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Explainer: लालू लिखेंगे तेजस्वी का भाग्य या NDA के सीएम होंगे 'नीतीश कुमार', बिहार लिखेगा नई इबारत?

 Written By: Kajal Kumari @lallkajal
 Published : Jun 07, 2025 03:05 pm IST,  Updated : Jun 07, 2025 05:32 pm IST

बिहार विधानसभा चुनाव में इस बार एनडीए ने नीतीश कुमार पर दांव खेलने की बात कही है तो वहीं लालू, तेजस्वी को हर हाल में मुख्यमंत्री बनाने की कवायद में लगे हैं। कई मायनों में इस बार अहम होगा बिहार का विधानसभा चुनाव, जानें इस एक्सप्लेनर में...

बिहार विधानसभा चुनाव...- India TV Hindi
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 Image Source : FILE PHOTO

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए तारीखों का ऐलान जल्द ही होने वाला है। राज्य में 243 सीटों पर होने वाले चुनाव पर सबकी निगाहें टिकी हैं क्योंकि इस बार भी एनडीए ने नीतीश कुमार के चेहरे पर ही चुनाव बनाने का मन बनाया है तो वहीं दूसरी तरफ राजद सुप्रीमो लालू यादव अपने छोटे बेटे तेजस्वी को इंडिया गठबंधन का सीएम चेहरा बनाने की बिसात बिछाने में लगे हुए हैं। बिहार की मौजूदा नीतीश सरकार का कार्यकाल 23 नवंबर 2020 को शुरू हुआ था और  22 नवंबर 2025 को पूरा हो जाएगा। इसे देखते हुए सितंबर-अक्तूबर में आचार संहिता लग सकती है, फिर बीच में महापर्व छठ भी होगा। इसे भी ध्यान में रखकर बिहार में चुनाव की तारीखों का ऐलान होगा।  

बिहार विधानसभा चुनाव 2025
Image Source : FILE PHOTOबिहार विधानसभा चुनाव 2025

पिछली बार का कैसा रहा समीकरण

बिहार विधानसभा चुनाव में भाजपा और जदयू का साथ काफी पुराना है और दोनों ने साथ मिलकर कई चुनाव लड़े हैं। साल 2020 में दोनों ने साथ मिलकर चुनाव लड़ा था, जिसमें जदयू ने 245 में से 115 सीटों पर और बीजेपी ने 110 सीटों पर चुनाव लड़ा था। बीजेपी को 74 सीटों पर जीत मिली थी और जेडीयू को 43 सीटों पर। सूत्रों के अनुसार एनडीए में इस बार के चुनाव के लिए सीट बंटवारे पर बात लगभग तय हो चुकी है। बता दें कि लोक सभा चुनाव में बीजेपी ने 17, जेडीयू ने 16, एलजेपी ने 5 और हम और राष्ट्रीय लोक मोर्चा ने एक-एक सीट पर चुनाव लड़ा था और यही फॉर्मूला विधानसभा चुनाव में रह सकता है।

फिर से एक बार हो....नीतीशे कुमार हो

विरोधी पक्ष नीतीश कुमार को लेकर कई तरह की बातें कर रहा है, कहा जा रहा है कि उनका मानसिक स्वास्थ्य ठीक नहीं, राजद-कांग्रेस के साथ ही नीतीश कुमार के लिए 'फिर से एक बार हो नीतीशे कुमार हो' का नारा गढ़ने वाले प्रशांत किशोर लगातार उनपर हमलावर हैं। बीजेपी सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि बिहार में नीतीश कुमार ही एनडीए का चेहरा रहेंगे और पीएम मोदी और नीतीश कुमार के नाम और काम पर चुनाव लड़ा जाएगा। वहीं नीतीश कुमार के स्वास्थ्य को लेकर चल रही खबरों पर बीजेपी का कहना है कि इसे मुद्दा बनाना आरजेडी को भारी पड़ेगा। नीतीश कुमार की साख और लोकप्रियता निर्विवाद है और एनडीए को निश्चित रूप से इसका फायदा मिलेगा।

बिहार विधानसभा चुनाव 2025
Image Source : FILE PHOTOबिहार विधानसभा चुनाव 2025

आखिर क्यों पीएम मोदी के लिए इतना खास है बिहार

बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर एनडीए इस बार किसी तरह की कोई गलती करने के मूड में नहीं है और पीएम मोदी ने भी चुनाव को लेकर राज्य में दौरे तेज कर दिए हैं। पीएम मोदी के लिए बिहार इतना अहम क्यों है ये इसी बात से पता चलता है कि पहलगाम आतंकी हमले के बदले का ऐलान भी पीएम मोदी ने बिहार की धरती, मधुबनी) से ही किया था। पीएम मोदी का तीसरा दौरा फिर 20 जून को होने वाला है। पीएम मोदी का दौरा इस बात का संकेत है कि हर हाल में भाजपा का बेहतर प्रदर्शन और एनडीए की बड़ी जीत है। क्योंकि कहा जाता है कि, 'दिल्ली' का रास्ता यूपी-बिहार होते हुए ही तय हो सकता है।

बिहार चुनाव मैनेजमेंट एनडीए के लिए अहम

जब तक सुशील कुमार मोदी जीवित थे तब तक बिहार में चुनाव का मैनेजमेंट वही संभालते थे। उनके राजनीतिक रिश्ते भले ही नीतीश कुमार अच्छे या खराब रहे हों, आपसी रिश्ते बेहतर थे। सुशील कुमार मोदी की नीतीश से सियासी दोस्ती हमेशा बनी रही। लेकिन इस बार के चुनाव में मैनेजमेंट संभालने वाला कोई चेहरा भाजपा के पास नहीं दिख रहा है। ऐसे में नीतीश को साध कर साथ बनाए रखना जरूरी है और इसीलिए पीएम नरेंद्र मोदी मैनेजमेंट को सुचारू बनाने का काम कर रहे हैं।

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Image Source : FILE PHOTOबिहार विधानसभा चुनाव 2025

महागठबंधन में तेजस्वी का बोलबाला

बिहार में महागठबंधन की बात करें तो इसमें राजद, कांग्रेस, विकासशील इंसान पार्टी, CPI, CPM और CPI (ML) शामिल हैं और कांग्रेस की तरफ से स्पष्ट किया जा चुका है कि वह महागठबंधन में रहकर ही चुनाव लड़ेगी। लालू इस बार अपने छोटे बेटे तेजस्वी यादव को हर हाल में सीएम की कुर्सी पर बैठाने के लिए सियासी बिसात बिछा चुके हैं और राजद की ओर से कई बार ऐलान किया जा चुका है कि तेजस्वी ही मुख्यमंत्री चेहरा होंगे। 

कांग्रेस अब भी तेजस्वी यादव को महागठबंधन का मुख्यमंत्री उम्मीदवार मानने को तैयार नहीं है। लेकिन, कुछ कांग्रेस नेता भी इसकी पुष्टि कर चुके हैं। इसके साथ तेजस्वी के 17 महीने के उपमुख्यमंत्री कार्यकाल में बिहार के युवाओं के लिए रोजगार और शिक्षा पर जोर दिया, जिसे राजद अब प्रचारित कर रही है। लेकिन तेजस्वी की राह आसान नहीं है। क्योंकि नीतीश की अति पिछड़ा वर्ग (36%) और गैर-यादव ओबीसी वोट बैंक पर पकड़ मजबूत है। नीतीश की सियासी चतुराई, बीजेपी की हिंदुत्व पिच और जन सुराज जैसी नई ताकतें तेजस्वी के लिए चुनौती पेश कर रही हैं।

बिहार विधानसभा चुनाव 2025
Image Source : FILE PHOTOबिहार विधानसभा चुनाव 2025

 
लालू का गृह कलह 

लालू परिवार में तेज प्रताप यादव और तेजस्वी के रिश्ते बहुत बेहतर नहीं कहे जा रहे हैं। तेजस्वी के लिए तेज प्रताप भी मुश्किलें खड़ी कर सकते हैं, लेकिन लालू ने इससे पहले ही डैमेज कंट्रोल करते हुए तेज प्रताप को अलग कर दिया है। तेज प्रताप की एक महिला के साथ तस्वीरें वायरल होने के बाद लालू ने अपने गृह कलह को सुलझाते हुए तेज प्रताप को पार्टी और परिवार से निष्कासित कर दिया है। लालू तेजस्वी को सीएम बनाने के लिए इस बार किसी तरह का कोई रिस्क नहीं लेना चाहते।

पीके-ओवैसी भी बन सकते हैं एनडीए के लिए बड़ा रोड़ा 

इस बार के चुनाव के लिए चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर अब खुलकर मैदान में आ गए हैं और जोर शोर से तैयारियों में जुटे हैं। 2025 के चुनाव में प्रशांत किशोर भी अपनी पार्टी जनसुराज के कैंडिडेट उतारेंगे। दूसरी तरफ ओवैसी की एआईएमआईएम है जो मुस्लिम वोट काट सकती है। दोनों महागठबंधन और एनडीए दोनों के लिए बड़ी मुसीबत बन सकते हैं। प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी और ओवैसी की एआईएमआईएम की 100 सीटों पर उम्मीदवार उतारने की योजना बना रहे है जो बिहार में महागठबंधन और एनडीए दोनों का गेम बिगाड़ सकते हैं। इसके लिए बीजेपी प्लानिंग में जुटी है कि कैसे इंडिया गठबंधन के साथ पीके की जनसुराज को भी मात देनी है।

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