Sunday, January 11, 2026
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Explainer: ट्रंप की बात मानें तो खतरे में पड़ जाएगा खुद अमेरिका समेत इन 40 देशों के लोगों का भविष्य, समझिए कैसे?

डोनाल्ड ट्रंप का ग्रीनलैंड पर बयान महज कूटनीति नहीं, बल्कि उपनिवेशवाद की पुरानी सोच को फिर से हवा दे रहा है। इस आर्टिकल में समझिए कि ट्रंप की सोच दुनिया के तमाम देशों के लिए क्यों खतरनाक है।

Written By: Vinay Trivedi
Published : Jan 10, 2026 01:49 pm IST, Updated : Jan 10, 2026 01:49 pm IST
Donald trump Greenland- India TV Hindi
Image Source : AP (फाइल फोटो) डोनाल्ड ट्रंप की सोच उपनिवेशवाद की याद दिलाती है।

नई दिल्ली: ग्रीनलैंड पर डोनाल्ड ट्रंप का स्टेटमेंट महज एक भू-राजनीतिक चेतावनी नहीं, बल्कि हिस्ट्री की उस सोच में फिर से जान डालती है जिसमें ताकतवर देश समुद्र के पार मौजूद दूसरे देशों की जमीनों पर अपना अधिकार जमाते थे। ट्रंप ने जिस तरह से ग्रीनलैंड को लेकर 500 साल पुरानी बात याद दिलाते हुए बयान दिया, उससे उन्होंने उपनिवेशवाद के पुराने घावों को दोबारा कुरेद दिया। लेकिन प्रश्न ये है कि अगर खोज और जहाजों के आधार पर दुनिया की जमीनों पर दावा ना किया जाए, तो क्या दुनिया के तमाम लोगों को अपना सामान समेटकर उन देशों को लौटना पड़ेगा जहां से उनके पूर्वज कभी आए थे। डोनाल्ड ट्रंप के इस बयान ने हिस्ट्री, खोजकर्ताओं और उपनिवेशवाद की उस कहानी को फिर से बहस के केंद्र में ला दिया है।

ग्रीनलैंड पर कब्जा क्यों चाहते हैं ट्रंप?

न्यूयॉर्क पोस्ट में छपी रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने कहा, 'अभी हम ग्रीनलैंड को लेकर कुछ करने जा रहे हैं, ये चाहे उन्हें पसंद हो या नहीं। क्योंकि अगर हम ऐसा नहीं करेंगे, तो रूस या चीन में से कोई ग्रीनलैंड पर कब्जा जमा लेगा, और हम रूस या चीन को अपने पड़ोसी के तौर पर नहीं रखना चाहते।'

ट्रंप की 500 साल वाली विवादास्पद बात

ट्रंप ने ये भी कहा कि वह खुद डेनमार्क के बहुत बड़े प्रशंसक रहे हैं, महज इसलिए कि 500 ​​साल पहले उनकी एक नाव वहां पहुंच गई थी, इसका मतलब ये नहीं है कि वे उस जमीन के मालिक हो गए। मुझे विश्वास है कि हमारी भी कई बोट वहां गई होंगी। इसलिए हम लोग ग्रीनलैंड को लेकर कुछ करने जा रहे हैं, ये चाहे अच्छे तरीके से हो या फिर कठिन तरीके से।

ट्रंप का बयान क्यों है आपत्तिजनक?

जान लें कि अमेरिका के तमाम इलाकों की खोज इटली के खोजकर्ता क्रिस्टोफर कोलंबस ने की थी। उनको 1492 में अमेरिका से यूरोप का संपर्क स्थापित करने और उपनिवेशीकरण के लिए रास्ता खोलने का क्रेडिट दिया जाता है। कोलंबस के नाम बहामस, क्यूबा, हैती, जमैका और सेंट्रल अमेरिका के तमाम इलाके खोजने का श्रेय जाता है। इसी खोज के बाद यूरोप से बड़ी संख्या व्हाइट लोग अमेरिका पहुंचे और आज वहां उनके वंशज रहे हैं। सवाल है कि क्या ट्रंप के बयान उन व्हाइट अमेरिकी लोगों पर भी लागू होता है।

भारत भी पहुंचा था ये Explorer

वहीं, 1498 में वास्को द गामा, भारत के कालीकट और कोझीकोड के तट पर पहुंचे थे। वह ईस्ट अफ्रीका तटीय देशों यानी केन्या और तंजानिया भी गए थे। इसके अलावा, समुद्री रास्ते से पुर्तगाल के तमाम Explorer ब्राजील, अंगोला, मोजाम्बिक, श्रीलंका और इंडोनेशिया के कुछ भागों में गए थे।

कौन पहुंचे थे अमेरिका और कनाडा?

वहीं, स्पैनिश Explorer मेक्सिको, पेरू, फिलीपींस, चिली और कोलंबिया समुद्री रास्ते से पहुंचे थे। इसके अलावा, डच खोजकर्ता अपने जहाज से ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और इंडोनेशिया गए थे। और अमेरिका के पूर्वा तटों, कनाडा, साउथ अफ्रीका और तमाम कैरिबियन आईलैंड्स पर समुद्र के रास्ते जाने की उपलब्धि अलग-अलग ब्रिटिश और फ्रेंच Explorers के पास है।

इसके मद्देनजर बात करें तो अमेरिकी महाद्वीप के करीब 25 देशों, अफ्रीका महाद्वीप के तट वाले 10 देशों, एशिया के 10 देशों और Oceania के ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड व पैसिफिक आईलैंड पर कभी ना कभी कोई अपनी बोट या जहाज लेकर पहुंचा ही है। इसके बाद तमाम Explorers ने वहां कब्जा जमाया और कुछ ने राज किया और बाद में छोड़कर अपने देश चले गए। ट्रंप के बयान के हिसाब से देखें तो अलग-अलग देशों के उन लोगों अपने पुराने देश लौटना पड़ेगा जहां से उनके पूर्वज आए थे।

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