'जब आप किसी की मदद करते हैं, तो आप सभी की मदद करते हैं, मई पार्कर की कब्र पर लिखे ये शब्द 'स्पाइडर-मैन: ब्रांड न्यू डे' (की कहानी की आत्मा को चुपचाप बयां करते हैं। यह सिर्फ एक और सुपरहीरो फिल्म नहीं है, बल्कि दुख, पहचान और सही रास्ता चुनने की कीमत चुकाने की एक गहरी कहानी है। पीटर पार्कर पहले ही अपना सब कुछ खो चुका है। उसकी आंट मई अब इस दुनिया में नहीं हैं, एमजे उसे पहचानती तक नहीं, नेड को अंदाजा भी नहीं है कि वह कौन है और जो बेफिक्र सा किशोरी पीटर हम कभी देखा करते थे, वह अब बीते दिनों की बात लगता है। नतीजा यह है कि यह टॉम हॉलैंड की अब तक की सबसे डार्क और भावनात्मक रूप से परिपक्व स्पाइडर-मैन फिल्म बन कर सामने आती है।
कहानी और प्लॉट
फिल्म की शुरुआत हमें यह याद दिलाकर होती है कि भले ही 'स्पाइडर-मैन: नो वे होम' की घटनाओं के बाद दुनिया पीटर पार्कर को भूल चुकी है, लेकिन वह स्पाइडर-मैन को नहीं भूली है। वह अब भी न्यूयॉर्क का सबका प्यारा पड़ोसी सुपरहीरो है, जो ऊंची इमारतों के बीच झूलते हुए लोगों की जान बचा रहा है। लेकिन उस मुखौटे के पीछे, पीटर पूरी तरह से अकेला है। यह अकेलापन सिर्फ भावनात्मक ही नहीं है, बल्कि अब इसका असर उसके शरीर पर भी दिखने लगा है। जब से डॉक्टर स्ट्रेंज ने दुनिया के दिमाग से पीटर पार्कर की यादें मिटाई हैं, तब से उसकी स्पाइडर-शक्तियां अलग तरह से व्यवहार करने लगी हैं। वह जालों पर अपना नियंत्रण खो रहा है, उसकी इंद्रियां और तेज हो रही हैं, और उसके भीतर कुछ बदलता हुआ सा महसूस हो रहा है।
नेड अब नहीं जानता कि पीटर कौन है। एमजे किसी और के साथ अपनी जिंदगी में आगे बढ़ चुकी है। जिस जिंदगी को पीटर कभी बचाना चाहता था, अब वह उसे केवल दूर से खड़े होकर देख सकता है। कहानी में नया मोड़ तब आता है जब सेडी सिंक की 'जीन ग्रे' की एंट्री होती है। क्या वह वाकई कोई विलेन है या फिर किसी बड़ी साजिश का शिकार, यह फिल्म के सबसे बड़े रहस्यों में से एक है। बिना सस्पेंस खोले कहें तो, 'ब्रांड न्यू डे' दर्शकों की उम्मीदों के साथ बहुत चालाकी से खेलती है और शुरुआत में ही अपने सारे पत्ते नहीं खोलती। फिल्म का एक मजेदार और मेरा पसंदीदा डायलॉग एक सरप्राइज कैमियो में आता है, जहां पीटर को ब्लैक विडो द्वारा यह याद दिलाया जाता है कि जहाँ नए अवेंजर्स पूरे ब्रह्मांड के खतरों से निपट रहे हैं, वहीं वह छोटी-मोटी समस्याओं को संभाल रहा है। यह बात हंसने के लिए तो अच्छी है, लेकिन यह हमें यह भी याद दिलाती है कि स्पाइडर-मैन की कहानियां तब सबसे ज्यादा असरदार होती हैं जब उसकी लड़ाई ब्रह्मांडीय न होकर उसकी अपनी निजी जिंदगी से जुड़ी होती है।
कलाकारों की परफॉरमेंस
टॉम हॉलैंड ने स्पाइडर-मैन के रूप में अब तक का सबसे परिपक्व प्रदर्शन दिया है। अब वह हर बात पर मजाक उड़ाने वाला किशोर नहीं रहा। इस पीटर की आंखों में हर फ्रेम में एक दर्द सा दिखता है। जब वह बहुत साधारण तरीके से कहता है, 'मैं अब हाई स्कूल में नहीं हूं,' तो यह बात दिल को छू जाती है। यह महज एक संवाद नहीं, बल्कि इस बात की स्वीकारोक्ति है कि उसका बचपन हमेशा के लिए खो चुका है। फिल्म में एमजे को केवल पीटर की प्रेमिका से बढ़कर एक पहचान दी गई है। टॉम और जेंडया की केमिस्ट्री हमेशा की तरह बहुत ही सहज लगती है। कई बार उनके बीच की एक शांत बातचीत, किसी बड़े भावनात्मक ड्रामे से कहीं ज्यादा असर छोड़ जाती है। वास्तविक जीवन में भी उनका साथ होना इन दृश्यों को और खास बना देता है। 'नेड' का किरदार एक बार फिर कहानी को भावनात्मक आधार देता है। भले ही वह पीटर पार्कर को भूल चुका है, लेकिन स्पाइडर-मैन पर उसका भरोसा आज भी वैसा ही है। 'द पनिशर' के रूप में जॉन बर्न्थल का रोल भले ही बहुत बड़ा न हो, लेकिन हर सीन असरदार है। उनका सख्त अंदाज स्पाइडर-मैन के आदर्शों के साथ एक सुंदर संतुलन बनाता है। जब भी वे पीटर को किड कहते हैं, उनके सख्त चेहरे के पीछे की इंसानियत साफ झलकती है। 'ब्रूस बैनर' के रूप में मार्क फिल्म में विज्ञान और जज्बात दोनों लेकर आते हैं। चाहे वह पीटर के म्यूटेशन को समझना हो या 'हल्क' बनकर एक्शन दृश्यों में मदद करना हो, रफालो का काम बेहतरीन है। फिल्म में यह भी इशारा किया गया है कि हल्क के साथ आगे कुछ और भी नया देखने को मिल सकता है। 'स्ट्रेंजर थिंग्स' से पहचान बनाने वाली सेडी सिंक फिल्म का सबसे बड़ा सरप्राइज हैं। उनके किरदार में एक मासूमियत, रहस्य और ताकत का बहुत अच्छा मेल दिखता है।
फिल्म के बेहतरीन पल
पीटर पार्कर और स्पाइडर-मैन के बीच का आंतरिक संघर्ष इस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत है। फिल्म का एक किरदार कहता है कि पीटर के अंदर का स्पाइडर धीरे-धीरे उस इंसान पर हावी हो रहा है, और यही लाइन इस पूरी कहानी की नींव बन जाती है। यह लड़ाई किसी बाहरी विलेन से ज्यादा पीटर की खुद से लड़ाई है। फिल्म सैम राइमी की स्पाइडर-मैन फिल्मों की याद दिलाती है। पीटर फिर से अकेला है, वह अपनी पसंद की लड़की को किसी और के साथ देखते हुए भी चुप रहता है और बिना किसी उम्मीद के अपनी जिम्मेदारियां निभाता रहता है। 'स्पाइडर-मैन 3' की तरह यहाँ खतरा किसी बाहरी एलियन (सिम्बायोट) से नहीं, बल्कि पीटर के खुद के डीएनए (DNA) से है। ब्रूस बैनर के साथ उसकी बातचीत इस साइंस को MCU की दुनिया में बहुत स्वाभाविक बनाती है। हल्क और स्पाइडर-मैन को एक साथ लड़ते देखना हर मार्वल फैन के लिए एक सपना सच होने जैसा है। यह सीन केवल फैंस को खुश करने के लिए नहीं रचा गया, बल्कि बहुत ही नए और रोमांचक तरीके से पेश किया गया है।
निर्देशन
डायरेक्टर डेस्टिन डैनियल क्रेटन ने इस फिल्म को 'नो वे होम' से बड़ा बनाने के बजाय ज्यादा निजी बनाने की कोशिश की है। जहां जरूरत है, वहां फिल्म धीमी होती है और पीटर के अकेलेपन और दुख को महसूस करने का पूरा मौका देती है। साथ ही क्रेटन यह भी नहीं भूलते कि यह एक स्पाइडर-मैन फिल्म है। एक्शन सीन बहुत ही शानदार हैं, VFX बेहतरीन हैं और न्यूयॉर्क शहर एक जिंदा किरदार की तरह महसूस होता है। फिल्म में बस एक ही कमी महसूस होती है, इसकी पेसिंग। पहला हाफ जहां पीटर की मानसिक स्थिति को आराम से दिखाता है, वहीं दूसरा हाफ थोड़ा बहुत तेज़ हो जाता है और एक साथ कई नए किरदारों और कहानियों को सामने ले आता है।
क्या अच्छा लगा?
- स्पाइडर-मैन से पहले 'पीटर पार्कर' के इंसान होने पर ध्यान दिया गया है।
- टॉम हॉलैंड का अब तक का सबसे सधा हुआ और मैच्योर अभिनय।
- हल्क और स्पाइडर-मैन का साथ में एक्शन सीन।
- जीन ग्रे (सेडी सिंक) के किरदार से जुड़ा रहस्य।
क्या असर नहीं छोड़ा?
- एक साथ बहुत सारी कहानियों (पीटर का म्यूटेशन, जीन ग्रे, हल्क, पनिशर) को संभालने के चक्कर में कुछ हिस्से थोड़े जल्दबाज़ी में लगते हैं।
- यदि आप 'नो वे होम' जैसी मल्टीवर्स वाली हलचल की उम्मीद कर रहे हैं, तो यह फिल्म पैमाने में थोड़ी छोटी लग सकती है।
वर्डिक्ट
'स्पाइडर-मैन: ब्रांड न्यू डे' 'नो वे होम' के जादू को दोहराने की कोशिश नहीं करती, और यही इसकी सबसे बड़ी खासियत है। यह पीटर पार्कर को एक ऐसे मोड़ पर लाकर खड़ा करती है जहाँ वह पूरी तरह अकेला है और सवाल पूछती है: जब कोई पीटर पार्कर को याद ही नहीं रखता, तब स्पाइडर-मैन कौन है? फिल्म में भरपूर एक्शन और रोमांच है, लेकिन इसकी असली ताकत इसके जज्बातों में छिपी है। कुछ कमियों और उतार-चढ़ाव के बावजूद, क्या यह अब तक की सबसे बेहतरीन स्पाइडर-मैन फिल्म है? नहीं। लेकिन क्या यह एक अच्छी फिल्म है और आपका समय देने लायक है? बिल्कुल, हां।
(इस फिल्म का रिव्यू अनिंदिता मुखोपाध्याय ने किया है। वह इंडिया टीवी इंग्लिश के लिए लिखती हैं। यहां उनकी प्रोफाइल है।)