकों में से एक थे और उनके कई गीतों में कृष्णराज ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। सुजाता ने यह भी याद किया कि कृष्णराज ने देवा के कई गानों के काम में मार्गदर्शन किया था, जिन्हें गाने का उन्हें अवसर मिला।
शरतकुमार ने याद किए कृष्णराज के लोकप्रिय गीत
अभिनेता शरतकुमार ने भी कृष्णराज के निधन पर शोक जताते हुए उनके साथ अपने जुड़ाव को याद किया। उन्होंने बताया कि तमिल सिनेमा में कृष्णराज की आवाज 300 से अधिक गीतों में सुनाई दी। इनमें उनकी फिल्मों के कई गाने भी शामिल हैं, जो आज तक उनके दिल के करीब हैं। शरतकुमार ने ‘विन्नुक्कुम मन्नुक्कुम’ के ‘पासमुल्ला सूरियने’, ‘सिम्मरासी’ के ‘थाये थिरिसूली’, ‘मूवेंद्र’ के ‘सोक्कू सुंदरी’, ‘नटपुकागा’ के ‘करुडा करुडा’ और ‘पेरिया कावल थोजिल’ के ‘नालु वार्थई पेसलैए’ जैसे गीतों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कृष्णराज की आवाज में मौजूद गहराई और भावनात्मक अभिव्यक्ति उन्हें हमेशा संगीत प्रेमियों के दिलों में जीवित रखेगी। शरतकुमार ने इसे संगीत जगत के लिए अपूरणीय क्षति बताते हुए उनके परिवार और साथी कलाकारों के प्रति संवेदना व्यक्त की।
बुनकर से प्लेबैक सिंगर बनने तक का सफर
कृष्णराज का संगीत तक पहुंचने का सफर आसान नहीं था। फिल्मों में गायक के रूप में पहचान बनाने से पहले वह बुनकर के तौर पर काम करते थे। संगीत में रुचि के चलते उन्होंने वाद्ययंत्र बजाना सीखा और विभिन्न संगीत मंडलियों के साथ-साथ धार्मिक आयोजनों में भी गाने लगे। इसी दौरान वह फिल्म इंडस्ट्री में मौका तलाशते रहे। उनका पहला रिकॉर्ड किया गया गीत ‘अधिकालाई सुवेलाई’ नाम की ऐसी फिल्म के लिए था, जो रिलीज नहीं हो सकी। इस गीत का संगीत देवा ने तैयार किया था। बाद में 1990 के दशक में कृष्णराज को पहचान मिली और देवा के साथ उनकी साझेदारी लगातार मजबूत होती गई। दोनों ने 2000 के दशक तक कई यादगार गीतों पर काम किया।
‘थंजावूरू मन्नु एदुथु’ आज भी है यादगार
कृष्णराज के करियर के सबसे चर्चित गीतों में 1997 की फिल्म ‘पोरक्कालम’ का ‘थंजावूरू मन्नु एदुथु’ खास स्थान रखता है। इस गाने की लोकप्रियता तमिल सिनेमा तक सीमित नहीं रही। सिंगापुर के पूर्व राष्ट्रपति एस. आर. नाथन की राजकीय अंत्येष्टि के दौरान भी यह गीत बजाया गया था। बताया गया कि इसे उनकी अंतिम इच्छाओं में शामिल किया गया था। कृष्णराज ने अपनी आवाज और गायकी के जरिए तमिल फिल्म संगीत में एक अलग पहचान बनाई। उनके गीत लंबे समय तक श्रोताओं के बीच लोकप्रिय रहे और कई कलाकारों के साथ उनका काम याद किया जाता रहेगा। उनके निधन से संगीत जगत ने एक ऐसी आवाज खो दी है, जिसकी पहचान उसकी ऊर्जा, भावनाओं और विशिष्ट अंदाज से थी।
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