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अभिनेत्री सौकार जानकी का निधन, 94 साल की उम्र में ली अंतिम सांस, चेन्नई के निजी अस्पताल में चल रहा था इलाज

 Reported By: T Raghavan Written By: Himanshi Tiwari
 Published : Aug 21, 2026 03:55 pm IST,  Updated : Aug 21, 2026 04:33 pm IST

सौकार जानकी का 94 की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने चेन्नई के एक निजी अस्पताल में 21 अगस्त 2026 को अंतिम सांस ली। पद्म श्री से सम्मानित सौकार जानकी ने अपने सात दशक लंबे करियर में चार भाषाओं की 400 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया।

Sowcar Janaki Dies at 9- India TV Hindi
सौकार जानकी का निधन Image Source : X/@RASHTRAPATIBHVN

पद्म श्री से सम्मानित सौकार जानकी का 94 साल की उम्र में निधन हो गया है। चेन्नई के एक प्राइवेट अस्पताल के ICU में इलाज के दौरान उन्होंने आखिरी सांस ली। वह कुछ समय से सांस लेने में तकलीफ और बुढ़ापे से जुड़ी समस्याओं से जूझ रही थी। हाल ही में उनकी तबीयत फिर से बहुत बिगड़ गई और परिवार वाले उन्हें चेन्नई के कावेरी अस्पताल ले गए, जहां उनका निधन हो गया। नादिगर संगम के प्रेसिडेंट नासर ने भी इस दुख खबर की पुष्टि की है। हाल ही में एक्टर कयाल देवराज ने सोशल मीडिया पर सौकार जानकी के अस्पताल में भर्ती होने की खबर शेयर की थी और उनकी सेहत के बारे में जानकारी दी थी।

सौकार जानकी का 7 दशक लंबे करियर का अंत

1950 में सौकार जानकी ने LV प्रसाद की डायरेक्ट की हुई तेलुगु फिल्म 'शावुकारु' से सिनेमा में डेब्यू किया। उन्होंने 1952 में TR सुंदरम की डायरेक्ट की हुई फिल्म 'वलयापति' से तमिल सिनेमा में कदम रखा। इतने सालों में जानकी ने अपने करियर में तेलुगु, तमिल, कन्नड़ और मलयालम फिल्मों में बेहतरीन काम किया है। 1959 में उन्होंने कन्नड़ सिनेमा की पहली पैन-इंडिया फिल्म 'महिषासुर मर्दिनी' में डॉ. राजकुमार के साथ काम किया। मलयालम सिनेमा में उन्होंने 1964 की फिल्म 'स्कूल मास्टर' से डेब्यू किया। जानकी ने 1991 में दूरदर्शन के तमिल शो 'ऊरारिंदा रहस्यम' से टेलीविजन की दुनिया में कदम रखा।

पद्म श्री सम्मानित सौकार जानकी ने 4 भाषाओं में किया काम

सौकार जानकी ने तेलुगु, मलयालम, तमिल और कन्नड़ भाषाओं में लगभग 400 से ज्यादा फिल्मों और एक मलयालम फिल्म में काम किया। वह अपनी शानदार अदाकारी से दर्शकों का दिल जीतने में कामयाब रही। भारत सरकार ने फिल्म इंडस्ट्री में उनके योगदान के लिए उन्हें 2022 में पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया था। सौकार जानकी ने अपने करियर में कई बेहतरीन फिल्मों में काम किया था, जिसमें 'वड्डंते डब्बा', 'कन्या शुल्कम', 'पिच्ची पुलैया', 'रेचुक्का-पगतीचुक्का', 'रोजुलु मरायी', 'सोंथवूर', 'जयम मनदे', 'डॉक्टर चक्रवर्ती', 'संसारम ओका चदरंगम', 'टोडिकोडल्लू', 'बाबू बंगाराम', 'गीतांजलि' जैसी कई हिट मूवीज शामिल है। आखिरी बार उन्हें 'अन्नी मांची सकुनमुले' में देखा गया था।

दिवंगत सौकार जानकी का परिवार

आंध्र प्रदेश के राजमुंदरी में एक कन्नड़ भाषी परिवार में जन्मीं सौकार जानकी, जिनका जन्म का नाम शंकरमंची जानकी था। उनकी शादी उनके परिवार ने कम उम्र में ही कर दी थी। वह आकाशवाणी मद्रास ऑल इंडिया रेडियो में रेडियो जॉकी के तौर पर काम करती थीं। 1947 में उनकी शादी शंकरमंची श्रीनिवास राव से हुई। उन्होंने गर्भवती होने के दौरान ही अपनी मैट्रिक की परीक्षा दी और बाद में असम की गुवाहाटी यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया। उनकी दो बेटियां और एक बेटा है - यज्ञ प्रभा कोटी, वेंकटरमण शंकरमंची और साची राव। वहीं सौकार की छोटी बहन कृष्णा कुमारी और पोती वैष्णवी अरविंद ने भी उन्हीं के नक्शेकदम पर चलते हुए एक्टिंग को अपना करियर बनाया।

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