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36 साल पुराना TV शो, यूट्यूब पर लोग खोज-खोज कर देखते हैं 48 एपिसोड, 9.3 है IMDb रेटिंग

 Written By: Jaya Dwivedie @JDwivedie
 Published : Apr 16, 2026 10:41 am IST,  Updated : Apr 16, 2026 10:41 am IST

36 साल पहले एक ऐसा शो आया जिसने रेटिंग के मामले में 'रामायण' और 'महाभारत' को भी पीछे छोड़ दिया। इस शो को लोगों का खूब प्यार मिला और आज भी इस शो को लोग यूट्यूब पर खोजकर देखते हैं।

Chanakya- India TV Hindi
चाणक्य। Image Source : IMDB

भारतीय टेलीविजन के गोल्डन पीरियड में कुछ ऐसी कहानियां पर्दे पर उतरीं, जिन्होंने न केवल दर्शकों का मनोरंजन किया, बल्कि उन्हें इतिहास और राजनीति की गहरी समझ भी दी। 80 और 90 के दशक में टेलीविजन का महत्व आज के दौर से कहीं अधिक था। उस समय घर में टीवी होना एक बड़ी बात मानी जाती थी और पूरा मोहल्ला एक साथ बैठकर अपने पसंदीदा शोज देखता था। यह वह समय था जब टीवी सीरियल्स केवल समय बिताने का जरिया नहीं, बल्कि परिवार और समाज को एक सूत्र में पिरोने का काम करते थे।

सादगी और गहराई का अद्भुत संगम

पुराने दौर के धारावाहिकों की सबसे बड़ी विशेषता उनकी सरलता और विषयों की गंभीरता थी। आज की तरह नई तकनीक और भारी-भरकम बजट न होने के बावजूद उन शोज की पटकथा में इतनी जान होती थी कि दर्शक खुद को उनसे जुड़ा हुआ महसूस करते थे। संवाद सीधे दिल तक पहुंचते थे और कलाकार अपने अभिनय से किरदारों को अमर बना देते थे। यही कारण है कि दशकों बीत जाने के बाद भी लोग उन पुराने शोज को इंटरनेट पर ढूंढ-ढूंढ कर देखते हैं। इतिहास के पन्नों को पर्दे पर जीवंत करने वाला एक ऐसा ही महान धारावाहिक था 'चाणक्य'।

राजनीति और कूटनीति का महाकाव्य

साल 1991 में दूरदर्शन पर प्रसारित हुए इस शो ने भारतीय टेलीविजन पर सफलता के नए मापदंड स्थापित किए थे। प्रसिद्ध विद्वान और कूटनीतिकार आचार्य चाणक्य के जीवन पर आधारित इस शो को आज भी IMDb पर 9.3 जैसी शानदार रेटिंग प्राप्त है। इस टाइमलेस शो का लेखन और निर्देशन डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी ने किया था। विशेष बात यह थी कि उन्होंने खुद ही मुख्य भूमिका निभाई जो कि आचार्य चाणक्य की थी, जिसे दर्शकों ने अपार प्यार मिला।

मौर्य साम्राज्य की स्थापना और ऐतिहासिक संघर्ष

इस धारावाहिक की कहानी प्राचीन भारत के महान रणनीतिकार विष्णुगुप्त चाणक्य और मौर्य साम्राज्य की नींव रखने के उनके संकल्प के इर्द-गिर्द घूमती है। इसमें मगध के नंद वंश के पतन, सिकंदर के आक्रमण के कारण उपजी राजनीतिक अस्थिरता और चंद्रगुप्त मौर्य के उत्थान को बहुत ही बारीकी से दिखाया गया था। फिल्म जगत के दिग्गज कलाकार जैसे इरफान खान, संजय मिश्रा, दिनेश शाकुल और सुरेंद्र पाल ने इस शो में विभिन्न महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई थीं। हर एपिसोड में उस दौर की राजनीति, कूटनीति और अखंड भारत के सपने को बखूबी पेश किया गया था।

भव्यता और सांस्कृतिक प्रभाव

'चाणक्य' के कुल 48 एपिसोड प्रसारित हुए थे और हर एपिसोड दर्शकों को उस प्राचीन काल की याद दिलाता था। उस दौर में इस शो की लोकप्रियता इतनी थी कि इसके प्रसारण के समय सड़कों पर सन्नाटा पसर जाता था। टीआरपी के मामले में इसने कई रिकॉर्ड तोड़े और लोगों के बीच राष्ट्रवाद और राजनीति को लेकर एक नई बहस छेड़ दी। यह केवल एक ड्रामा नहीं था, बल्कि कूटनीति का एक जीवंत स्कूल माना जाता था।

आज के दौर में प्रासंगिकता

समय बीतने के साथ इस शो की चमक कम नहीं हुई है। आज की युवा पीढ़ी भी इस शो को यूट्यूब और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर बड़े चाव से देखती है। इसे केवल एक काल्पनिक कहानी की तरह नहीं, बल्कि भारत के गौरवशाली इतिहास और रणनीतिक कौशल को समझने के एक स्रोत के रूप में देखा जाता है। आज के चकाचौंध भरे शोज के बीच 'चाणक्य' अपनी सादगी, शुद्ध हिंदी संवादों और वैचारिक गहराई के कारण आज भी दर्शकों की पहली पसंद बना हुआ है।

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