Tuesday, May 28, 2024
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Ae Watan Mere Watan Review: सारा अली नहीं इमरान हाशमी का चला जादू, फिल्म देखने से पहले पढ़े 'ऐ वतन मेरे वतन' का रिव्यू

सारा अली खान और इमरान हाशमी की 'ऐ वतन मेरे वतन' ओटीटी अमेजन प्राइम वीडियो पर रिलीज हो गई है। अगर आप भी इस फिल्म को देखने का प्लान बना रहे हैं तो इसके पहले 'ऐ वतन मेरे वतन' का रिव्यू यहां पढ़ ले।

Sakshi Verma
Published on: March 21, 2024 10:22 IST
Ae Watan Mere Watan Review in hindi
Photo: INSTAGRAM ऐ वतन मेरे वतन रिव्यू
  • फिल्म रिव्यू: ऐ वतन मेरे वतन रिव्यू
  • स्टार रेटिंग: 2 / 5
  • पर्दे पर: March 21, 2024
  • डायरेक्टर: Kannan Iyer
  • शैली: Thriller\Drama

'ऐ वतन मेरे वतन' रिव्यू: सारा अली खान स्टारर 'ऐ वतन मेरे वतन' अमेजन प्राइम वीडियो पर रिलीज हो चुकी है। ये फिल्म क्रांतिकारी माहिला उषा मेहता के जीवन पर आधारित है, जिन्होंने स्वतंत्रता सेनानियों के साथ आजादी के लिए आवाज उठाई थीं। 1942 भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान उनका खास योगदान रहा है, जिसके लिए उन्हें याद किया जाता है। 'ऐ वतन मेरे वतन' में सारा अली खान ने उषा मेहता का किरदार निभाया है। सारा जिन्हें आखिरी बार 'मर्डर मुबारक' में एक ग्लैमरस भूमिका में देखा गया था। अब कन्नन अय्यर की 'ऐ वतन मेरे वतन' में एक क्रांतिकारी माहिला उषा मेहता की भूमिका देखा गया है। पहली बार किसी फिल्म में उनका इतना हटके लुक देखने को मिला। सारा अली खान ने फिल्म में खादी की साड़ियां पहनने नजर आईं और हर वक्त 'करो या मारो' का नारा लगाते दिखीं, लेकिन 'ऐ वतन मेरे वतन' में अपने अलग किरदार को निभाकर भी लोगों को इम्प्रेस करने में नाकामयाबी रहीं।

कहानी

'ऐ वतन मेरे वतन' की शुरुआत सारा अली खान उर्फ उषा मेहता से अपने पिता से यह कहने से होती है कि वह उड़ना चाहती है। उषा के पिता (सचिन खेडेकर) उन्हें आकाश में ऊंची उड़ान भरने के लिए पंख खोजने के लिए कहते हैं। इसके बाद फिल्म में 1940 के दशक की कहानी दिखाई जाती है जब सारा अली खान को भारत में ब्रिटेन के खिलाफ लड़ाई करते देखा जा सकता है। हालांकि, अंग्रेजों से लड़ाई के दौरान उषा को एहसास हो जाता है कि उसके पंख अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई की भावना और राष्ट्र के प्रति प्रेम है। इसके बाद अंग्रेजों से आजादी पाने के लिए उषा लोगों को एकजुट करने और भारत छोड़ो आंदोलन में लग जाती है। उषा देश की आजादी के लिए अपनी जान की बाजी लगा देती है। वहीं बिना किसी बात के परवाह किए कांग्रेस रेडियो नाम से अपना रेडियो स्टेशन शुरू कर देती है। उनके दो कॉलेज के दोस्त फहद (स्पर्श श्रीवास्तव) और कौशिक (अभय वर्मा) बाकी देशभक्त नागरिक के साथ इसमें उनका साथ देते हैं। 

वहीं आगे की कहानी में दिखाया जाता है कि तीनों अपने रेडियो की मदद से लोगों को एकजुट करने के लिए नए-नए रास्ते ढूंढते हैं। इन सब के बीच उनकी मुलाकात राम मनोहर लोहिया (इमरान हाशमी) से होती है। पहले भाग की कहानी उतनी खास नहीं थी, लेकिन उसके बावजूद फिल्म के दूसरे भाग में बहुत कुछ दिखाने को मिला। वहीं जब मुंबई क्राइम ब्रांच के हेड जॉन लायर को रेडियो बंद करने और अपराधियों को पकड़ने का काम सौंपा जाता है। उसके बाद फिल्म में थोड़ी लड़ाई-झगड़े, कुछ रोमांटिक पल, दोस्ती के साथ-साथ आजादी की लड़ाई के साथ फिल्म को खत्म किया जाता है।

डायरेक्शन

कन्नन अय्यर, जिन्होंने आखिरी बार 'एक थी डायन' डायरेक्ट की थी। इस फिल्म के लिए उन्हें दर्शकों से खूब सराहना मिली थी। वहीं 'ऐ वतन मेरे वतन' में कन्नन के डायरेक्शन में कमी दिखाई दी। इस फिल्म की कहानी लोगों का दिल जीतने में नाकामयाबी रहीं। वहीं इस कारण स्टार कास्ट की एक्टिंग पर असर पड़ा है। स्पर्श श्रीवास्तव और इमरान हाशमी ने अपने शानदार प्रदर्शन से इस फिल्म की खामियों को छिपाने की भरपूर कोशिश की, लेकिन 'ऐ वतन मेरे वतन' का डायरेक्शन और भी बेहतर होने की उम्मीद थी। वास्तविक जीवन के किरदारों को पर्दे पर पेश करना हमेशा कठिन होता है, लेकिन 'भाग मिल्खा भाग' और 'सरदार उधम' जैसी फिल्मों के सामने 'ऐ वतन मेरे वतन' की कहानी और स्टार कास्ट की एक्टिंग उतनी खास नहीं रही है। कन्नन अय्यर की इस फिल्म के दूसरे पार्ट में थ्रिलर वाइब दिखाने की कोशिश की गई, लेकिन ये बायोपिक सिर्फ नाटक बनकर रह गई है।

स्टार कास्ट एक्टिंग

उषा मेहता के किरदार में सारा अली खान पूरी तरह खरा नहीं उतर पाई कुछ न कुछ अधूरापन सा देखने को मिला। यहां तक कि एक्टिंग से ज्यादा तो एक्ट्रेस के हाथों के मूवमेंट देखने को मिले जिसे स्क्रीन पर उनकी पर बहुत असर पड़ा है। इसके अलावा, जब भी वह स्पर्श और इमरान के साथ फ्रेम दिखीं तो वह उतने अच्छे से अपना रोल करते नजर नहीं आई। 'लापता लेडीज' एक्टर स्पर्श श्रीवास्तव ने फहद के रूप में फिल्म में शानदार काम किया हैं। वह लोगों को स्वतंत्रता संग्राम के प्रति जागरूक करते हैं और ऑन-पॉइंट बात करते दिखाई दिए। इमरान हाशमी के किरदार ने तो लोगों का दिल जीत लिया। 'टाइगर 3' और' ऐ वतन मेरे वतन' जैसी फिल्मों में अपीन दमादार एक्टिंग से एक्टर ने लोगों का दिल जीतने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। राम मनोहर लोहिया के वास्तविक जीवन को इमरान हाशमी ने बहुत अच्छे से पेशा किया है। वहीं सारा के ऑनस्क्रीन पिता के रूप में सचिन खेडेकर ने परफेक्ट काम किया है।

म्यूजिक

'ऐ वतन मेरे वतन' के म्यूजिक ने सबी का ध्यान खींचा है। कोई भी फिल्म जो देशभक्ति पर आधारित होती है, उसमें भावनात्मक गीतों और रोंगटे खड़े कर देने वाले गानें हमेशा उसकी खासियत होते हैं। वहीं इस फिल्म के म्यूजिक भी दर्शकों का दिल नहीं जीत पाए। संगीतकार उत्कर्ष और उमेश धोटेकर इस अवसर का लाभ उठाने में असफल रहे। 'ऐ वतन मेरे वतन' का कोई भी गाना या बैकग्राउंड स्कोर लोगों को प्रभावित नहीं कर पाया है।

ऐसी थी फिल्म

मैं 'ऐ वतन मेरे वतन' को केवल 2 स्टार देना चाहूंगा क्योंकि फिल्म में दर्शकों के लिए कुछ भी नया था और नहीं कुछ अलग पेश किया, जिसे लगगे की फिल्म में कुछ तो नया है। यह फिल्म उषा मेहता पर आधारित है, लेकिन इतनी बड़ी जिम्मेदारी होने पर भी मेकर्स ने फिल्म को जिस तरह से पेश किया है। वह काफी निराशाजनक रहा है। हालांकि, 'ऐ वतन मेरे वतन' में सबसे बेहतरीन काम इमरान हाशमी और स्पर्श श्रीवास्तव ने किया है। बता दें कि ये फिल्म आप अमेजन प्राइम वीडियो पर देख सकते हैं। 

 

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