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राधा रानी के भक्त बने पारस छाबड़ा, नाक से माथे तक लगाते हैं चंदन, बताया अनोखे तिलक का राज, सुनाई 'बिहारिन दास' की कथा

 Written By: Priya Shukla
 Published : Apr 27, 2026 04:53 pm IST,  Updated : Apr 27, 2026 04:53 pm IST

टीवी एक्टर और बिग बॉस 13 फेम पारस छाबड़ा अब अपनी लाइफस्टाइल को पूरी तरह बदल चुके हैं और आध्यात्म की राह पकड़ चुके हैं। वह अक्सर बताते हैं कि कैसे प्रेमानंद महाराज ने उनकी जिंदगी बदल दी और अब उन्होंने अपने तिलक की कहानी सुनाई है।

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पारस छाबड़ा। Image Source : INSTAGRAM/@PARASCHHABRA

टीवी एक्टर पारस छाबड़ा बिग बॉस 13 के दौरान खूब सुर्खियों में रहे थे। सीजन के विनर और दिवंगत अभिनेता सिद्धार्थ शुक्ला से पहले खिटपिट और फिर दोस्ती के चलते वह शो के दौरान लगातार चर्चा में रहे और अब वह अपनी लाइफस्टाइल को लेकर सुर्खियों में रहते हैं। पारस छाबड़ा अब यूट्यूबर बन चुके हैं और 'आबरा का डाबरा' नाम का पॉडकास्ट भी चलाते हैं। पारस, प्रेमानंद महाराज और कृष्ण के बड़ भक्त बन चुके हैं, जिनके बारे में वह अक्सर अपने पॉडकास्ट में बात करते रहते हैं। पारस कई बार बता चुके हैं कि कैसे प्रेमानंद महाराज की शरण में जाने के बाद उनकी जिंदगी बदल गई। अपने पॉडकास्ट में वह अक्सर भक्ति और आस्था के बारे में भी बात करते हैं और अब इसी कड़ी में उन्होंने अपने अनोखे तिलक के बारे में भी बात की।

पारस छाबड़ा क्यों लगाते हैं माथे से नाक तक तिलक?

पारस छाबड़ा ने अपने हालिया पॉडकास्ट में बताया कि वह माथे से नाक तक तिलक क्यों लगाते हैं और इसी के साथ उन्होंने बिहारिन दास की अनोखी कहानी भी सुनाई। पारस अपने तिलक की कहानी बताते हुए कहते हैं- 'मुगल शासन काल में अकबर ने सख्त नियम लागू किया था कि कोई भी उनकी सभा में किसी प्रकार का धार्मिक चिन्ह या तिलक लगाकर नहीं आएगा। अगर कोई ऐसा करता है तो उसका सिर कलम कर दिया जाएगा। उनका ये आदेश सुनकर राधा रानी के एक भक्त संत बिहारिन दास जो श्री हरिदास के शिष्य थे, सोच में पड़ गए। उनके लिए तिलक सिर्फ एक चिह्न नहीं बल्कि उनके आराध्या का श्रृंगार था। वह अपने माथे पर चंदन नहीं लगाते तो खुद को अधूरा सा महसूस करते थे।'

संकट में बिहारिन दास को याद आए आराध्य

पारस आगे कहते हैं- 'संकट की घड़ी में बिहारिन दास को अपने आराध्य राधा रानी याद आए। अपने भक्त की व्याकुलता को देख राधा रानी प्रकट हुईं और दास जी की व्यथा सुनकर राधा रानी ने अपने चरणों से उनके माथे पर लगे तिलक को नाक तक लंबा कर दिया। फिर उन्होंने दास जी से कहा कि अब तुम जाओ, देखते हैं कि तुम्हारा सिर कौन कलम करता है। जैसे ही बिहारिन दास तिलक लगाकर अकबर के दरबार में पहुंचे तो सैनिकों ने उन्हें पकड़ लिया और बादशाह के सामने पेश कर दिया। अकबर ने गुस्से में पूछा कि मेरे मना करने के बाद भी तिलक क्यों लगाया? तब दास जी ने पूरी सच्चाई बयान कर दी और कहा कि ये तिलक उन्होंने नहीं बल्कि स्वयं राधा रानी ने लगाया है। तब अकबर ने उस तिलक की दिव्यता देखते हुए न केवल दास जी को छोड़ दिया बल्किये भी माना कि यही असली संत और असली भक्त हैं।'

पारस ने ली दीक्षा

पारस छाबड़ा ने बताया कि उनके माथे पर जो तिलक लगा है ये उस ऐतिहासिक घटना और राधा रानी के चरणों के आशीर्वाद का प्रतीक है। पारस ने हाल ही में बताया था कि उन्होंने जब से गुरु दीक्षा ली है, तब से वह गले में तुलसी की माला पहनने लगे हैं और माथे पर चंदन का तिलक लगाते हैं। पारस पिछले कुछ समय से लगातार तिलक लगाए दिखाई दे रहे हैं, फिर चाहे उनका पॉडकास्ट हो या फिर कोई इवेंट।

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