ईरान में सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी है। ईरानी महिलाएं अपनी आजादी को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रही हैं। वहीं, ईरान की सरकार का कहना है कि अमेरिका को खुश करने के लिए ईरान में प्रदर्शन किए जा रहे हैं। ऐसा करने वाले लोगों को छोड़ा नहीं जाएगा। प्रशासन की तरफ से साफ किया जा चुका है कि सभी लोग अपने बच्चों को प्रदर्शनों से दूर रखें। अगर कोई प्रदर्शन में शामिल होता है तो बाद में गोली लगने की शिकायत न करे। ईरान में प्रदर्शन के दौरान 116 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं और 2600 से ज्यादा लोग गिरफ्तार हुए हैं।
ईरान की स्थिति को देखते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा कि ईरान आजादी की तरफ देख रहा है। उन्होंने ईरानी सरकार को चेतावनी देते हुए लिखा कि अगर प्रदर्शनकारियों पर गोली चलती रही तो अमेरिकी सरकार जवाब देगी। इसके बाद से कयास लगाए जा रहे हैं कि अमेरिका जल्द ही ईरान पर हमला कर सकता है। ट्रंप को हाल ही में ईरान पर सैन्य हमलों के विकल्पों पर ब्रीफिंग दी गई है, जिसमें तेहरान के गैर-सैन्य स्थलों पर हमले शामिल हैं।
अमेरिका ने हाल ही में वेनेजुएला के राष्ट्रपति को कई बार चेतावनी देने के बाद बंधक बना लिया। मादुरो के साथ उनकी पत्नी को भी बंधक बनाया गया और दोनों को अमेरिका में डिटेंसन सेंटर में रखा गया है। इसके बाद अमेरिका ने वेनेजुएला के तेल कंपनियों को नियंत्रित करने की बात भी कही है। अब अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान को भी चेतावनी दी है। ऐसे में ईरान पर भी अमेरिकी हमले के कयास लगाए जा रहे हैं। हालांकि, अमेरिका के लिए ईरान में सैन्य कार्रवाई वेनेजुएला की तरह आसान नहीं होगी। ऐसे में इसकी संभावना कम ही लगती है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार ईरान की उन सेनाओं पर हमला किया जा सकता है, जो प्रदर्शन को दबाने के लिए हिंसा का इस्तेमाल कर रही हैं। हालांकि, ऐसा करने पर अमेरिकी सैनिकों को भी खतरा होगा। वहीं, हमला होने के बाद ईरान की जवाबी कार्रवाई से अमेरिका, इजराइल समेत कई देशों को नुकसान हो सकता है।
ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका हमला करेगा, तो वह अमेरिकी सैन्य ठिकानों, जहाजों और इजराइल पर जवाबी हमला करेगा। विशेषज्ञों के अनुसार अनुसार ईरान पर हमला हुआ तो अमेरिका और इजराइल को सैन्य, आर्थिक और मानवीय नुकसान हो सकता है। ईरान अमेरिकी ठिकानों जैसे कतर में अल उदेद बेस और इजराइल पर मिसाइल या ड्रोन हमले कर सकता है। ईरान के पास बैलिस्टिक मिसाइलें और प्रॉक्सी मिलिशिया जैसे हिजबुल्लाह, हूती हैं, जो क्षेत्रीय अस्थिरता पैदा कर सकते हैं। काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस के अनुसार, मध्य पूर्व में अमेरिका के कुल 19 सैन्य ठिकाने हैं। इनमें से आठ स्थायी बेस हैं, जो बहरीन, मिस्र, इराक, जॉर्डन, कुवैत, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात में हैं। ईरान इन सैन्य ठिकानों को निशाना बना सकता है।
ईरान पर हमला हुआ तो मध्य पूर्व में अमेरिका के लगभग 40,000 से अधिक सैनिकों को खतरा होगा। इसके अलावा साइबर हमले या आतंकवादी कार्रवाईयां हो सकती हैं। ईरान की तरफ से इजराइल पर सीधे मिसाइल हमले हो सकते हैं। इससे इजराइल को भारी नुकसान हो सकता है। ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को ब्लॉक कर सकता है, जहां से वैश्विक तेल का 20% गुजरता है। इससे तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं, जो अमेरिका, इजराइल और अन्य देशों की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करेंगी। इससे भारत में भी तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं।
सऊदी अरब, यूएई और कतर के तेल क्षेत्रों पर हमले से वैश्विक ऊर्जा बाजार अस्थिर हो सकता है। इसके अलावा बड़े पैमाने पर शरणार्थी संकट बढ़ सकता है, जो दूसरे विश्व युद्ध के बाद सबसे बड़ा संकट होगा। इस हमले के कारण अमेरिका को राजनीतिक विभाजन और अंतरराष्ट्रीय आलोचना का सामना करना पड़ सकता है। कुल मिलाकर ईरान पर अमेरिकी हमले के कारण बनने वाले हालातों में लाखों लोगों की मौत का खतरा है। इसके अलावा अमेरिका को ट्रिलियन डॉलर की आर्थिक हानि और लंबे समय तक चलने वाली अस्थिरता का सामना करना पड़ सकता है।
अमेरिका ने ईरान के खिलाफ कभी खुलकर युद्ध नहीं लड़ा, लेकिन कई मौकों पर सैन्य या गुप्त कार्रवाई की है। ये कार्रवाईयां मुख्य रूप से ईरान के परमाणु कार्यक्रम, आतंकवाद या क्षेत्रीय प्रभाव को रोकने के लिए थीं।
भारत पर मुख्य रूप से आर्थिक और रणनीतिक प्रभाव पड़ेगा, क्योंकि भारत ईरान से ऐतिहासिक रूप से जुड़ा है और बड़े पैमाने पर तेल के लिए मध्य पूर्व पर निर्भर है। भारत अपने कच्चे तेल का लगभग 40-50% मध्य पूर्व से आयात करता है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं, जो भारत की जीडीपी वृद्धि को 0.3% कम कर सकती है और मुद्रास्फीति को 0.4% बढ़ा सकती है। ईरान से तेल आयात पहले से ही प्रतिबंधों से प्रभावित है, लेकिन युद्ध से पूरी आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित होगी। इससे शेयर बाजार में गिरावट, मुद्रा में कमजोरी, और व्यापार मार्गों में बाधा आ सकती है। भारत का निर्यात (जैसे रसायन, चावल) प्रभावित हो सकता है।
इस स्थिति में भारत को अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच संतुलन बनाना पड़ेगा। भारत ईरान के साथ चाबहार बंदरगाह और व्यापार करता है, जबकि इजराइल से रक्षा तकनीक साझा करता है। युद्ध से क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ेगी, जो भारत के प्रवासियों (मध्य पूर्व में 90 लाख भारतीय) की सुरक्षा को खतरा पैदा करेगी। युद्ध होने पर भारत तटस्थ रह सकता है, लेकिन ऊर्जा संकट से निपटने के लिए रूस या अन्य स्रोतों पर निर्भरता बढ़ानी पड़ेगी। कुल मिलाकर, यह भारत की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा सकता है, लेकिन भारत की विदेश नीति की लचीलता से इसे कम किया जा सकता है।
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