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अनारकली ऑफ आरा

 Published : Mar 24, 2017 02:43 pm IST,  Updated : Mar 24, 2017 02:43 pm IST
Anarkali Of Aarah
Anarkali Of Aarah
  • फिल्म रिव्यू: Anarkali Of Aarah
  • स्टार रेटिंग 2.5/5
  • पर्दे पर: Mar 24, 107
  • डायरेक्टर: अविनाश दास
  • शैली: ड्रामा फिल्म

बॉलीवुड अदाकारा स्वरा भास्कर के अभिनय से फिल्म 'अनारकली ऑफ आरा' आज सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। अविनाश दास इस फिल्म से अपने निर्देशन करियर की शुरुआत कर रहे हैं। यह फिल्म उन महिलाओं की कहानी है जो दूरस्थ एवं पिछड़े क्षेत्रों में नाच-गाकर अपना गुजर-बसर करती हैं। भीड़ के बीच ठुमके लगाने वाली इन महिलाओं से छेड़छाड़ की घटनाएं आम हैं, लेकिन इनमें से चंद महिलाएं इन ज्यादतियों के खिलाफ आवाज भी बुलंद करती हैं। बिहार की देवी और हरियाणा की सपना चौधरी उन्हीं महिलाओं का उदाहरण हैं। इन्हीं महिलाओं के जज्बे और आपबीती को पर्दे पर उतार रही है 'अनारकली ऑफ आरा'। अविनाश को इस फिल्म के लिए फैजाबाद की तारा बानो से प्रेरणा मिली है। उन्होंने तारा के बारे में काफी शोध किया। वह भी इसी तरह नाच-गाकर अपना गुजर-बसर करती थी। लोगों ने उसे प्रताड़ित करना शुरू कर दिया, उसके साथ छेड़छाड़ की गई। इस छेड़छाड़ और दुर्व्यवहार से तंग आकर वह दिल्ली के सीलमपुर की गलियों में कहीं गुम हो गई थी।

कहानी:-

फिल्म की कहानी बिहार के जिले आरा में रहने वाली सिंगर औक डांसर अनारकली (स्वरा भास्कर) के इर्द गिर्द घूमती है, जो रंगीला (पंकज त्रिपाठी) के एक ऑर्केस्ट्रा में काम करती है। अनारकली अपनी दिलकश अदाओं और लटको झटकों से पूरी भीड़ को बेकाबू कर सकती है। जहां एक तरफ वह शादी-पार्टीयों में नाचकर और कुछ डबल मीनिंग गानों से दर्शकों का मनोरंजन करती है, वहीं वह इस बात पर भी अड़ी है कि उनकी मर्जी के बिना उसे कोई हाथ भी नहीं लगा सकता। ऐसे में एक दिन आरा युनिवर्सिटी के वाइस चैंसलर और स्टेट चीफ मिनिस्टर के खास माने जाने वाले धर्मेंद्र चौहान (संजय मिश्रा) भी अनारकली की परफोर्मेंस देखने पहुंचते हैं। इसके बाद चौहान, अनारकली को दिल दे बैठते हैं और स्टेज पर उसके साथ अश्लील हरकतें करने लगते हैं। इस दौरान अनारकली, चौहान सबके सामने एक जोरदार थप्पड़ जड़ देती है। इसके बाद से ही अनारकली की जिंदगी में एक भयानक मोड़ आता है। अब फिल्म में यह देखना काफी दिलचस्प है कि चौहान, अनारकली को किन-किन तरीकों से परेशान करना शुरु करता है। क्या अनारकली एक बार फिर अपनी जिंदगी में सब ठीक कर पाएगा? अगर हां, तो कैसे? या फिर इसी तरह से उसकी पूरी जिंदगी बर्बाद हो जाएगी? ऐसे ही कई सवालों के जवाब जानने के लिए आपको सिनेमाघरों का रुख करना होगा।

अभिनय:-

स्वरा भास्कर इससे पहले फिल्म 'निल बट्टे सन्नाटा' में अपनी सोलो परफोर्मेंस से दर्शकों के सामने खुद को साबित कर चुकी है। अब इस फिल्म में भी एक बार फिर वह अपना हुनर दिखाने में कामयाब रही हैं। उन्हें फिल्म की यूएसपी कहना गलत नहीं होगा। वहीं अपनी हर फिल्म में दर्शकों को गुदगुदाने वाले संजय मिश्रा इस फिल्म में एक विलेन की भूमिका निभाते हुए नजर आ रहे हैं। उन्होंने अपने इस नेगेटिव किरदार को भी इतना बखूबी पर्दे पर उतारा है कि फिल्म देखते हुए दर्शकों को उनसे नफरत होने लगेगी। वहीं दूसरी तरफ पंकज त्रिपाठी ने भी इस बात को साबित कर दिया कि वाकई में वह एक बेहतरीन कलाकार हैं।

निर्देशन:-

अविनाश दास के निर्देशन में बनी 'अनारकली ऑफ आरा' को देखकर बिल्कुल नहीं जा सकता कि इसे किसी नए डायरेक्टर ने बनाया है। अविनाश ने इतनी खूबसूरती के साथ इसे दर्शकों के सामने परोसा है कि वह आसानी से खुद को फिल्म के साथ जोड़ लेते हैं। हालांकि फिल्म की कहानी में उठाया गया मुद्दा नया नहीं वह, लेकिन इसे फिल्म के कलाकारों, इसकी बिहारी और ईस्ट यूपी की भाषा, फिल्म की सादगी का मिक्सर इसे और भी ज्यादा बेहतरीन बना देता है। अब यह तो यकीनन कहा जा सकता है कि इसे टॉप मल्टीप्लेक्स में चाहे ज्यादा पसंद न किया जाए, लेकिन छोटे शहरों में यह काफी सराही जाएगी।

क्यों देखें:-

अगर आप कुछ गंभीर मुद्दों पर बनी फिल्में देखना चाहते हैं तो यह फिल्म आपको बिल्कुल निराश नहीं करेगी। फर्स्ट हाफ में फिल्म की रफ्तार थोड़ी धीमी जरूर रहती है, लेकिन इसका क्लाइमैक्स बेहद शानदार है। खासतौर पर फिल्म के कलाकारों ने इसे इतनी खूबसूरती से सजाया है कि आप अंत तक फिल्म के साथ बंधे रह सकते हैं। 

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