हम अक्सर 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' जैसी प्रेरक लाइनें सुनते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत अब भी इससे बहुत दूर है। आज भी समाज में ऐसे लोग हैं, जो बेटी को पालना नहीं चाहते। आज ऐसी ही एक बेटी का किस्सा आपके लिए लाएक हैं, जिसे आंख खोलते ही उसके मां-बाप ने उसे खुद से जुदा कर दिया, लेकिन उस बच्ची की किस्मत में कुछ और ही लिखा था। अपनी मजबूत तकदी के दम पर उस बच्ची के सिर पर एक मसीहा का हाथ पड़ा, जो उसे बेटी बनाकर घर ले आया और अपना नाम दिया। इस बच्ची की परवरिश कर शख्स ने न सिर्फ बड़ा किया, बल्कि उसे एक सफल नामी प्रोड्यूसर भी बनाया। जिंदगी की कसौटी पर खरा उतरने वाला ये शख्स कोई और नहीं बल्कि निर्देशक प्रकाश झा हैं।
वो दर्दनाक फोन कॉल
जहां बेटियां गर्भ में ही मार दी जाती हैं, सड़कों पर या कूड़ेदानों में छोड़ दी जाती हैं। इसी कड़ी में एक ऐसा दिल दहला देने वाला वाकया हुआ जब बॉलीवुड के जाने-माने फिल्म निर्देशक प्रकाश झा की जिंदगी बदल गई। वो एक ऐसी बच्चा का सहारा बने जिसे उसे मां-बाप छोड़ गए थे। 2015 में पेरेंट सर्कल को दिए एक साक्षात्कार में प्रकाश झा ने एक ऐसी घटना का जिक्र किया जो ऑस्कर विजेता कहानियों से भी आगे थी। दरअसल साल 1988 की बात है। तब प्रकाश दिल्ली के एक अनाथालय में वॉलंटियर हुआ करते थे। उन्हें वहां से एक फोन आया, जिसमें बताया गया कि एक 10 दिन की बच्ची को किसी ने किसी थिएटर की सीट के नीचे छोड़ दिया था, उसकी हालत इतनी खराब थी कि कोई भी उसे देख कर कांप उठे।
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संघर्ष से इलाज तक
बच्ची का पूरा शरीर गंभीर रूप से संक्रमित था। चूहे, कीड़े-मकोड़े, संक्रमण, सभी कुछ एक साथ उसे शरीर पर अटैक कर रहा था। बच्ची के शरीर को चूहों ने नोच दिया था। अगले ही पल प्रकाश झा ने उस नन्हीं बच्ची को अपने घर ले आए और डॉक्टर की मदद से उसकी मरहम-पट्टी शुरू कर दी। उनकी वाइफ, दीप्ति नवल ने भी इस मुहिम में उनका पूरा साथ दिया। बच्ची की हालत इतनी दर्दनाक थी कि हर अंग में संक्रमण फैला हुआ था। प्रकाश झा ने तुरंत इलाज शुरू करवाया, डॉक्टरों की टीम दिन-रात उसे ठीक करने में लगी रही। दीप्ति और प्रकाश की भी हिम्मत और धैर्य ने उस समय उनके ऊपर भारी दबाव को संभालने में मदद की। धीरे-धीरे वह बच्ची ठीक होने लगी। इसके बाद, प्रकाश और दीप्ति ने उस बच्ची को गोद ले लिया और उसका नाम रखा दिशा झा।
तलाक, लेकिन रिश्ते नहीं टूटा
उस वक्त प्रकाश और दीप्ति की अपनी कोई संतान नहीं थी, लेकिन दिशा ने उनकी जिंदगी में एक नई धड़कन भर दी थी। हालांकि, कुछ समय बाद दीप्ति प्रेग्नेंट हुईं, लेकिन 8 महीने की प्रेग्नेंसी के बाद मिसकैरेज हो गया। यह भारी सदमा था, जिसने उनके रिश्ते में दरारें ला दीं और तलाक तक की राह तैयार कर दी। तलाक हो जाने के बाद, प्रकाश झा ने दिशा की परवरिश अकेले ही की। दीप्ति ने भी अपनी आजादी के बाद बेटी के साथ मजबूत रिश्ता बनाए रखा। पिता प्रकाश अक्सर दिशा को सेट पर ले जाते, वह फिल्मों की दुनिया से दोस्ताना बढ़ा रही थी।
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पटना का रूहानी ठिकाना
कुछ साल बाद, दिशा को पटना में उनकी प्रकाश की मां (दादी) के पास छोड़ दिया गया था, जो उनकी देखभाल करती थीं, लेकिन जब प्रकाश झा की मां का देहांत हुआ तो प्रकाश झा बेटी को फिर से अपने साथ ले आए। इस बीच, दीप्ति और दिशा के रिश्ते में कोई दूरी नहीं आई, यह दिखाता है कि सच्चा प्यार परिस्थितियों से ऊँचा होता है। दिशा झा के जीवन के संघर्ष और कठिनाइयों ने उन्हें मजबूत ही नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भी बना दिया। उन्होंने फिल्म प्रोडक्शन में हाथ आजमाया, पिता के साथ मिलकर 2019 में 'फ्रॉड सइयां' बनाई। इसके साथ ही दिशा ने अपना खुद का प्रोडक्शन हाउस शुरू किया, जिसका नाम है 'पेन पेपर सीजर एंटरटेनमेंट'। आज वो इंडस्ट्री का बड़ा नाम हैं और अपने बैनर तले कई सितारों को मौका दे रही हैं।