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दिल्ली में प्रदर्शनों के दौरान Pellet Gun का हुआ इस्तेमाल? RAF ने शुरू की जांच, क्या होती है पैलेट गन

 Written By: Kajal Kumari @lallkajal
 Published : Jul 24, 2026 07:19 pm IST,  Updated : Jul 24, 2026 08:23 pm IST

नीट पेपर लीक मामले को लेकर दिल्ली में हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान दावा किया जा रहा है कि पुलिस ने पैलेट गन का इस्तेमाल किया था। अब इसकी जांच आएएफ ने शुरू कर दी है। पैलेट गन को लेकर विवाद क्यों है?

दिल्ली में प्रदर्शन में प्रयोग हुईं पैलेट गन?- India TV Hindi
दिल्ली में प्रदर्शन में प्रयोग हुईं पैलेट गन?

Highlights

  • पैलेट गन को लेकर विवाद
  • दिल्ली में विरोध प्रदर्शन हुआ प्रयोग?
  • रैपिड एक्शन फोर्स कर रही जांच

दिल्ली में चल रहे विरोध प्रदर्शनों के दौरान ज़रूरत से ज़्यादा बल प्रयोग और पैलेट गन के इस्तेमाल के आरोपों की जांच अब रैपिड एक्शन फ़ोर्स (RAF) करेगी। रैपिड एक्शन फ़ोर्स ने दिल्ली में 20 जुलाई को हुए कॉकरोच जनता पार्टी के विरोध प्रदर्शन के दौरान ज़रूरत से ज़्यादा बल प्रयोग और पैलेट गन के इस्तेमाल के आरोपों की जांच शुरू कर दी है। सूत्रों के मुताबिक, जांच के बाद औपचारिक 'कोर्ट ऑफ़ इन्क्वायरी' पर विचार किया जाएगा। अधिकारियों ने शुक्रवार को बताया कि रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) ने उन आरोपों की जांच शुरू कर दी है जिनमें कहा गया है कि प्रदर्शनों के दौरान उसके जवानों ने ज़रूरत से ज़्यादा बल का इस्तेमाल किया, जिसमें पैलेट गन से फायरिंग भी शामिल है।

पैलेट गन के इस्तेमाल से पुलिस का इनकार

रैपिड एक्शन फ़ोर्स (RAF) ने यह कदम कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा कथित NEET पेपर लीक को लेकर 20 जुलाई को आयोजित 'चलो संसद' मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों से निपटने के तरीके पर बढ़ रही आलोचनाओं के बीच उठाया है। मीडिया रिपोर्ट में घायलों के बयानों और मेडिकल रिकॉर्ड का हवाला देते हुए दावा किया गया है कि 20 जुलाई के मार्च के दौरान कई प्रदर्शनकारी पैलेट गन से घायल हुए थे।

रिपोर्ट्स में दिल्ली में विरोध प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन के इस्तेमाल की बात कही जा रही है, जबकि दिल्ली पुलिस ने इस तरह के हथियार के इस्तेमाल से इनकार किया है और कहा है कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए उनके पास न तो पैलेट गन हैं और न ही वे इनका इस्तेमाल करते हैं। CRPF अधिकारियों ने कहा कि अभी जो जांच चल रही है, उससे पहले तथ्यों का पता लगाया जाएगा और उसके बाद ही यह तय किया जाएगा कि औपचारिक जांच की ज़रूरत है या नहीं।

गहन पड़ताल की जा रही है

सीआरपीएफ घटनाओं के क्रम को फिर से तैयार करेगी अधिकारियों ने बताया कि सेंट्रल रिज़र्व पुलिस फ़ोर्स (CRPF), जिसके तहत RAF काम करती है, ने RAF के इंस्पेक्टर जनरल को ऑपरेशन के दौरान हुई घटनाओं के क्रम को फिर से तैयार करने का निर्देश दिया है। इस जांच में प्रदर्शनकारियों को काबू करने के लिए फोर्स की कार्रवाई और उन घटनाओं, जिनमें RAF कर्मियों पर कथित तौर पर हमला हुआ था, दोनों की पड़ताल की जाएगी।

अधिकारियों ने यह भी पुष्टि की कि RAF के पास दंगा-नियंत्रण उपकरणों के हिस्से के रूप में 12-बोर पंप-एक्शन बंदूकें हैं, जिन्हें आमतौर पर पेलेट गन कहा जाता है। मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के तहत, इन हथियारों का इस्तेमाल केवल उन गंभीर स्थितियों में किया जा सकता है जिनमें जवानों को भारी खतरा हो।

पैलेट गन क्या होता है

  • पैलेट गन के एक कारतूस में 600 तक धातु या रबर के छर्रे भरे जाते हैं जो 1000 फीट प्रति सेकंड की तेज स्पीड से फैलकर निशाने को प्रभावित करते हैं।
  • पुलिस इसे भीड़ नियंत्रण का हथियार मानती है। 
  • यह गंभीर चोटें और स्थाई रूप से विकलांग बनने का कारण बन सकता है।
  • पैलेट गन को नॉन-लीथल माना जाता है।
  • इसका गलत इस्तेमाल जानलेवा साबित हो सकता है।
  • पैलेट गन एक प्रकार की राइफल होती है जो मेटल या रबर पैलेट्स से भरे कारतूस चलाती है।
  • भारत में पैलेट गन का सबसे ज्यादा इस्तेमाल जम्मू-कश्मीर में पत्थरबाजी रोकने के लिए किया जाता रहा है।

    क्या होती है पैलेट गन
    Image Source : INDIATVक्या होती है पैलेट गन

पैलेट गन इस्तेमाल की गाइडलाइंस

  • स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) के अनुसार इसे कम से कम 500 फीट की दूरी से और हमेशा कमर के नीचे निशाना लगाकर फायर करना चाहिए।
  • प्रदर्शनों में अक्सर SOP का पालन नहीं हो पाता। 
  • इससे चेहरा, आंखें और ऊपरी शरीर पर गंभीर चोटें लग सकती हैं।
  • धातु के छर्रे तो गहरी चोट पहुंचाते हैं जबकि रबर वाले भी दर्द और सूजन का कारण बनते हैं।
  • पुलिस पैलेट गन को भीड़ नियंत्रण का सुरक्षित विकल्प मानती है क्योंकि यह गोली की तरह घातक नहीं होती।
  • मानवाधिकार संगठन और चिकित्सक इसे खतरनाक बताते हैं।
  • जब भीड़ करीब होती है या गलत निशाना लगाया जाता है तो यह हथियार गंभीर चोट पहुंचा सकता है। 
  • पैलेट गन का इस्तेमाल केवल अत्यधिक जरूरी स्थिति में और सख्त SOP के साथ होना चाहिए।  

पैलेट गन से क्या होता है नुकसान 

  • 2016-17 के आंदोलनों में हजारों लोग पैलेट चोटों से प्रभावित हुए।
  • कई युवाओं की आंखें खराब हुई हैं और कई चेहरे पर स्थाई निशान रह गए।
  • पैलेट चोटों का इलाज जटिल होता है।
  • छर्रे शरीर में गहरे धंस जाते हैं।
  • सर्जरी के दौरान उन्हें निकालना मुश्किल होता है।
  • आंखों में लगने पर कॉर्निया डैमेज, रेटिना डिटैचमेंट जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
  • कई मामलों में एक से ज्यादा सर्जरी की जरूरत पड़ती है, पूरी तरह से सेहतमंद होना मुश्किल होता है।

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