पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तानी नागरिकों को तुरंत देश छोड़ने का आदेश दिया था। इसके बाद देश के तमाम राज्यों से सैकड़ों पाकिस्तानी नागरिक भारत छोड़कर पाकिस्तान चले गए। हालांकि इस पूरी प्रक्रिया के दौरान कुछ लोगों ने दावा किया उनके पास भारत के जरूरी दस्तावेज हैं। इसमें आधार कार्ड, वोटर आई और राशन कार्ड भी शामिल हैं। ऐसे ही एक व्यक्ति ओसामा ने दावा किया कि 2008 में वह पाकिस्तान के रावलपिंडी से कश्मीर के बारामुल्ला में चला गया था। उसने कहा कि पाकिस्तान की नागरिकता होने के बावजूद उसने भारत में मतदान किया। फिलहाल उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है।
वोटर आई से जुड़े नियम
ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि किसी दूसरे देश का नागरिक भारत में मतदान कैसे कर सकता है? आइये इसी सवाल का जवाब जानने के लिए हम ये समझते हैं कि भारत में मतदाता पहचान पत्र (वोटर आई) से जुड़े नियम क्या-क्या हैं? दरअसल, भारत के संविधान के अनुच्छेद 326 में कहा गया है कि 18 साल या उससे अधिक आयु के हर भारतीय नागरिक को लोकसभा और राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं के चुनावों में मतदान करने का अधिकार है। अगर कोई व्यक्ति भारत का नागरिक नहीं है तो उसका मतदाता पहचान पत्र नहीं बनाया जा सकता है।
वोटर लिस्ट में हो सकते हैं अयोग्य
वहीं जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 16 में इसके बारे में विस्तार से बताया गया है। इसमें ऐसे कारण बताए गए हैं, जिनके लिए किसी व्यक्ति को मतदाता सूची में पंजीकरण के लिए अयोग्य ठहराया जा सकता है। अयोग्यता तब हो सकती है जब कोई व्यक्ति “भारत का नागरिक नहीं है”, अगर वह “विक्षिप्त दिमाग का है और किसी सक्षम न्यायालय द्वारा ऐसा घोषित किया गया है”, अगर वह “चुनावों के संबंध में भ्रष्ट आचरण और अन्य अपराधों से संबंधित किसी कानून के प्रावधानों के तहत मतदान करने से फिलहाल अयोग्य है।”

फार्म 6 से होता है रजिस्ट्रेशन
वहीं नए मतदाताओं को वोटर लिस्ट में रजिस्टर होने के लिए फॉर्म 6 भरना होता है। ये फार्म भारत का चुनाव आयोग जारी करता है। फार्म 6 के जरिए वोटर लिस्ट में शामिल होने के लिए आवेदक को आयु प्रमाण और पते के प्रमाण की स्वयं-सत्यापित प्रतियां प्रदान करने की आवश्यकता होती है। हालांकि आवेदक को नागरिकता का प्रमाण प्रस्तुत करने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन फॉर्म में नागरिकता की घोषणा शामिल है, जिस पर आवेदक को हस्ताक्षर करने की आवश्यकता है। यदि घोषणा झूठी पाई जाती है, तो आवेदक को आरपी अधिनियम की धारा 31 के अनुसार कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। इसके तहत आवेदक को एक वर्ष तक की कैद या जुर्माना या दोनों की सजा का प्रावधान है।
फार्म 6 भरने के बाद क्या होता है?
वहीं एक बार पूरा फॉर्म प्राप्त होने के बाद, निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) आवेदक के द्वारा किए गए सभी दावों और आपत्तियों की जांच करते हैं। वहीं जहां आवश्यक हो वहां सुनवाई के लिए नोटिस भी जारी करते हैं। इसके अलावा इस आवेदन पर अंतिम निर्णय लेते हैं। निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) द्वारा नियुक्त बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) को ईआरओ या सहायक ईआरओ की ओर से दावे और आपत्तियां एकत्र करना होता है।
कैसे होता है नागरिकता का निर्धारण?
वोटर लिस्ट को लेकर ईसीआई के मैनुअल के अनुसार, ईआरओ यह सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार है कि कोई भी अयोग्य व्यक्ति मतदाता सूची में न जोड़ा जाए। हालांकि, आमतौर पर यदि किसी नए मतदाता के आवेदक पर कोई आपत्ति नहीं है, तो नागरिकता की जांच नहीं होती है। इसमें आगे कहा गया है कि जब ईआरओ के समक्ष कोई दावा प्रस्तुत किया जाता है, तो अधिकारी को "खुद को संतुष्ट करना होगा कि आवेदक, अन्य बातों के साथ-साथ भारत का नागरिक है"। ईआरओ को उन सभी साक्ष्यों पर विचार करना चाहिए जो संबंधित व्यक्ति जांच के दौरान प्रस्तुत कर सकता है। मैनुअल में जोर दिया गया है कि ईआरओ को "बाहरी विचारों से प्रभावित हुए बिना" स्वतंत्र रूप से अपना दिमाग लगाना चाहिए।
प्रवासियों का कैसे जुड़ता है नाम?
ईसीआई के मैनुअल में कहा गया है, "यह याद रखना चाहिए कि निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) के निर्णय के खिलाफ अपील का प्रावधान है। नागरिकता के प्रमाण का दायित्व शुरू में उस आवेदक पर होगा, जो अपना नाम पहली बार वोटर लिस्ट में शामिल करने के लिए आवेदन करता है।" भारत के अन्य भागों से आए प्रवासियों के मामले में, ईआरओ को उस जिले के डीईओ से जांच करनी होती है जहां से दावेदार आए हैं। यदि किसी आवेदक के खिलाफ नागरिक न होने के लिए आपत्ति दर्ज की जाती है, तो ऐसी स्थिति में प्रमाण प्रदान करने का दायित्व आपत्तिकर्ता पर होता है। यहां, ईआरओ "संबंधित व्यक्ति से यह प्रमाण दिखाने की मांग कर सकता है कि वह भारत का नागरिक है"।
विवाहित महिलाओं का कैसे जोड़ते हैं नाम?
विवाहित महिलाओं के मामले में, जिन्होंने विवाह के परिणामस्वरूप अपना पता बदल लिया है, और जो नागरिकता के प्रमाण के रूप में दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सकती हैं, ऐसे मामलों में ईआरओ अविवाहित व्यक्ति के मतदाता के रूप में पंजीकृत होने के प्रमाण पर भरोसा कर सकता है। ऐसे मामलों में, ईआरओ विवाह के प्रमाण या उन दोनों गांवों के मुखिया द्वारा जारी किए गए प्रमाण पत्रों पर भी भरोसा कर सकता है, जहां महिला विवाह से पहले और बाद में रहती थी।
वोटर कार्ड के लिए कैसे करें अप्लाई?
चुनाव आयोग की ऑफिशियल वेबसाइट https://voters.eci.gov.in/ पर जाएं और Electors पर क्लिक करें।
ECI पर अकाउंट है तो अपना मोबाइल नंबर, पासवर्ड और कैप्चा डालकर लॉग-इन करें या फिर नया अकाउंट बनाने के लिए Sign-Up करें और फिर उसके बाद लॉग-इन करें।
Fill Form 6 पर क्लिक करें।
अपने राज्य, जिला और विधानसभा को चुनें और अपनी डिटेल्स जैसे- नाम, पिता/पति/पत्नी का नाम, घर का पूरा पता, आधार नंबर आदि सही-सही डालें।
पहचान और पते के प्रमाण के लिए सेल्फ अटेस्टेड आधार कार्ड की फोटो अपलोड करें।
कैप्चा कोड डालकर Preview & Submit पर क्लिक करें।
Submit पर क्लिक करने के बाद स्क्रीन पर पॉप-अप में Yes पर क्लिक करें।
Yes पर क्लिक करते ही ऐप्लिकेशन जमा हो जाएगा।

वैरिफिकेशन के बाद बन जाएगा वोटर कार्ड
ऐप्लिकेशन जमा होने के बाद आपको एक रेफरेंस नंबर मिलेगा। इस रेफरेंस नंबर को कहीं सेव कर लें, इस नंबर की मदद से ही आप बाद में अपने ऐप्लिकेशन का स्टेटस जान पाएंगे। इसके अलावा आप Download Acknowledgement पर क्लिक कर ऐकनॉलेजमेंट स्लिप भी डाउनलोड कर सकते हैं। बताते चलें कि ऐप्लिकेशन सब्मिट करने के बाद आपके ऐप्लिकेशन को अलग-अलग लेवल पर वैरिफाई किया जाएगा। वैरिफिकेशन पूरा होने के कुछ दिनों बाद आपको ऑनलाइन वोटर आईडी कार्ड जनरेट हो जाएगा और उसके कुछ दिनों बाद आपके पते पर वोटर आईडी कार्ड भेज दिया जाएगा।
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