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ज्ञानेश कुमार की क्यों बढ़ी मुश्किलें, CEC को सस्पेंड किया जा सकता है? जानें क्या हैं प्रावधान

 Written By: Kajal Kumari
 Published : Oct 06, 2026 03:07 pm IST,  Updated : Oct 06, 2026 03:16 pm IST

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। उनके इस्तीफे की मांग हो रही है और ये मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। क्या सुप्रीम कोर्ट मुख्य चुनाव आयुक्त को सस्पेंड कर सकता है?

मुख्य चुनाव आयुक्त...- India TV Hindi
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार

मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार चुनाव में धांधली के आरोपों को लेकर चारों तरफ से मुश्किलों में घिरते जा रहे हैं। एक तरफ उनके इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्ष और कॉकरोच जनता पार्टी का विरोध प्रदर्शन जारी है तो वहीं सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दो अन्य चुनाव आयुक्तों को नोटिस जारी किया। यह नोटिस एक याचिका पर सुनवाई करने के दौरान जारी किया गया जिसमें आरोप लगाया गया था कि चुनाव आयोग के कई फैसले एकतरफा लिए गए थे। हालांकि, कोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त को काम करने से हटाने या सस्पेंड करने का कोई अंतरिम आदेश नहीं दिया।

सुप्रीम कोर्ट मे ये भी कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को तुरंत सस्पेंड करने की मांग असामान्य सी बात है। ज्ञानेश कुमार को तुरंत उनके पद से हटाने की मांग वाली याचिका की सुनवाई भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली बेंच, जिसमें जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना ने की। सुनवाई के बाद और तमाम तरह के सवालों के बाद ये सवाल है कि क्या किसी संवैधानिक संस्था के कामकाज के बारे में आरोपों की जांच के दौरान, अदालत उस संस्था के प्रमुख को कुछ समय के लिए पद से हटा सकती है?

क्या सुप्रीम कोर्ट CEC को सस्पेंड कर सकता है?

तो इसका जवाब है नहीं।  संविधान के तहत सुप्रीम कोर्ट के पास CEC को पद से हटाने या निलंबित करने की विशेष शक्ति नहीं है। संविधान के आर्टिकल 324(5) के अनुसार, CEC को केवल उसी प्रक्रिया और आधार पर हटाया जा सकता है जिस प्रकार सुप्रीम कोर्ट के जज को हटाया जाता है, यानी संसद द्वारा महाभियोग प्रक्रिया के जरिए। सुप्रीम कोर्ट चुनाव आयोग के फैसलों की वैधता की जांच कर सकता है। यदि कोई निर्णय कानून के विरुद्ध पाया जाता है, तो उसे रद्द किया जा सकता है।

सीईसी को हटाया जा सकता है?
Image Source : INDIATVसीईसी को हटाया जा सकता है?

सीईसी को हटाने की क्या प्रक्रिया है
संविधान में CEC को हटाने की प्रक्रिया बहुत सख्त है। कोर्ट ऐसे किसी पद पर बैठे व्यक्ति के खिलाफ़ लगे आरोप को सीधे पद से हटाने के बराबर नहीं मान सकता। हाल ही में (अक्टूबर 2026 में) चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एकतरफा फैसले लेने के आरोपों पर दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान उन्हें तुरंत सस्पेंड करने का अंतरिम आदेश देने से इनकार कर दिया है। इस मामले में कोर्ट ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा
Image Source : INDIATVसुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा

कोर्ट ने क्या क्या कहा?

  • सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि वह केवल मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर कोई फैसला नहीं दे सकती और यदि जांच में चुनाव आयोग के कोई फैसले कानून या संविधान के खिलाफ पाए जाते हैं, तो कोर्ट उन्हें रद्द या निरस्त कर सकता है। लेकिन कोर्ट में दायर याचिका में पद से हटाने और अंतरिम रोक लगाने के बीच अंतर करने की कोशिश की गई है।
  • याचिकाकर्ता कोर्ट से मांग कर रहे हैं कि जब तक ज्ञानेश कुमार के कामकाज की वैधता की जांच हो रही है, तब तक उन्हें विवादित शक्तियों का इस्तेमाल करने से अस्थायी रूप से रोका जाए। वे उन फैसलों को भी चुनौती दे रहे हैं जो कथित तौर पर संवैधानिक और कानूनी ढांचे के तहत ज़रूरी भागीदारी के बिना लिए गए थे।
  • सुप्रीम कोर्ट ने पहले पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन के कार्यकाल के दौरान यह सवाल देखा था कि क्या CEC अन्य चुनाव आयुक्तों की तुलना में ज़्यादा अधिकार का इस्तेमाल कर सकता है। कोर्ट ने आखिरकार कई सदस्यों वाले चुनाव आयोग की सामूहिक प्रकृति और बहुमत से फैसले लेने के सिद्धांत पर ज़ोर दिया। उस इतिहास की वजह से मौजूदा विवाद और भी अहम हो जाता है। 
  • कोर्ट में सुनवाई के दौरान बेंच का रवैया काफी सावधानी भरा था। CJI ने संकेत दिया कि चुनाव आयोग से आरोपों पर जवाब देने और अपनी स्थिति स्पष्ट करने की उम्मीद की जाएगी।
  • कोर्ट ने कहा कि कमिश्नरों से आम सहमति से फैसले लेने की उम्मीद की जाती है और जहां आम सहमति नहीं होती, वहां कानून बहुमत से फैसले का प्रावधान करता है। लेकिन बेंच ने सबूत से जुड़ी एक बुनियादी समस्या की ओर भी इशारा किया। 
  • 'मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त अधिनियम, 2023' की धारा 18 कहती है कि आयोग को अपना कामकाज जहां तक ​​संभव हो, सर्वसम्मति से करना चाहिए। अगर CEC और अन्य चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेद होता है, तो मामले का फैसला बहुमत से किया जाएगा।

मुख्य चुनाव आयुक्त का क्या काम है?
मुख्य चुनाव आयुक्त का पद संविधान द्वारा सुरक्षित है। चुनाव आयोग से यह उम्मीद की जाती है कि वह सरकार (कार्यपालिका) से स्वतंत्र होकर काम करे। अनुच्छेद 324 चुनावों की "देखरेख, निर्देशन और नियंत्रण" की ज़िम्मेदारी चुनाव आयोग को सौंपता है, न कि व्यक्तिगत रूप से मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) को। इसमें यह भी प्रावधान है कि जब अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की जाती है, तो CEC आयोग के अध्यक्ष के रूप में काम करते हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अनुच्छेद 324(5) के अनुसार, CEC को उसी तरीके और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है, जिन पर सुप्रीम कोर्ट के जज को हटाया जाता है।

मुश्किलों में चौतरफा घिरे ज्ञानेश कुमार
केरलम सरकार ने ज्ञानेश कुमार से जुड़े 20 साल पुराने केस में जांच के आदेश दिए हैं। केरल के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 20 साल पुराने मामले में विजिलेंस एंड एंटी करप्शन ब्यूरो (VACB) को जांच के आदेश दिए हैं। मामला सड़क परियोजना में कथित भ्रष्टाचार और मलेशियाई चीफ इंजीनियर ली सी बेन की आत्महत्या से जुड़ा है।

ज्ञानेश कुमार केरलम कैडर के रिटायर्ड IAS अफसर हैं। 2006 में वे राज्य के PWD सचिव थे। तब अंगामली से तिरुवनंतपुरम तक मुख्य सड़क के अपग्रेडेशन के लिए 215 करोड़ रुपए मंजूर हुए थे। इंडो-मलेशियन कंपनी PATI-BEL को काम मिला था। 2003 में शुरू हुआ प्रोजेक्ट अगस्त 2006 तक पूरा होना था, लेकिन तब तक सिर्फ 30% काम हुआ था। इसी दबाव में ली ने मलेशिया जाकर सुसाइड कर लिया।

चुनाव में धांधली को लेकर ज्ञानेश कुमार पर 14 फैसलों को एकतरफा लेने के आरोप हैं। उनके खिलाफ दायर याचिका में मांग की गई है कि उन्हें रद्द किया जाए। एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) बनाकर इसकी जांच हो। जांच होने तक ज्ञानेश कुमार को सस्पेंड किया जाए। जांच के लिए चुनाव आयोग के दस्तावेज देखे जाएं। सुप्रीम कोर्ट घोषणा करे कि चुनाव आयोग के फैसले अकेले मुख्य चुनाव आयुक्त नहीं ले सकते।

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