ग्रीनलैंड को अमेरिका के कंट्रोल में लाने की राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की जिद से पैदा हुई टेंशन अब सुरक्षा समझौते के माध्यम से कम होती नजर आ रही है। दरअसल, ग्रीनलैंड की पार्लियामेंट ने 3 नवंबर को अमेरिका और डेनमार्क के साथ हुई डील को मंजूरी दे दी। समझौते के पक्ष में 16 वोट पड़े। किसी भी सांसद ने इसका विरोध नहीं किया। हालांकि, 7 सांसदों ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया। अभी समझौता लागू होने से पहले डेनमार्क में इससे जुड़ी संसदीय प्रक्रिया पूरी होनी बाकी है। जानें ये विवाद कैसे अब शांति से निपट गया।
पर्दे के पीछे हुई बातचीत में तीनों देशों ने निकाला रास्ता
बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप लंबे वक्त से ग्रीनलैंड पर अमेरिकी कंट्रोल की मांग उठा रहे थे। इसकी वजह से अमेरिका और उसके सहयोगी डेनमार्क व यूरोप के देशों में तनाव फैल गया था। इस दौरान अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के अफसरों ने कई महीने तक पर्दे के पीछे चर्चा की। इसका उद्देश्य अमेरिकी सुरक्षा चिंताओं का हल निकालना और ग्रीनलैंड पर कब्जे की आशंकाओं को दूर करना था। सितंबर में इसी बातचीत के बाद डील का रास्ता निकला। जान लें कि इसी साल 22 सितंबर को न्यूयॉर्क में UNGA के दौरान डोनाल्ड ट्रंप, डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन और ग्रीनलैंड के पीएम जेन्स-फ्रेडरिक नील्सन ने डील पर साइन किए थे। अब ग्रीनलैंड की पार्लियामेंट की मंजूरी इस दिशा में अगला अहम कदम होगी।
ग्रीनलैंड के साथ डील की अहम बातें
ग्रीनलैंड, अमेरिका और डेनमार्क के बीच हुए इस समझौते में कई अहम बातें हैं। इस डील में सभी पक्षों के हितों का ख्याल रखा गया है।
- इसमें डेनमार्क की संप्रभुता व क्षेत्रीय अखंडता की पुष्टि की गई है।
- ग्रीनलैंड पर फिलहाल डेनमार्क का ही कंट्रोल रहेगा।
- अमेरिका की सैन्य भूमिका ग्रीनलैंड में बढ़ेगी। सैन्य अड्डों की संख्या बढ़ेगी।
- ग्रीनलैंड के लोगों को ग्रीनलैंड की सियासी स्थिति और उसके भविष्य का निर्णय करने का अधिकार रहेगा।
अमेरिका को क्या मिलेगा?
डील का मुख्य मकसद आर्कटिक और नॉर्थ अटलांटिक क्षेत्र की सिक्योरिटी मजबूत करना है। इसके अंतर्गत, अमेरिका को ग्रीनलैंड में अपने सैन्य अड्डे बढ़ाने की इजाजत मिलने वाली है। समझौते में अमेरिकी ‘गोल्डन डोम’ डिफेंस सिस्टम का भी जिक्र है। साथ ही, आर्कटिक के क्षेत्र में NATO की मौजूदगी, मिलिट्री एक्सरसाइज और इंटेलिजेंस जुटाने में सहयोग बढ़ाने की बात भी कही गई है।
क्या पूरा विवाद खत्म हो गया?
फिलहाल, ग्रीनलैंड, अमेरिका और डेनमार्क के बीच हुई इस डील को टेंशन कम करने की दिशा में बड़ी प्रगति माना जा सकता है। ट्रंप जहां पहले पूरे ग्रीनलैंड को अमेरिका का हिस्सा बनाने की बात कह रहे थे, वह फिलहाल ग्रीनलैंड में अमेरिकी सैन्य अड्डे बढ़ाने और खुफिया जानकारियों को इकट्ठा करने में सहयोग बढ़ाने पर मान गए हैं। लेकिन क्या तीनों देश समझौते पर आगे भी कायम रहते हैं, यह देखने वाली बात होगी।
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