1. Hindi News
  2. मनोरंजन
  3. बॉलीवुड
  4. कमाल के एक्टर के आगे थी सर्वाइवल की लड़ाई, कभी 5 साल के ईशान खट्टर को गोद में पहुंचाया सेट, कभी बना संजय दत्त की लाश, कभी सुनील शेट्टी का डुप्लीकेट

कमाल के एक्टर के आगे थी सर्वाइवल की लड़ाई, कभी 5 साल के ईशान खट्टर को गोद में पहुंचाया सेट, कभी बना संजय दत्त की लाश, कभी सुनील शेट्टी का डुप्लीकेट

 Written By: Jaya Dwivedie
 Published : Dec 29, 2025 02:18 pm IST,  Updated : Dec 29, 2025 02:18 pm IST

विनीत कुमार सिंह को 2025 में 'छावा' और 'सुपरबॉयज ऑफ मालेगांव' से बड़ी सफलता मिली। करीब 20 साल के संघर्ष, छोटे रोल, बॉडी डबल और असिस्टेंट डायरेक्टर के काम के बाद उनकी मेहनत रंग लाई। अब उन्होंने अपने संघर्ष को लोगों को साथ साझा किया है।

Vineet Kumar singh- India TV Hindi
विनीत कुमार सिंह। Image Source : VINEET KUMAR SINGH INSTAGRAM

साल 2025 विनीत कुमार सिंह के करियर में मील का पत्थर बनकर आया है। करीब बीस साल तक फिल्मों और सेट्स की परछाइयों में मेहनत करने के बाद अब जाकर इस अभिनेता को वह पहचान मिली है, जिसके वह हकदार थे। 'छावा' और 'सुपरबॉयज ऑफ मालेगांव' में उनकी दमदार परफॉर्मेंस ने न सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर उन्हें मजबूती दिलाई, बल्कि क्रिटिक्स की नजरों में भी उन्हें खास मुकाम पर पहुंचा दिया। हाल ही में एक बातचीत के दौरान विनीत ने अपने लंबे और कठिन सफर को याद करते हुए उन दिनों की झलक दिखाई, जब अभिनय एक सपना था और जिंदगी सर्वाइवल की लड़ाई।

ईशान खट्टर को गोद में उठाकर ले जाते थे विनीत कुमार

युवा के ऑल-स्टार राउंडटेबल में शामिल होकर विनीत ने एक दिलचस्प किस्सा साझा किया। उन्होंने बताया कि साल 2004 में आई फिल्म वाह लाइफ हो तो ऐसी में वह बतौर असिस्टेंट डायरेक्टर काम कर रहे थे। उसी फिल्म में आज के स्टार ईशान खट्टर एक चाइल्ड आर्टिस्ट थे। मुस्कुराते हुए विनीत ने कहा कि उस वक्त वह ईशान को गोद में उठाकर सेट पर लाया करते थे। उन्होंने साफ शब्दों में स्वीकार किया कि उनका सपना हमेशा एक्टर बनने का था, लेकिन हालात ऐसे नहीं थे कि वह तुरंत उस राह पर चल सकें। उनके लिए उस समय सबसे जरूरी था, जिंदा रहना और टिके रहना। उनका मानना है कि अगर आप हालात से हार गए तो आपकी कहानी वहीं खत्म हो जाती है।

विनीत को करने पड़े ऐसे-ऐसे काम

अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए विनीत ने बताया कि उन्हें कई ऐसे काम करने पड़े, जिनके बारे में आम तौर पर कोई बात नहीं करता। उन्होंने कभी सुनील शेट्टी के बॉडी डबल के तौर पर काम किया तो कभी संजय दत्त के लिए एक सीन में डेड बॉडी बने। विनीत के लिए यह सब अपमान नहीं, बल्कि सफर का हिस्सा था। उनका एक ही मंत्र रहा, अपने भीतर की आग को बुझने मत दो और चलते रहो। विनीत कुमार सिंह ने अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत 2002 में संजय दत्त की फिल्म पिताह से की थी, जहां उन्हें एक छोटा सा रोल मिला। इसके बाद कई सालों तक वह फिल्मों में छोटे-छोटे किरदार निभाते रहे। 2012 में अनुराग कश्यप की कल्ट फिल्म 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' में सपोर्टिंग रोल ने उन्हें थोड़ी पहचान दिलाई। इसके बाद 'मुक्काबाज' (2018) में लीड रोल ने यह साबित कर दिया कि वह अभिनय में किसी से कम नहीं हैं।

इस फिल्म से की थी करियर की शुरुआत

विनीत कुमार सिंह ने अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत 2002 में संजय दत्त की फिल्म पिता से की थी, जहां उन्हें एक छोटा सा रोल मिला। इसके बाद कई सालों तक वह फिल्मों में छोटे-छोटे किरदार निभाते रहे। 2012 में अनुराग कश्यप की कल्ट फिल्म 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' में सपोर्टिंग रोल ने उन्हें थोड़ी पहचान दिलाई। इसके बाद 'मुक्काबाज' (2018) में लीड रोल ने यह साबित कर दिया कि वह अभिनय में किसी से कम नहीं हैं। OTT प्लेटफॉर्म पर 'बार्ड ऑफ ब्लड' और 'रंगबाज' जैसी सीरीज ने उनकी लोकप्रियता को और बढ़ाया। लेकिन असली ब्रेक उन्हें 2025 में मिला, जब साल की सबसे बड़ी हिट फिल्मों में से एक 'छावा' में कवि कलश का उनका किरदार दर्शकों के दिलों में बस गया। हाल ही में वह 'तेरे इश्क' में में एक सपोर्टिंग रोल में भी नजर आए।

ये भी पढ़ें: 'ताऊ, तेरी छोरी की उम्र की हूं मैं...', लाइव रोक कर धाकड़ सिंगर ने मचा दी खलबली, बदतमीजी कर रहे शख्स की लगा दी वाट

पहले ही ऑडिशन में गजब दिखती थीं कृति सेनन, कर दी थी एक बात क्लियर, एक्टिंग देख कहेंगे- आपदा में अवसर तलाश ली!

Latest Bollywood News

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। Bollywood से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें मनोरंजन