स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बाद दुनिया के समुद्री व्यापार के एक और प्रमुख रास्ते पर संकट गहरा गया है। दरअसल, ईरान-अमेरिका में टेंशन के चलते होर्मुज पहले से ही बंद है और अब बाब अल-मन्दब पर भी हूती विद्रोहियों के बढ़ते हुए कंट्रोल ने भारत और चीन समेत पूरे एशिया महाद्वीप की चिंता को बढ़ा दिया है। एशिया से यूरोप जाने वाले जहाजों के सामने अब अफ्रीका महाद्वीप का बहुत बड़ा चक्कर लगाकर जाने का ऑप्शन ही बचा है। लेकिन केप ऑफ गुड होप का रास्ता करीब दोगुना लंबा है। इससे समय भी ज्यादा लगेगा और माल ढुलाई भी पहले की तुलना में महंगी हो जाएगी। ऐसे में सवाल उठता है कि बाब अल मन्दब की इस घेराबंदी का भारत-चीन के ट्रेड पर कैसे प्रभाव पड़ेगा।
हूती विद्रोहियों ने मोखा पोर्ट सिटी पर भी किया कब्जा
यमन में चल रहे संघर्ष में हूती विद्रोही, सऊदी अरब समर्थित सरकार पर भारी पड़ रहे हैं और एक के बाद एक इलाकों पर कब्जा करते जा रहे हैं। हाल ही हूती विद्रोहियों ने मोखा पोर्ट सिटी पर भी कब्जा कर लिया। हूती विद्रोहियों पर सऊदी अरब के मक्का पर भी हमला करने का आरोप लग चुका है। हूती विद्रोहियों की इस जीत से एशिया के उन देशों के व्यापार पर खतरा मंडराने लगा है जो बाब अल-मन्दब के जरिए यूरोप के तमाम देशों से व्यापार करते हैं। एशिया के ऐसे देशों की लिस्ट में भारत और चीन का नाम भी शामिल है।

केप ऑफ गुड होप ही है अब उम्मीद?
एशिया के देश, जो समंदर के रास्ते यूरोप से व्यापार करना चाहते हैं, उनके लिए अब केप ऑफ गुड होप ही उम्मीद है। अगर बाब अल-मन्दब के बजाय केप ऑफ गुड होप के रास्ते जहाज लाने और ले जाने होंगे तो इसमें समय भी ज्यादा लगेगा और पूरा अफ्रीका महाद्वीप पार करते हुए अटलांटिक महासागर से Indian Ocean में आना होगा।
यूरोप से भारत तक आने का समुद्री रास्ता
मान लीजिए कि अगर भारत को कोई सामान फ्रांस या इटली से आयात-निर्यात करना होगा तो जहाज अगर इटली से चलेगा तो उसे पहले भूमध्य सागर यानी Mediterranean Sea पार करना होगा। फिर स्पेन और मोरक्को के बीच मौजूद स्ट्रेट ऑफ जिब्राल्टर से निकलकर सीधे अटलांटिक महासागर में आना होगा। इसके बाद उन्हें करीब 8 हजार किलोमीटर लंबा पूरा अफ्रीका महाद्वीप पार करना होगा। फिर, Indian Ocean में आने के लिए अफ्रीका महाद्वीप की साउथ टिप पर मौजूद केप ऑफ गुड होप से गुजरना होगा। उसके बाद, अरब सागर में एंट्री लेकर भारत तक पहुंचा जा सकता है।
केप ऑफ गुड होप से करीब-करीब दो गुना हो जाएगी दूरी
आप इस बात को ऐसे समझ सकते हैं कि जब भारत से फ्रांस तक समंदर के रास्ते बाब अल-मन्दब से होकर जाना हो तो दोनों देशों की दूरी करीब 11 हजार किलोमीटर होगी। लेकिन अगर अब कोई जहाज केप ऑफ गुड होप से होते हुए भारत से फ्रांस जाएगा तो उसे करीब 22 हजार किलोमीटर समुद्री रास्ता तय करना होगा।
अगर एशिया या मिडिल ईस्ट से यूरोप किसी जहाज को आना-जाना तो उसे लगभग 10 से 30 दिन ज्यादा लग सकते हैं। उदाहरण के लिए, सऊदी अरब के यानबू से ताइवान की यात्रा में अभी बाब अल-मन्दब के जरिए 19 दिन लगते हैं, लेकिन अगर जहाज को अफ्रीका का चक्कर लगाकर जाना पड़ेगा तो इसमें करीब 48 दिन लग सकते हैं।
भारत और यूरोपियन यूनियन में कितना व्यापार?
काउंसिल ऑफ द यूरोपियन यूनियन के मुताबिक, भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच 2025 में 136.5 बिलियन अमेरिका डॉलर से ज्यादा का व्यापार हुआ था। इसे भारतीय रुपये में कंवर्ट करें तो यह करीब 13.09 लाख करोड़ भारतीय रुपये होता है। इसमें EU ने भारत से करीब 75.8 बिलियन डॉलर का इम्पोर्ट किया था और भारत को लगभग 60.7 बिलियन डॉलर का एक्सपोर्ट किया था।
Anadolu Agency में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, हूती विद्रोहियों के ड्रोन और हमलों के डर से बाब अल-मन्दब से जहाजों का गुजरना करीब 88 फीसदी तक कम हो गया है। हालांकि, हूती विद्रोही यही दावा कर रहे हैं कि वह सिर्फ सऊदी अरब के जहाजों पर ही हमला कर रहे हैं लेकिन बाकी देशों के जहाज भी फिलहाल बाब अल-मन्दब से निकलने का रिस्क लेने से बच रहे हैं।
बाब अल-मन्दब से होता है दुनिया का 12% व्यापार
ताजा खबर है कि हूती विद्रोहियों ने लाल सागर के अहम बंदरगाह शहर मोखा पर भी कब्जा कर लिया है। इसके अलावा, हूती विद्रोहियों ने संकरे बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट के पास कई आईलैंड्स पर भी कब्जा जमा लिया है। शांति के वक्त दुनिया का करीब 12 फीसदी व्यापार इसी समुद्री रास्ते से होता है। हूती अभी ईस्ट अफ्रीका के देश जिबूती से भी महज 32 किलोमीटर दूर हैं। जिबूती, एक छोटा सा देश है और यहां अमेरिका व अन्य देशों के मिलिट्री बेस मौजूद हैं।
(इनपुट- AP)
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