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महाराष्ट्र में 'सिंघम' का दनादन चल रहा है हंटर, FDA की कार्रवाई से क्यों मचा है हड़कंप?

 Written By: Kajal Kumari
 Published : Aug 22, 2026 11:01 am IST,  Updated : Aug 22, 2026 11:07 am IST

महाराष्ट्र में एफडीए की कार्रवाई से हड़कंप मचा हुआ है। इस कार्रवाई में फूड आउटलेट के भीतर से ऐसे खुलासे हो रहे हैं जिसे देखकर आप भी हैरान हो जाएंगे। क्यों हो रही है कार्रवाई, आपके लिए क्या हैं इसके मायने। कौन हैं कार्रवाई करने वाले तुकाराम मुंडे?

तुकाराम मुंडे का एक्शन- India TV Hindi
तुकाराम मुंडे का एक्शन

Highlights

  • महाराष्ट्र में एफडीए की कार्रवाई जारी
  • कई फूड आउटलेट्स के लाइसेंस रद्द
  • कौन हैं तुकाराम मुंडे?

महाराष्ट्र फ़ूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने मुंबई के सात प्रतिष्ठानों के फ़ूड लाइसेंस सस्पेंड कर दिए हैं। इनमें कोलाबा का मैकडॉनल्ड्स, बॉम्बे प्रेसिडेंसी रेडियो क्लब, मलाड का नोवारा, नरीमन पॉइंट का स्टेटस रेस्टोरेंट और खार जिमखाना शामिल हैं। इन पर फ़ूड-सेफ़्टी और साफ़-सफ़ाई के नियमों के गंभीर उल्लंघन का आरोप है। इसके अलावा, गुटखा/पान मसाला के ख़िलाफ़ कार्रवाई में मुंबई के तीन प्रतिष्ठानों को सील किया गया और छह लोगों को गिरफ़्तार किया गया है। महाराष्ट्र फ़ूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने 19-20 अगस्त को पूरे राज्य में दूध और डेयरी उत्पादों, प्रतिबंधित गुटखा/पान मसाला और अन्य खाद्य उत्पादों की जांच के लिए एक विशेष अभियान चलाया था। इन सबके बीच सवाल ये उठ रहा है कि आखिर महाराष्ट्र में तुकाराम मुंडे ऐसी कार्रवाई क्यों कर रहे हैं?

एफडीए का एक्शन
Image Source : REPORTERएफडीए का एक्शन

FDA की कार्रवाई से क्यों मचा है हड़कंप

  • जांच में सामने आई प्रमुख खामियां
  • तापमान नियंत्रण में गंभीर लापरवाही
  • रेफ्रिजरेशन उपकरणों का कैलिब्रेशन नहीं किया गया था
  • उपकरण और पाइरोमीटर के तापमान में 3°C से 5°C तक का अंतर पाया गया, जिससे खराब होने वाले और हाई-रिस्क खाद्य पदार्थ बैक्टीरिया के लिए खतरनाक तापमान क्षेत्र में पहुंचने का खतरा था।
  • कीटों का प्रकोप और अस्वच्छ परिसर 
  • जांच के दौरान जिंदा कॉकरोच, पर्याप्त Pest Traps का अभाव और किचन के फर्श पर सड़ा हुआ खाद्य कचरा पाया गया। यह कचरा खाद्य पदार्थों के भंडारण और तैयारी वाले क्षेत्रों के पास पड़ा था।

    एफडीए का एक्शन
    Image Source : REPORTERएफडीए का एक्शन
  • केमिकल और माइक्रोबियल क्रॉस-कंटैमिनेशन का खतरा
  • खाद्य पदार्थों के संपर्क में आने वाली सतहों पर गंदे सफाई के कपड़े इस्तेमाल किए जा रहे थे।
  • खुले पैकेजिंग मटेरियल को बिना उचित विभाजन के रैक पर रखा गया था।
  • खुले खाद्य पदार्थ तैयार करने वाली जगह के ठीक ऊपर लगे लाइट फिक्स्चर पर सुरक्षा कवर नहीं था और उन पर काफी धूल जमा थी।
  • कर्मचारियों को गंदे जूते और इस्तेमाल किए हुए गंदे सफाई के कपड़े छूने के तुरंत बाद हाथ धोए बिना खाने के लिए तैयार खाद्य पदार्थों को संभालते हुए पाया गया।
  • फर्जी अनुपालन रिपोर्ट जमा करने का आरोप
  • राज्य लाइसेंसिंग अथॉरिटी के समक्ष फर्जी दस्तावेज जमा करना Food Safety and Standards Act, 2006 की धारा 61 के तहत गंभीर अपराध है।
  • उपभोक्ताओं को गुमराह करने का आरोप।
  • सक्रिय कीट प्रकोप, व्यापक जैविक संदूषण, बिना कैलिब्रेशन वाले कोल्ड स्टोरेज और खाद्य सामग्री के इस्तेमाल को लेकर भ्रामक जानकारी सामने आने के बाद FDA ने माना कि प्रतिष्ठान को और समय देना जनस्वास्थ्य के लिए अस्वीकार्य जोखिम पैदा कर सकता है।
  • लाइसेंस निलंबन की अवधि के दौरान प्रतिष्ठान को किसी भी खाद्य पदार्थ का उत्पादन, बिक्री या वितरण करने पर पूरी तरह रोक है।
  • निलंबन अवधि में नियमों का उल्लंघन करने पर वैध लाइसेंस के बिना कारोबार करने के आरोप में तत्काल अभियोजन की कार्रवाई की जाएगी। 

महाराष्ट्र में चल रहा है 'सिंघम का हंटर'
बता दें कि पूरे महाराष्ट्र में फ़ूड बिज़नेस अचानक जांच के दायरे में आ गया है। रेस्टोरेंट पर छापे मारे जा रहे हैं। लाइसेंस सस्पेंड किए जा रहे हैं। क्विक-कॉमर्स वेयरहाउस की जांच हो रही है। स्कूल कैंटीन को अपना मेन्यू बदलने के लिए कहा जा रहा है। चिप्स, चॉकलेट और कोल्ड ड्रिंक्स को स्कूल कैंपस और उसके आस-पास की जगहों से हटाया जा रहा है। असुरक्षित खाने की वजह से फ़ूड सप्लायर्स पर कार्रवाई हुई है, जबकि बॉलीवुड स्टार्स को भी पान मसाला से जुड़े प्रोडक्ट्स के विज्ञापनों के लिए नोटिस मिले हैं। इस बड़े पैमाने पर की जा रही कार्रवाई के केंद्र में महाराष्ट्र फ़ूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) के कमिश्नर तुकाराम मुंडे हैं।

एफडीए का एक्शन
Image Source : REPORTERएफडीए का एक्शन

FDA की हो रही कार्रवाई इसलिए अहम है क्योंकि भारतीयों के खाना खरीदने का तरीका काफ़ी बदल गया है। ऐप के ज़रिए किराने का सामान ऑर्डर करने वाले ग्राहक को शायद कभी पता न चले कि सामान को साफ़ और ठीक से बनाए रखी गई जगह पर रखा गया था या नहीं। इसको देखते हुए तुकाराम मुंडे ने नियमों के उल्लंघन के प्रति अपनी 'ज़ीरो-टॉलरेंस' नीति पर ज़ोर देते हुए कहा, "अगर वे नियमों का पालन कर रहे हैं, तो उन्हें डरने की कोई ज़रूरत नहीं है। और जो ऐसा नहीं करते, उनके पास छिपने की कोई जगह नहीं है।"

महाराष्ट्र के स्कूलों में भी सख़्त कार्रवाई 

मुंडे के सबसे असरदार कदमों में से एक बच्चों के खान-पान से जुड़ा है। महाराष्ट्र FDA ने राज्य भर के स्कूलों को आदेश दिया है कि वे अपने कैंपस से चॉकलेट, चिप्स और कोल्ड ड्रिंक्स जैसी अनहेल्दी चीज़ों को हटा दें। यह आदेश 'फ़ूड सेफ़्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट' और FSSAI के 'स्कूलों में बच्चों के लिए सुरक्षित भोजन और संतुलित आहार नियम, 2020' के तहत जारी किया गया है।

एफडीए का एक्शन
Image Source : REPORTERएफडीए का एक्शन

फ़ूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने राज्य भर के स्कूलों को निर्देश दिया था कि  स्कूलों में और उनके कैंपस के 50 मीटर के दायरे में ज़्यादा फ़ैट, शुगर और नमक (HFSS) वाली चीज़ों की बिक्री पर रोक हो। इसके बाद, कुछ स्कूलों ने अपनी कैंटीन के मेन्यू से वड़ा पाव और समोसा हटा दिया है। अब इनकी जगह इडली, डोसा, पोहा, शीरा और उपमा ने ले ली है। एरेटेड ड्रिंक्स (गैस वाली कोल्ड ड्रिंक्स) पर भी रोक लगा दी गई है और उनकी जगह छाछ को शामिल किया गया है। मुंडे ने इसका मकसद साफ़ तौर पर बताया है कि इस कदम का मकसद छात्रों के बीच खाने-पीने की एक हेल्दी संस्कृति बनाना और आखिर में हेल्दी नागरिक तैयार करना है।

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Image Source : REPORTERएफडीए का एक्शन

कौन हैं तुकाराम मुंडे?

तुकाराम मुंडे की पहचान एक सख्त और समझौता ना करने वाले ऑफिसर की है। उन्होंने UPSC सिविल सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 20 हासिल की थी और दो दशक से ज़्यादा के करियर में उनका 25 बार ट्रांसफर हो चुका है। उनके सख्त रवैये की वजह से उन्हें "सिंघम" का लोकप्रिय उपनाम मिला है। अपने करियर के दौरान उन्होंने कई मुश्किल प्रशासनिक ज़िम्मेदारियां निभाई हैं। इसका एक जाना-माना उदाहरण सोलापुर में जल संरक्षण का काम है, जहां उनके प्रशासन के तहत की गई कोशिशों से सैकड़ों गांव टैंकर-मुक्त हो गए। उन्हें 2016 में महाराष्ट्र सरकार का 'बेस्ट कलेक्टर अवॉर्ड' भी मिला।

बार-बार होने वाले तबादले उनकी प्रशासनिक कार्यशैली की तरह ही उनकी सार्वजनिक छवि का हिस्सा बन गए हैं। समर्थक इसे एक ऐसे अधिकारी की निशानी मानते हैं जो समझौता नहीं करता; वहीं आलोचक अक्सर सवाल उठाते हैं कि क्या नौकरशाही व्यवस्था में हमेशा इतना आक्रामक रवैया अपनाया जा सकता है। अब, FDA कमिश्नर के तौर पर, वही तरीका उस चीज़ पर लागू किया जा रहा है जो राज्य के लगभग हर व्यक्ति को प्रभावित करती है, और वह है साफ सुथरा भोजन।

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