2 सीजन्स की जबरदस्त सफलता के बाद मनोज तिवारी एक बार फिर 'द फैमिली मैन' के तीसरे सीजन के साथ दर्शकों के बीच वापसी कर चुके हैं। द फैमिली मैन के पहले और दूसरे सीजन की जबरदस्त सफलता के बाद से ही दर्शक 'द फैमिली मैन 3' का इंतजार कर रहे थे। मनोज तिवारी इस सीरीज में थ्रेट एनालिसिस एंड सर्विलांस सेल के इंटेलिजेंस ऑफिसर श्रीकांत तिवारी की भूमिका में हैं। सीजन 3 में श्रीकांत नए मिशन पर है, लेकिन पहले दो सीजन्स से भी इसके तार जुड़े हैं। यूं तो श्रीकांत तिवारी अपने पहले वाले अंदाज में ही नजर आ रहे हैं, लेकिन एक दुश्मन को पकड़ने की चाह में वह खुद भी मोस्ट वॉन्टेड बन बैठे हैं, जो इस सीजन में एक नया ट्वविस्ट देता है। सीरीज में इस बार उनके साथ जयदीप अहलावत भी हैं, जो उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती हैं, सिर्फ प्रोफेशनल फ्रंट पर ही नहीं, पर्सनल फ्रंट पर भी। तो चलिए जानते हैं कि द फैमिली मैन 3 के साथ मनोज बाजपेयी श्रीकांत तिवारी के रूप में खरे उतरते हैं या नहीं।
द फैमिली मैन 3 की कहानी
'द फैमिली मैन 3' की कहानी कोहिमा (नागालैंड) में चल रहे एक पारंपरिक समारोह, यहां के बड़े नेता डेविड खूजो और धमाकों की एक सीरीज के साथ शुरू होती है, जिससे नॉर्थ-ईस्ट सहित पूरे देश में टेंशन का माहौल बन जाता है। दूसरी तरफ श्रीकांत तिवारी (मनोज बाजपेयी) जो एक सीक्रेट एजेंट है, एक 'टॉप क्लास स्पाई' जैसा सीरीज में उन्हें प्रोजेक्ट किया गया है अपनी पत्नी सुची, बच्चों धृति और अथर्व के साथ नए घर की पूजा में व्यस्त है। श्रीकांत अभी भी अपनी पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ में सामंजस्य नहीं बैठा पाया है। टास्क, एनआईए की एक शाखा, जिसका काम है देश पर आने वाले खतरे को रोकना और अमन-शांति बनाए रखना। अबकी बार श्रीकांत तिवारी का सामना रुक्मा (जयदीप अहलावत) से है, जो कहने को तो एक नॉर्थ-ईस्ट का बड़ा ड्रग डीलर है, लेकिन श्रीकांत के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आता है। जो मीरा (निमरत कौर) और द्वारकानाथ (जुगल हंसराज) के बड़े प्लान का हिस्सा बन जाता है।
श्रीकांत तिवारी अपने बॉस कुलकर्णी सर (दलीप ताहिल) के साथ एक समझौते प्रोजेक्ट साहाकार के सिलसिले में डेविड खूजो से मिलने नागालैंड जाता है और समझौते के लिए जाते समय श्रीकांत तिवारी, कुलकर्णी और डेविड खूजो पर हमला हो जाता है। इस हमले में कुलकर्णी और डेविड खूजो की जान चली जाती है और श्रीकांत जख्मी हो जाता है। हमले में श्रीकांत हमलावर का चेहरा देख लेता है और उसे पकड़ने में जुट जाता है, लेकिन कहानी में ट्विस्ट तब आता है जब खुद श्रीकांत सस्पेक्ट बन जाता है और टास्क (थ्रेट एनालिसिस एंड सर्विलांस सेल) उसे गिरफ्तार करने के लिए पीछे पड़ जाती है। ऐसे में श्रीकांत अपने परिवार की सुरक्षा के लिए उन्हें लेकर अंडरग्राउंड हो जाता है। हालांकि, इन सब ट्विस्ट के बाद भी शुरुआत के दो एपिसोड कुछ-कुछ जगह झेलाउ लगते हैं। सीरीज की कहानी तीसरे एपिसोड से ज्यादा दिलचस्प लगती है, लेकिन इस एपिसोड तक आने के लिए इंतजार करना बीच-बीच में मुश्किल लगने लगता है। हालांकि, बाद में जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, दिलचस्प होती जाती है।
द फैमिली मैन 3: निर्देशन, कास्ट और लेखन
सीरीज के डायरेक्टर राज और डीके की विशेष तौर पर तारीफ करनी होगी कि इन लोगों ने कास्टिंग फाइनल करते समय कलाकारों की मदर टंग, उनकी उम्र और रियल लाइफ में उनके बैकग्राउंड का पूरा ख्याल रखा है। नॉर्थ-ईस्ट के किरदारों के लिए नॉर्थ-ईस्ट के कलाकारों को ही चुना गया है। यानी हर किरदार अपनी-अपनी जगह एक दम फिट बैठता है। निर्देशक राज और डीके ने ही इस सीरीज के पहले दो सीजन और अन्य फिल्में बनाई हैं और उनके हर प्रोजेक्ट में ये खासियत देखने को मिली है। कहानी में जबरदस्ती का ग्लैमर या मैलोड्रामा नहीं है। सीरीज का लेखन सधा हुआ है। हर एपिसोड नपे-तुले तनाव के साथ आगे बढ़ता है। कहीं भी नया मोड़ दिखाने की जल्दबाजी नहीं दिखाई गई। खासतौर पर तब जब वेब सीरीज में कहानियों की कई स्ट्रीम्स एक साथ चल रही होती हैं, को साथ बांधे रखना और इन स्ट्रीम्स के साथ दर्शकों को बांधे रखना।
द फैमिली मैन 3: अभिनय
मनोज तिवारी ने पिछले दो सीजन्स की तरह इस सीजन में भी दमदार और सधे हुए हैं, जिसकी उनके फैंस को उम्मीद रहती है। श्रीकांत तिवारी के रूप में वह प्रभावशाली हैं। टेंशन के पलों में वह जितने चिंता से भरे हैं उतने ही देशभक्ति से भी लबरेज हैं। उनकी खासियत है कि जब सीरीज बताना चाहती है कि वह चिंता में हैं तो वह चिंता में लगते भी हैं। जहां डायलॉग अब्यूजिव हैं, वहां भी मनोज बाजपेयी के सहज अभिनय के चलते ये लाउड नहीं लगते। परिवार को लेकर भागते वक्त भी उनके चेहरे पर दुविधा साफ नजर आती है। उनके अभिनय के चलते कई ऑकवर्ड मोमेंट भी ऑव्यस लगने लगते हैं और इसी के चलते स्क्रिप्ट के कई औसत सीन भी दमदार हो जाते हैं।
सुचित्रा के किरदार में प्रियामणि प्रभावित करने में सफल रहती हैं। अपने अन्य प्रोजेक्ट्स की तरह फैमिली मैन में भी उन्होंने अपना बेस्ट देने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। अथर्व का किरदार निभाने वाले बच्चे वेदांत सिन्हा और धृति का किरदार निभाने वालीं लड़की महक ठाकुर भी प्रभावित करते हैं। श्रीकांत तिवारी के साइड किक जेके का किरदार निभाने वाले शारिब हाशमी भी अपनी कॉमिक से टेंशन भरे माहौल में रिलीफ लेकर आते हैं। वह कई जगह स्क्रिप्ट का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा लगते हैं। एक सीन में जहां श्रीकांत अपने पछतावे से बोझिल होता है, वहां भी जेके अपने संवाद से माहौल को हल्का कर देता है। ऐसा नहीं है कि जेके के सीन्स को देखकर ठहाके लगाकर हंसने का मन करे, लेकिन फिर भी चेहरे पर मुस्कान आ जाती है।
जयदीप अहलावत ने रुक्मा का निगेटिव किरदार निभाया है, जो जिस भी प्रोजेक्ट का हिस्सा होते हैं, उसकी जान बन जाते हैं। इसमें भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला। रुक्मा एक ड्रग डीलर जो बाद में श्रीकांत के लिए सबसे बड़ी मुसीबत बन जाता है। जयदीप अहलावत अपने हाव-भाव और डायलॉग से ये साफ करने में कोई कसर नहीं छोड़ते कि वह आने वाले समय में कितनी बड़ी चुनौती बनने वाले हैं। वो अपने शातिरपन से इतना कन्विंस करते हैं कि कोई ये सोच ही नहीं सकता कि रुक्मा का किरदार उनसे बेहतर तरीके से कोई और कलाकार निभा सकता था। गुल पनाग भी सलोनी के अपने किरदार में स्मार्ट, सिंसियर और सीरियस लगती हैं। उनका किरदार भी एक एजेंट का है, जो इस बार नॉर्थ-ईस्ट में तैनात है और यहां श्रीकांत तिवारी और उनके परिवार की अंडरग्राउंड होने में मदद करता है।
सीरीज में क्या अच्छा है
मनोज बाजपेयी स्टारर इस सीरीज की सबसे खास बात ये है कि इसकी रिसर्च। खासतौर पर लोकेशन, वहां का रहन-सहन और कलाकार। नॉर्थ-ईस्ट के टेंशन को जिस तरह से दिखाया गया है, वह शायद ही किसी सीरीज या फिल्म में दिखाए गए होंगे। कई जगह नॉर्थ-ईस्ट के इंटीरियर इलाके दिखाए गए हैं। श्रीकांत तिवारी और उसकी टीम के बीच का कनेक्शन सबसे खास है, जो अलग-अलग रहने के बाद भी एकजुट रहता है और एक-दूसरे के प्रति ईमानदार है। इस शो की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह इसमें एक्शन की भरमार नहीं है और जो सीन हैं, वह भी रियलिस्टिक लगते हैं। एक अकेला सौ पर भारी नहीं पड़ता, बल्कि टीम वर्क की ताकत दिखाई गई है।
क्या बेहतर नहीं है
ऐसा नहीं है कि सीरीज में सब कुछ अच्छा ही अच्छा है। कहीं-कहीं सीन बोझिल लगते हैं। खासतौर पर शुरुआती दो एपिसोड कहीं-कहीं बोर करते हैं और सीरीज की गति कम-कम और बोझिल सी लगती है। सीरीज में ऐसे कई सीन हैं जो इमोशनल तो हैं, लेकिन अंदर तक हिलाते नहीं हैं। रुक्मा और बॉबी के बीच के रिश्ते को और बेहतर ढंग से पेश किया जा सकता था, लेकिन इसे सीमित समय दिया गया। सीरीज का विषय निस्संदेह भारी है, लेकिन स्क्रिप्ट कभी-कभी लड़खड़ाती है।
द फैमिली मैन 3 क्यों देखें
वैसे 'द फैमिली मैन 3' एक ऐसी सीरीज नहीं है, जिसे लेकर ये कहा जाए कि ये सीरीज नहीं देखी तो क्या देखा, लेकिन इसके बारे में ये भी नहीं कहा जा सकता कि ये देखना समय की बर्बादी है। पिछले दो सीजन की तुलना में ये आपको कमतर लग सकती है मगर अगर आप श्रीकांत तिवारी के फैन हैं तो आपको ये सीरीज जरूर देखनी चाहिए, क्योंकि पिछले दो सीजन्स की तरह इसमें भी वह दमदार लगते हैं और जयदीप अहलावत अपने अभिनय से इसमें जान फूंक देते हैं। इस सीरीज की सबसे बड़ी खासियत है, इसका यथार्थवादी होना। हीरोइज्म का महिमामंडन किए बिना, एक्शन सीन्स को बनाने के लिए फिजिक्स के रूल्स के खिलाफ जाए बिना, राज और डीके ने बहुत अच्छी तरह इस स्पाई-थ्रिलर को तैयार किया है।